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रंगों का त्योहार होली की तैयारियों से बाजार गुलजार

Sun, 25 Feb 2018 11:39 PM IST
Updated Sun, 25 Feb 2018 11:39 PM IST
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रंगों का त्योहार होली की तैयारियों से बाजार गुलजार
पिचकारी खरीदते बच्चे
मिर्जापुर। होली नजदीक होने के कारण बाजारों में रंग, गुलाल, पिचकारी, टोपी आदि की दुकानें सज गई हैं। खाद्य पदार्थों के साथ ही रंग-गुलाल की खरीदारी शुरू हो गई। केमिकल वाले रंगों की कीमत कम होने के कारण इसकी सबसे अधिक बिक्री हो रही है। वहीं हर्बल रंग और गुलाल काफी महंगे हैं जो आम लोगों की पहुंच से दूर हैं। केमिकल वाले रंगों और गुलाल लगने से त्वचा संबंधी बीमारी हो सकती है वहीं ये रंग आंखों के लिए काफी खतरनाक हैं। चिकित्सकों ने होली में लोगों से केमिकल वाले सस्ते रंगों से परहेज करने की अपील की है।
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पहली मार्च को होलिका दहन और दो मार्च को होली मनाई जाएगी। ऐसे में लोगों ने होली की तैयारियां पूरी करने में जुटे हैं। होली नजदीक आने के साथ रंग, गुलाल, पिचकारी की कीमतें चढ़ने लगती है। इसके चलते लोगों ने अभी से रंग, गुलाल, पिचकारी, टोपी आदि की खरीदारी शुरू कर दी है। इसके अलावा महिलाएं आलू, चावल, साबूदाना के पापड़, चिप्स बनाने में लगी हैं। होली के मद्देनजर बाजार में हरा, नीला, पीला, लाल, गुलाबी सूखे और लिक्विट में तमाम तरह के रंग मौजूद हैं। केमिकल वाले रंग सस्ते हैं जबकि हर्बल रंग काफी महंगे हैं। केमिकल वाले रंग चटख होते हैं लेकिन इसका खराब असर सेहत पर पड़ता है। रासायनिक और केमिकल वाले रंगों से त्वचा संबंधी बीमारियां होती हैं। यह रंग आंख में पड़ने पर रोशनी जाने और जख्म होने का डर रहता है। चिकित्सकों ने मिलावटी और केमिकल वाले रंगों से परहेज करने की सलाह दी है। चिकित्सकों का कहना है कि हर्बल रंग महंगे होते हैं लेकिन सुरक्षित होते हैं।
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होली के मद्देनजर प्लास्टिक और धातुओं से बनी डिजाइनदार पिचकारियां बिक रही हैं। वाटर गन बच्चों की पहली पसंद बनी है। रंगों के बाजार में लाल, नीला, पीला, हरे रंग की अबीर और रंग 60 रुपये से लेकर सौ रुपये प्रति पैकेट की दर से बिक रहे हैं। वहीं लाल, हरा व नीला सूखा व लिक्विड रंग दो सौ से पांच सौ तक में बिक रहे हैं। इसके अलावा बच्चों के लिए टॉय वाटर, किड्स वाटर, वाटर गन, वाटर बैलून, एयर प्रेशर एवं मोटू पतलू के आकार की बनी पिचकारियां 50 रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक बाजार में उपलब्ध हैं।
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मंडलीय अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डा. रामविनय सिंह ने कहा कि केमिकल वाले रंगों से बचें। आंखों को रंगों से बचाएं। आंखों में रंग लग जाता है तो उसे रगड़े नहीं बल्कि गुलाब जल से धोकर चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराएं।

चर्म रोग विशेषज्ञ डा. ओपी सिंह ने बताया कि केमिकल वाले रंगों को चेहरे पर न लगाएं। होली खेलने से पूर्व चेहरे पर सरसों का तेल लगाकर निकलें। अगर रंग लगने के बाद चेहरे पर जलन हो रही हो तो चिकित्सक से संपर्क करें।
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