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करोड़ों खर्च कर बिछाया गया नहरों का जाल, टेल तक पानी नहीं
Updated Wed, 20 Dec 2017 01:17 AM IST
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मिर्जापुर। जिले में नहरों का जाल बिछा है। इसके बावजूद किसानों को वर्षा का मुंह जोहना पड़ रहा है। अधिकांश नहरें रखरखाव के अभाव में सिल्ट और घास से भर गई हैं जबकि कुछ से लगातार पानी रिसता रहता है। गेहूं की सिंचाई का वक्त चल रहा है लेकिन नहरों में पानी नहीं है। इससे पहले धान के सीजन में नहरों के सूखी होने पर किसानों को मुश्किल से दो-चार होना पड़ा था।
शासन द्वारा खेतों के टेल तक पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपया खर्च कर जिले में करीब 11 किलोमीटर लंबी तीन सौ नहरों जाल बिछाया गया है। इसमें एमसीडी खंड से लगभग 750 किलोमीटर लंबी नहर बनाई गई। जिसमें 450 किलोमीटर सोनभद्र तथा 300 किलोमीटर मिर्जापुर में नहरे हैं। इन नहरों में धनरौल बांध से पानी छोड़ा जाता है। इसके अलावा अपर खजुरी एवं लोवर खजुरी से पानी दिया जाता है। जिससे सोनभद्र, मड़िहान एवं मिर्जापुर के कुछ हिस्से के खेतों की सिंचाई होती है। इसी प्रकार सिरसी नहर खंड की ओर से 450 किलोमीटर तक 93 टेल बनाए गए हैं। इससे हलिया, लालगंज एवं इलाहाबाद क्षेत्र के कोराव क्षेत्र के खेतों की सिंचाई होती है। इनमें दोहरी, एवं सिरसी ड्रैम से पानी दिया जाता है। वहीं सिंचाई खंड चुुनार से 354 किलोमीटर तक 81 नहरें बनाई गई हैं। इसमें ढेकवा, जरगों एवं गरई नदी से पानी छोड़ा जाता है। जिससे लगभग दो सौ एकड़ खेतों की सिंचाई होती है, लेकिन अधिकांश नहरें जर्जर होने के कारण इनमें पानी छोड़ने के बावजूद टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। कहने को तो प्रतिवर्ष दस लाख से एक करोड़ तक का बजट नहरों के मरम्मत के लिए आता रहता है। बाजवूद इसके नहरों की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। यहीं कारण है कि किसानों के टेल तक पानी नहीं पहुंचा पाता है। जिससे वह प्रकृति के पानी पर निर्भर रहते हैं।
नहरें काफी पुरानी हो चुकी हैं। उनके जीर्णोद्धार की जरुरत है। जहां तक टेल तक पानी नहीं पहुंचाने की बात है तो बांधों में पानी कम होने के कारण परेशानी आ रही है। बारिश कम होने के चलते डैम खाली रहते हैं इससे नहरों में पानी छोड़ने में परेशानी आती है।-कैफ सिद्दीकी, अधिशासी अभियंता सिरसी प्रखंड सिंचाई विभाग
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शासन द्वारा खेतों के टेल तक पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपया खर्च कर जिले में करीब 11 किलोमीटर लंबी तीन सौ नहरों जाल बिछाया गया है। इसमें एमसीडी खंड से लगभग 750 किलोमीटर लंबी नहर बनाई गई। जिसमें 450 किलोमीटर सोनभद्र तथा 300 किलोमीटर मिर्जापुर में नहरे हैं। इन नहरों में धनरौल बांध से पानी छोड़ा जाता है। इसके अलावा अपर खजुरी एवं लोवर खजुरी से पानी दिया जाता है। जिससे सोनभद्र, मड़िहान एवं मिर्जापुर के कुछ हिस्से के खेतों की सिंचाई होती है। इसी प्रकार सिरसी नहर खंड की ओर से 450 किलोमीटर तक 93 टेल बनाए गए हैं। इससे हलिया, लालगंज एवं इलाहाबाद क्षेत्र के कोराव क्षेत्र के खेतों की सिंचाई होती है। इनमें दोहरी, एवं सिरसी ड्रैम से पानी दिया जाता है। वहीं सिंचाई खंड चुुनार से 354 किलोमीटर तक 81 नहरें बनाई गई हैं। इसमें ढेकवा, जरगों एवं गरई नदी से पानी छोड़ा जाता है। जिससे लगभग दो सौ एकड़ खेतों की सिंचाई होती है, लेकिन अधिकांश नहरें जर्जर होने के कारण इनमें पानी छोड़ने के बावजूद टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। कहने को तो प्रतिवर्ष दस लाख से एक करोड़ तक का बजट नहरों के मरम्मत के लिए आता रहता है। बाजवूद इसके नहरों की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। यहीं कारण है कि किसानों के टेल तक पानी नहीं पहुंचा पाता है। जिससे वह प्रकृति के पानी पर निर्भर रहते हैं।
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नहरें काफी पुरानी हो चुकी हैं। उनके जीर्णोद्धार की जरुरत है। जहां तक टेल तक पानी नहीं पहुंचाने की बात है तो बांधों में पानी कम होने के कारण परेशानी आ रही है। बारिश कम होने के चलते डैम खाली रहते हैं इससे नहरों में पानी छोड़ने में परेशानी आती है।-कैफ सिद्दीकी, अधिशासी अभियंता सिरसी प्रखंड सिंचाई विभाग
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