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काशी प्रसाद जायसवाल
Updated Tue, 28 Nov 2017 12:26 AM IST
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मिर्जापुर। पटना संग्रहालय की स्थापना करने वाले भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार एवं साहित्यकार काशी प्रसाद जायसवाल की जन्मभूमि मिर्जापुर रही है। काशी प्रसाद का जन्म 27 नवंबर 1881 में नारघाट साव के नाम से मशहूर जमींदार जायसवाल परिवार में हुआ था। साहित्य और इतिहास के क्षेत्र में अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने वाले जायसवाल की जयंती पर भी जिले में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सका।
लाख का व्यापार करने वाले डा.काशी प्रसाद व उनके परिवार की गिनती शहर के बड़े रईसों में की जाती थी। महादेव प्रसाद काशीप्रसाद नाम के फर्म से कारोबार चलता था। कोटघाट स्थित सात आंगनों के रंगमहल की खूबसूूरती की चर्चाएं आज भी पुराने साहित्यकारों की जुबानी सुनी जा सकती है। डा. काशी प्रसाद ने मिर्जापुर लंदन मिशन स्कूल से प्रवेश की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। इसके उपरांत उच्च शिक्षा के लिए वे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चले गए थे, जहां से इतिहास में एमए किया। इसके बाद उन्होंने बार के लिए परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भारत लौटने पर काशी प्रसाद जायसवाल ने कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रवक्ता बनने की कोशिश की, लेकिन राजनैतिक आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने वकालत करने का निश्चय किया। वर्ष 1911 में कोलकाता में वकालत आरंभ की। कुछ वर्ष बाद 1914 में वे पटना उच्च न्यायालय में आ गए और फिर यहीं पर वकालत करने लगे। काशी प्रसाद जायसवाल काशी नागरी प्रचारिणी सभा के उपमंत्री भी बने थे। उन्होंने बिहार रिसर्च जनरल तथा पाटलीपुत्र नामक पत्रों का संपादन भी किया था। इसके अलावा पटना संग्रहालय की स्थापना में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा था। इतिहास और मुद्रा विषयक अनेक सम्मेलनों की अध्यक्षता काशी प्रसाद जी ने की थी।
लाख का व्यापार करने वाले डा.काशी प्रसाद व उनके परिवार की गिनती शहर के बड़े रईसों में की जाती थी। महादेव प्रसाद काशीप्रसाद नाम के फर्म से कारोबार चलता था। कोटघाट स्थित सात आंगनों के रंगमहल की खूबसूूरती की चर्चाएं आज भी पुराने साहित्यकारों की जुबानी सुनी जा सकती है। डा. काशी प्रसाद ने मिर्जापुर लंदन मिशन स्कूल से प्रवेश की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। इसके उपरांत उच्च शिक्षा के लिए वे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चले गए थे, जहां से इतिहास में एमए किया। इसके बाद उन्होंने बार के लिए परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। भारत लौटने पर काशी प्रसाद जायसवाल ने कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रवक्ता बनने की कोशिश की, लेकिन राजनैतिक आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने वकालत करने का निश्चय किया। वर्ष 1911 में कोलकाता में वकालत आरंभ की। कुछ वर्ष बाद 1914 में वे पटना उच्च न्यायालय में आ गए और फिर यहीं पर वकालत करने लगे। काशी प्रसाद जायसवाल काशी नागरी प्रचारिणी सभा के उपमंत्री भी बने थे। उन्होंने बिहार रिसर्च जनरल तथा पाटलीपुत्र नामक पत्रों का संपादन भी किया था। इसके अलावा पटना संग्रहालय की स्थापना में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा था। इतिहास और मुद्रा विषयक अनेक सम्मेलनों की अध्यक्षता काशी प्रसाद जी ने की थी।
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