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दोहरे हत्याकांड में एक को उम्रकैद
Updated Sat, 01 Sep 2018 12:48 AM IST
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मिर्जापुर। विंध्याचल में दिसंबर 2014 को दो लोगों की दिनदहाड़े हुई हत्या मामले में अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक देवकांत शुक्ला ने शुक्रवार को दोष सिद्ध होने पर ज्ञानचंद्र पांडेय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीन लाख 27 हजार रुपये के अर्थदंड भी लगाया। वहीं दूसरे आरोपी ज्ञानचंद्र पांडेय के पुत्र शुभम पांडेय का मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड में प्रेषित किया गया।
अभियोजन के अनुसार विंध्याचल थाना क्षेत्र के पश्चिम मोहाल निवासी एवं वादी मुकदमा दुर्वासा द्विवेदी पुत्र मल्लू द्विवेदी ने 11 दिसंबर 2014 को लिखित तहरीर दी थी कि सुबह साढ़े दस बजे पुरानी वीआईपी रोड पर उसका भाई मृत्युंजय द्विवेदी, धनंजय तथा शिवशंकर गिरि पुत्र रामेश्वर यात्री लेकर मां विंध्यवासिनी मंदिर जा रहे थे। इसी बीच घर के सामने ज्ञानचंद्र पुत्र आदित्य नारायण तथा उनका पुत्र शुभम पांडेय ने पुरानी वीआईपी रोड पर रोक कर कहा कि इन्हें हम दर्शन कराएंगे। इसी पर ज्ञानचंद उसके भाईयों को गाली देने लगा। उसके भाइयों ने विरोध जताया तो पीछे से वह भी आ गया। तबतक ज्ञानचंद्र पांडेय लाइसेंसी दो नाली बंदूक व उसका पुत्र भुजाली लेकर आ गया। ज्ञानचंद्र ने उसके भाई मृत्युंजय तथा शिवशंकर गिरि को गोली मार दी। शुभम ने भुजाली से हमला कर दिया। इससे तीनों काफी चोटें आई। जानकारी होते ही अन्य लोग भी आ गए। तीनों को आननफानन में जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे जहां मृत्युंजय और शिवशंकर गिरि को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। धनंजय को इलाज के लिए वाराणसी रेफर कर दिया था। तहरीर पर पुलिस ने ज्ञानचंद्र और उसके बेटे शुभम के खिलाफ धारा 307, 302 भादंस एवं धारा 7 क्रिमिनल ला अमेडमंट एक्ट एवं धारा 27/30 आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार गुप्ता एवं पूर्व सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेश यादव ने सात गवाह प्रस्तुत कराए। न्यायालय ने अभियुक्त ज्ञानचंद्र पांडेय को धारा 302 में आजीवन कारावास के साथ दो लाख रुपये का अर्थदंड एवं धारा 307 में दस वर्ष की कठोर कारावास के साथ एक लाख रुपया का अर्थदंड तथा 27 आयुध अधिनियम के तहत सात वर्ष के कारावास के साथ 25 हजार रुपये अर्थदंड और धारा 30 आयुध अधिनियम के तहत छह माह के कारावास के साथ दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाते हुए उसे जेल भेज दिया। वहीं जुर्माने की कुल राशि से 75 प्रतिशत धनराशि मृतकों की असहाय पत्नियों को देने का आदेश दिया।
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अभियोजन के अनुसार विंध्याचल थाना क्षेत्र के पश्चिम मोहाल निवासी एवं वादी मुकदमा दुर्वासा द्विवेदी पुत्र मल्लू द्विवेदी ने 11 दिसंबर 2014 को लिखित तहरीर दी थी कि सुबह साढ़े दस बजे पुरानी वीआईपी रोड पर उसका भाई मृत्युंजय द्विवेदी, धनंजय तथा शिवशंकर गिरि पुत्र रामेश्वर यात्री लेकर मां विंध्यवासिनी मंदिर जा रहे थे। इसी बीच घर के सामने ज्ञानचंद्र पुत्र आदित्य नारायण तथा उनका पुत्र शुभम पांडेय ने पुरानी वीआईपी रोड पर रोक कर कहा कि इन्हें हम दर्शन कराएंगे। इसी पर ज्ञानचंद उसके भाईयों को गाली देने लगा। उसके भाइयों ने विरोध जताया तो पीछे से वह भी आ गया। तबतक ज्ञानचंद्र पांडेय लाइसेंसी दो नाली बंदूक व उसका पुत्र भुजाली लेकर आ गया। ज्ञानचंद्र ने उसके भाई मृत्युंजय तथा शिवशंकर गिरि को गोली मार दी। शुभम ने भुजाली से हमला कर दिया। इससे तीनों काफी चोटें आई। जानकारी होते ही अन्य लोग भी आ गए। तीनों को आननफानन में जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे जहां मृत्युंजय और शिवशंकर गिरि को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। धनंजय को इलाज के लिए वाराणसी रेफर कर दिया था। तहरीर पर पुलिस ने ज्ञानचंद्र और उसके बेटे शुभम के खिलाफ धारा 307, 302 भादंस एवं धारा 7 क्रिमिनल ला अमेडमंट एक्ट एवं धारा 27/30 आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार गुप्ता एवं पूर्व सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेश यादव ने सात गवाह प्रस्तुत कराए। न्यायालय ने अभियुक्त ज्ञानचंद्र पांडेय को धारा 302 में आजीवन कारावास के साथ दो लाख रुपये का अर्थदंड एवं धारा 307 में दस वर्ष की कठोर कारावास के साथ एक लाख रुपया का अर्थदंड तथा 27 आयुध अधिनियम के तहत सात वर्ष के कारावास के साथ 25 हजार रुपये अर्थदंड और धारा 30 आयुध अधिनियम के तहत छह माह के कारावास के साथ दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाते हुए उसे जेल भेज दिया। वहीं जुर्माने की कुल राशि से 75 प्रतिशत धनराशि मृतकों की असहाय पत्नियों को देने का आदेश दिया।
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