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रोक के बावजूद जर्जर शास्त्री सेतु से गुजर रहे भारी वाहन
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:16 AM IST
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मिर्जापुर। जर्जर हो गए शास्त्री सेतु पर बड़े वाहनों के गुजरने पर लोक निर्माण विभाग ने प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके बाद भी प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक पुल से गुजर रहे हैं। आए दिन पुल पर घंटों जाम लगने से कई ट्रक खड़े रहते हैं जिससे पुल पर अधिक लोड पड़ता है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है। पीडब्ल्यूडी की ओर से आगाह कराए जाने के बाद भी जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पहल पर 1976 में शास्त्री पुल बनकर तैयार हुआ था। पुल तैयार होने के दो साल बाद ही 1978 में भीषण बाढ़ आई थी जिससे जिले के छानबे, कोन, सीखड़ आदि ब्लाक में भारी तबाही मची थी। पुल बनने के कारण हजारों लोगों की जाने बच गई थी। 40 साल की अवधि पार कर चुका यह पुल अब जर्जर हो गया है। जगह जगह से इसके स्लैब टूटने लगे हैं। जगह जगह सीलिंग भी छोड़ रही है। स्लैब टूटने के कारण अंदर के सरिया भी दिखाई दे रहा है जिसमें जंग लग चुका है। पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने इसपर से भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। बावजूद इसके अभी भी भारी वाहन आते जाते देखे जा सकते हैं। जुलाई में पथरहिया से गांधी घाट तक सड़क बनने के कारण पुल जाम लग जाता था जिससे पुल पर दबाव बढ़ गया था। पुल पर लगातार बढ़ते दबाव का देखते हुए लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता राजीव श्रीवास्तव ने बोर्ड लगाकर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दिया था। इसके बाद भी सैकड़ों ट्रक शास्त्री पुल से गुजर रहे हैं। मध्य प्रदेश से करीब पांच सौ ट्रक प्रतिदिन पुल से होकर वाराणसी, जौनपुर, पश्चिम बंगाल समेत जगहों पर जाते हैं। सोनभद्र से आने वाले वाहन पुल से होकर ही गुजरते हैं। वाराणसी से इलाहाबाद के बीच एक मात्र पुल होने से वाहनों का दबाव बना रहता है। चुनार पुल से भारी वाहनों के गुजरने पर रोक है।
रमेश चंद्र, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड पुल के जर्जर स्थिति से प्रशासन को अवगत कराया गया है। भटौली पुल के बन जाने से इस पुल पर आवागमन कम होगा। मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। वैकल्पिक व्यवस्था न होने से आवागमन नहीं रुक रहा है।
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पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पहल पर 1976 में शास्त्री पुल बनकर तैयार हुआ था। पुल तैयार होने के दो साल बाद ही 1978 में भीषण बाढ़ आई थी जिससे जिले के छानबे, कोन, सीखड़ आदि ब्लाक में भारी तबाही मची थी। पुल बनने के कारण हजारों लोगों की जाने बच गई थी। 40 साल की अवधि पार कर चुका यह पुल अब जर्जर हो गया है। जगह जगह से इसके स्लैब टूटने लगे हैं। जगह जगह सीलिंग भी छोड़ रही है। स्लैब टूटने के कारण अंदर के सरिया भी दिखाई दे रहा है जिसमें जंग लग चुका है। पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने इसपर से भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। बावजूद इसके अभी भी भारी वाहन आते जाते देखे जा सकते हैं। जुलाई में पथरहिया से गांधी घाट तक सड़क बनने के कारण पुल जाम लग जाता था जिससे पुल पर दबाव बढ़ गया था। पुल पर लगातार बढ़ते दबाव का देखते हुए लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता राजीव श्रीवास्तव ने बोर्ड लगाकर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दिया था। इसके बाद भी सैकड़ों ट्रक शास्त्री पुल से गुजर रहे हैं। मध्य प्रदेश से करीब पांच सौ ट्रक प्रतिदिन पुल से होकर वाराणसी, जौनपुर, पश्चिम बंगाल समेत जगहों पर जाते हैं। सोनभद्र से आने वाले वाहन पुल से होकर ही गुजरते हैं। वाराणसी से इलाहाबाद के बीच एक मात्र पुल होने से वाहनों का दबाव बना रहता है। चुनार पुल से भारी वाहनों के गुजरने पर रोक है।
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रमेश चंद्र, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड पुल के जर्जर स्थिति से प्रशासन को अवगत कराया गया है। भटौली पुल के बन जाने से इस पुल पर आवागमन कम होगा। मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। वैकल्पिक व्यवस्था न होने से आवागमन नहीं रुक रहा है।
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