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मतदान से पूर्व अंतिम रात बनी रणनीति
Updated Wed, 29 Nov 2017 12:42 AM IST
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मिर्जापुर। प्रचार का शोर भले ही बंद हो गया हो लेकिन प्रत्याशी और उनके समर्थक सारी रात वोटरों को अगोरते रहे। मंगलवार को दिन भर बूथ प्रबंधन चलता रहा। बूथों की जिम्मेदारियां सौंपी जाती रहीं। वोटरों के घर मतदाता पर्चियां पहुंचाई गईं और उम्मीदवार कुछ जगहों पर संपर्क भी करते दिखे। कत्ल की रात में वोटरों को सहेजा जाता रहा। अफवाहों की काट के लिए भी टीम तैयार की गई थी।
सोमवार की शाम चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद प्रत्याशी और उनके समर्थक वोटरों को उनके घरों से निकाल कर बूथों तक पहुंचाने के प्रयास में जुट गए। देर रात तक रणनीति तय की गई। किस बूथ पर कितने बस्ते पहुंचाने हैं। किसकी ड्यूटी किस काम में लगाई जाय इस पर मंथन हुआ। कुछ समर्थक आसपास के घरों में जनसंपर्क करते हुए भी देखे गए। आसपास के गांवों में निवास करने वाले मतदाताओं को एक दिन पूर्व ही शहर में बुला लिया गया है। कुछ लोगों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे बूथों से सौ मीटर की दूरी पर मतदाता पर्ची बनाने के कार्य में लगेंगे। राजनैतिक दलों के चुनाव निशान पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को तो ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी क्योंकि उनके साथ संगठन के लोग लगे रहे लेकिन निर्दल चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को सगे संबंधियों और मित्रों की सहायता लेनी पड़ी। कुछ प्रत्याशी चुनावी जानकारों के साथ बैठक करते देखे गए कि वोट निकलवाने के लिए क्या जुगत की जाएगी। वहीं दूसरी ओर विभिन्न जातिगत संगठनों ने अपने लोगों के साथ बैठक कर तय किया कि वे किस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे।
सोमवार की शाम चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद प्रत्याशी और उनके समर्थक वोटरों को उनके घरों से निकाल कर बूथों तक पहुंचाने के प्रयास में जुट गए। देर रात तक रणनीति तय की गई। किस बूथ पर कितने बस्ते पहुंचाने हैं। किसकी ड्यूटी किस काम में लगाई जाय इस पर मंथन हुआ। कुछ समर्थक आसपास के घरों में जनसंपर्क करते हुए भी देखे गए। आसपास के गांवों में निवास करने वाले मतदाताओं को एक दिन पूर्व ही शहर में बुला लिया गया है। कुछ लोगों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे बूथों से सौ मीटर की दूरी पर मतदाता पर्ची बनाने के कार्य में लगेंगे। राजनैतिक दलों के चुनाव निशान पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को तो ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी क्योंकि उनके साथ संगठन के लोग लगे रहे लेकिन निर्दल चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को सगे संबंधियों और मित्रों की सहायता लेनी पड़ी। कुछ प्रत्याशी चुनावी जानकारों के साथ बैठक करते देखे गए कि वोट निकलवाने के लिए क्या जुगत की जाएगी। वहीं दूसरी ओर विभिन्न जातिगत संगठनों ने अपने लोगों के साथ बैठक कर तय किया कि वे किस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे।
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