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स्वीकृत पद के तहत तैनात नहीं डाक्टर, कैसे हो इलाज
Updated Thu, 17 May 2018 12:05 AM IST
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मिर्जापुर। मंडलीय चिकित्सालय में डाक्टरों का टोटा है। स्वीकृत पद के अनुसार डाक्टरों समेत अन्य स्टाफ की तैनाती नहीं है। इसके चलते मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। मरीज बेहतर इलाज की तलाश में उधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। निजी चिकित्सालय में इलाज विवशता बन गई है। सुविधाओं के अभाव में मंडल के मरीजों को बीएचयू या इलाहाबाद जाना पड़ता है।
मंडलीय चिकित्सालय में मरीजों के बेहतर इलाज के लिए भारी भरकम पद स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन यह सभी स्वीकृतियां कागजों पर चल रही है। हकीकत में यहां ऐसा कुछ नहीं है। चिकित्सालय खुलने से लेकर आज तक इस चिकित्सालय में मानक के अनुरूप चिकित्सक तैनात नहीं किए जा सके हैं। काम चलाने के लिए 50 से 60 प्रतिशत स्टाफ तैनात कर दिया गया ताकि यहां आने वाले मरीजों का कुछ न कुछ इलाज होता रहे। उल्टी दस्त, बुखार के अलावा कोई बड़ी बीमारी प्रकाश में आती है तो बेहतर इलाज के लिए इलाहाबाद या बनारस के चिकित्सालयों का सहारा लेना पड़ता है।
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मंडलीय चिकित्सालय में मरीजों के बेहतर इलाज के लिए भारी भरकम पद स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन यह सभी स्वीकृतियां कागजों पर चल रही है। हकीकत में यहां ऐसा कुछ नहीं है। चिकित्सालय खुलने से लेकर आज तक इस चिकित्सालय में मानक के अनुरूप चिकित्सक तैनात नहीं किए जा सके हैं। काम चलाने के लिए 50 से 60 प्रतिशत स्टाफ तैनात कर दिया गया ताकि यहां आने वाले मरीजों का कुछ न कुछ इलाज होता रहे। उल्टी दस्त, बुखार के अलावा कोई बड़ी बीमारी प्रकाश में आती है तो बेहतर इलाज के लिए इलाहाबाद या बनारस के चिकित्सालयों का सहारा लेना पड़ता है।
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