{"_id":"598f4bff4f1c1b51368b49ce","slug":"161502563327-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आजादी की लडाई में विद्यासागर की अहम भूमिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आजादी की लडाई में विद्यासागर की अहम भूमिका
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मिर्जापुर। जो भी वंदे मातरम गीत गाता था अंग्रेज उसे प्रताड़ित करते थे। विद्यासागर शुक्ल को वंदेमातरम् गाने पर ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
नगर के महुवरिया निवासी विद्यासागर शुक्ल बचपन से ही आजादी की लड़ाई में कूद पढ़े थे। वो इंदिरा गांधी की वानरी सेना के साथ जुड़ गए थे और क्रांतिकारियों का साहित्य घर-घर पहुंचाते थे।
स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में सक्रियता से भाग लेने वाले विद्यासागर शुक्ल आजादी की लड़ाई का दास्तान बड़े गर्व के साथ सुनाते हैं। सन1939 में अंग्रेज सरकार के विरुद्ध पुरुषोत्तम मास्टर के साथ उन्होंने घर-घर नोटिस बांटना, विदेशी वस्त्र जलाना, घरों का नंबर मिटाना आदि कार्य स्वतंत्रता आंदोलन संबंधित कार्य किए थे। ये बच्चे इंदिरा गांधी द्वारा निर्मित वानरी सेना में रह कर अंग्रेजों की नाक में दम करते रहे। आजादी की लड़ाई के तहत सन 1940 में विद्या सागर शुक्ल ने स्कूल के सुपरिटेंडेंट ब्रम्हदत्त दीक्षित की अध्यक्षता में एक समारोह राबर्ट्सगंज बाजार में आयोजित किया गया था। वे तिरंगा फहराया गया और वंदेमातरम् का गायन शुरू हुआ। वंदे मातरम गाने पर विद्या सागर शुक्ल को पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस ने कई बेंत मारा। बेंत से उनकी ठुड्ढी फट गई थी। चोट के निशान आज भी हैं। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में इन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। 13 अगस्त 1942 में जनपद मिर्जापुर स्थित पहाड़ा रेलवे स्टेशन को लूटने व जलाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। पहाड़ा कांड से संबंधित आंदोलनकारियों के विरुद्ध पुलिस द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इसके बाद विद्या सागर शुक्ल ने गोपनीय तरीके से आठ माह तक आंदोलन का काम करते रहे। 94 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को पिछले वर्ष नौ अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में प्रशस्ति पत्र, अगवस्त्रम् व प्रतीक चिह्न भेंट कर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सम्मानित किया था।
नगर के महुवरिया निवासी विद्यासागर शुक्ल बचपन से ही आजादी की लड़ाई में कूद पढ़े थे। वो इंदिरा गांधी की वानरी सेना के साथ जुड़ गए थे और क्रांतिकारियों का साहित्य घर-घर पहुंचाते थे।
स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में सक्रियता से भाग लेने वाले विद्यासागर शुक्ल आजादी की लड़ाई का दास्तान बड़े गर्व के साथ सुनाते हैं। सन1939 में अंग्रेज सरकार के विरुद्ध पुरुषोत्तम मास्टर के साथ उन्होंने घर-घर नोटिस बांटना, विदेशी वस्त्र जलाना, घरों का नंबर मिटाना आदि कार्य स्वतंत्रता आंदोलन संबंधित कार्य किए थे। ये बच्चे इंदिरा गांधी द्वारा निर्मित वानरी सेना में रह कर अंग्रेजों की नाक में दम करते रहे। आजादी की लड़ाई के तहत सन 1940 में विद्या सागर शुक्ल ने स्कूल के सुपरिटेंडेंट ब्रम्हदत्त दीक्षित की अध्यक्षता में एक समारोह राबर्ट्सगंज बाजार में आयोजित किया गया था। वे तिरंगा फहराया गया और वंदेमातरम् का गायन शुरू हुआ। वंदे मातरम गाने पर विद्या सागर शुक्ल को पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस ने कई बेंत मारा। बेंत से उनकी ठुड्ढी फट गई थी। चोट के निशान आज भी हैं। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में इन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। 13 अगस्त 1942 में जनपद मिर्जापुर स्थित पहाड़ा रेलवे स्टेशन को लूटने व जलाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। पहाड़ा कांड से संबंधित आंदोलनकारियों के विरुद्ध पुलिस द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इसके बाद विद्या सागर शुक्ल ने गोपनीय तरीके से आठ माह तक आंदोलन का काम करते रहे। 94 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को पिछले वर्ष नौ अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में प्रशस्ति पत्र, अगवस्त्रम् व प्रतीक चिह्न भेंट कर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सम्मानित किया था।
विज्ञापन