{"_id":"597f78cf4f1c1bd41b8b45da","slug":"151501526223-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मॉडल स्कूल बनाने का सपना अधूरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मॉडल स्कूल बनाने का सपना अधूरा
Updated Tue, 01 Aug 2017 12:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सीखड़। जनपद के विद्यालयों को गुजरात की तर्ज पर मॉडल स्कूल बनाने का पूर्व डीएम कंचन वर्मा और सीडीओ अमित कुमार सिंह का सपना अब अधूरा ही रह जाएगा। मतदान के लिए रंगोली में विश्व रिकार्ड बनाने वाले दोनों अधिकारियों ने जनपद के सभी स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाना शुरु किया था, इसके लिए पहले चरण में स्कूलों में बच्चों को बैठने के फर्श पर कोटा स्टोन लगवाया जा रहा था, लेकिन उनके जाते ही बंद हो गया।
विकास खंड सीखड़ में 22 पूर्व माध्यमिक विद्यालय एवं 62 प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें बच्चों को मिट्टी भरी फर्श में नही बैठना पड़े इसके लिए कोटा स्टोन लगवा कर व बिजली पानी सहित कई सुविधाओं से सुशोभित करना चाहते थे, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते 84 विद्यालयों में से महज 35 विद्यालयों पर ही कोटा स्टोन प्रधानों द्वारा लगवाया गया है, जबकि अन्य प्रधानों ने डीएम एवं सीडीओ के जाते ही विद्यालय में कोटा स्टोन सहित अन्य कार्यों को बंद कर दिया। वहीं विद्यालय को सवंरता देख अभिभावक भी काफी खुश हो गए थे, लेकिन उनके जाते ही सारा काम ठप हो गया। प्रधान विद्यालय को सुंदर बनाने में पैसा खर्च नही करना चाहते थे उनको नाली व खड़ंजा बनाने में ज्यादा रुचि है, जिसके चलते अधिकांश विद्यालयों में कोटा स्टोन नही लग पाया उनके सामने वोट दिखाई दे रहा है विद्यालय नही ।
इनसेट
परिषदीय स्कूलों में 14वें वित्त से कोटा स्टोन लगाने का काम हो रहा था, लेकिन बजट के अभाव में अब रुका हुआ है। बजट आते ही शेष स्कूलों में कोटा स्टोन लगवाया जाएगा। - घनश्याम प्रसाद, खंड विकास अधिकारी सीखड़।
विकास खंड सीखड़ में 22 पूर्व माध्यमिक विद्यालय एवं 62 प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें बच्चों को मिट्टी भरी फर्श में नही बैठना पड़े इसके लिए कोटा स्टोन लगवा कर व बिजली पानी सहित कई सुविधाओं से सुशोभित करना चाहते थे, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते 84 विद्यालयों में से महज 35 विद्यालयों पर ही कोटा स्टोन प्रधानों द्वारा लगवाया गया है, जबकि अन्य प्रधानों ने डीएम एवं सीडीओ के जाते ही विद्यालय में कोटा स्टोन सहित अन्य कार्यों को बंद कर दिया। वहीं विद्यालय को सवंरता देख अभिभावक भी काफी खुश हो गए थे, लेकिन उनके जाते ही सारा काम ठप हो गया। प्रधान विद्यालय को सुंदर बनाने में पैसा खर्च नही करना चाहते थे उनको नाली व खड़ंजा बनाने में ज्यादा रुचि है, जिसके चलते अधिकांश विद्यालयों में कोटा स्टोन नही लग पाया उनके सामने वोट दिखाई दे रहा है विद्यालय नही ।
विज्ञापन
इनसेट
परिषदीय स्कूलों में 14वें वित्त से कोटा स्टोन लगाने का काम हो रहा था, लेकिन बजट के अभाव में अब रुका हुआ है। बजट आते ही शेष स्कूलों में कोटा स्टोन लगवाया जाएगा। - घनश्याम प्रसाद, खंड विकास अधिकारी सीखड़।
विज्ञापन