{"_id":"594ffd4f4f1c1b9d448b461b","slug":"171498414415-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर बंद हो गई घंटाघर की घड़ी की टिकटिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर बंद हो गई घंटाघर की घड़ी की टिकटिक
Updated Sun, 25 Jun 2017 11:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मिर्जापुर। घंड़ी की साफ-सफाई नहीं होने से घंटाघर की प्रसिद्घ घंड़ी एकबार फिर बंद हो गई, जिससे लोगों को समय देखने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर के घंटाघर में 31 मई 1891 को सुप्रसिद्घ घड़ी का निर्माण हुआ था। घंटाघर की घड़ी का निर्माण शुद्घ देसी पत्थरों से किया गया था, जिसकी लंबाई लगभग 100 फुट है। काफी समय तक मिर्जापुर के लोगों को समय बताने वाली घड़ी लापरवाही के चलते बंद हो गई। इसके बाद तत्कालीन मंडलायुक्त सत्यजीत ठाकुर की पहल पर घंटाघर की घड़ी की मरम्मत शुरु हुई। इसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष राजकुमारी खत्री और ईओ संजय कुमार ने लगभग चार लाख रुपये खर्च करके इंडियन टॉवर क्लॉक कंपनी के प्रोपराइटर बच्चन सिंह से घंटाघर की घड़ी का निर्माण कराया। लगभग छह माह तक चलने के बाद लापरवाही के चलते एक बार फिर घंटाघर की घड़ी चलना बंद हो गया है। जिससे जनता में खासा रोष है।
नगर के घंटाघर में 31 मई 1891 को सुप्रसिद्घ घड़ी का निर्माण हुआ था। घंटाघर की घड़ी का निर्माण शुद्घ देसी पत्थरों से किया गया था, जिसकी लंबाई लगभग 100 फुट है। काफी समय तक मिर्जापुर के लोगों को समय बताने वाली घड़ी लापरवाही के चलते बंद हो गई। इसके बाद तत्कालीन मंडलायुक्त सत्यजीत ठाकुर की पहल पर घंटाघर की घड़ी की मरम्मत शुरु हुई। इसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष राजकुमारी खत्री और ईओ संजय कुमार ने लगभग चार लाख रुपये खर्च करके इंडियन टॉवर क्लॉक कंपनी के प्रोपराइटर बच्चन सिंह से घंटाघर की घड़ी का निर्माण कराया। लगभग छह माह तक चलने के बाद लापरवाही के चलते एक बार फिर घंटाघर की घड़ी चलना बंद हो गया है। जिससे जनता में खासा रोष है।
विज्ञापन