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आवास न बन पाने के कारण लाभार्थी निराश
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चील्ह। विकास खंड कोन के दलापट्टी गांव में तीन वर्ष पूर्व स्वीकृत हुए प्रधानमंत्री आवास न बन पाने के कारण लाभार्थी निराश हो गए। उनका खुले आसमान से निजात पाने और अपनी स्वयं की छत होने का अरमान चकनाचूर हो गया।
जानकारी के मुताबिक, दलापट्टी गांव निवासी शंभू सोनकर पुत्र गिरजा शंकर और शीला देवी पत्नी भरतलाल को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सत्र 2016-17 में आवास मिला था। इसकी प्रथम किस्त 44 हजार रुपया उनके खाता में आ भी गई थी लेकिन भूमिहीन होने के कारण ये लोग अपने गांव में कहीं भी आवास नहीं बनवा पा रहे थे। एक माह पूर्व सरकार की ओर से उन्हें जमीन पट्टा किया गया लेकिन जमीन गड्ढे में होने के कारण ज्यादा मिट्टी भराव लोग नहीं कर पाए। शासन की ओर से बराबर भवन निर्माण करने का दबाव बनाया जा रहा था। कम धन के कारण दोनों लोगों को मकान बनवा पाना संभव नहीं था। इसमें काफी प्रयास के बाद उन्होंने मैटेरियल तो गिरा दिया लेकिन मकान का निर्माण नहीं प्रारंभ करा सके। शीला देवी ने मकान का निर्माण कार्य रुकवा दिया क्योंकि सरकार द्वारा मिले सारे पैसे की निर्माण सामग्री खरीदने और मिट्टी पटवाने में खर्च हो गए। मकान का निर्माण न हो पाने पर विभाग ने रुपया वापस करने हेतु आरसी जारी कर दिया गया। तहसील की ओर से धन वापस कराने का दबाव खाते में आए रुपया 44 हजार वापस करने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके चलते, उनका आवास निर्माण का सपना अधूरा ही जान पड़ता है।
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जानकारी के मुताबिक, दलापट्टी गांव निवासी शंभू सोनकर पुत्र गिरजा शंकर और शीला देवी पत्नी भरतलाल को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सत्र 2016-17 में आवास मिला था। इसकी प्रथम किस्त 44 हजार रुपया उनके खाता में आ भी गई थी लेकिन भूमिहीन होने के कारण ये लोग अपने गांव में कहीं भी आवास नहीं बनवा पा रहे थे। एक माह पूर्व सरकार की ओर से उन्हें जमीन पट्टा किया गया लेकिन जमीन गड्ढे में होने के कारण ज्यादा मिट्टी भराव लोग नहीं कर पाए। शासन की ओर से बराबर भवन निर्माण करने का दबाव बनाया जा रहा था। कम धन के कारण दोनों लोगों को मकान बनवा पाना संभव नहीं था। इसमें काफी प्रयास के बाद उन्होंने मैटेरियल तो गिरा दिया लेकिन मकान का निर्माण नहीं प्रारंभ करा सके। शीला देवी ने मकान का निर्माण कार्य रुकवा दिया क्योंकि सरकार द्वारा मिले सारे पैसे की निर्माण सामग्री खरीदने और मिट्टी पटवाने में खर्च हो गए। मकान का निर्माण न हो पाने पर विभाग ने रुपया वापस करने हेतु आरसी जारी कर दिया गया। तहसील की ओर से धन वापस कराने का दबाव खाते में आए रुपया 44 हजार वापस करने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके चलते, उनका आवास निर्माण का सपना अधूरा ही जान पड़ता है।
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