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जंगली घास से पटा छानबे ब्लाक का आवासीय परिसर
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जिगना। जहां एक ओर अधिकारियों व कर्मचारियों को ब्लॉक मुख्यालय पर रुकने के निर्देश हैं, वहीं छानबे ब्लॉक मुख्यालय स्थित विजयपुर में बने भवन अधिकारियों व कर्मचारियों के रहने लायक नहीं बचे हैं। 1972 में बनें कमरों की हालत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इन आवासों में उगी जंगली घास के चलते यहां सांप व बिच्छुओं का बसेरा हो गया है।
वर्षा के दिनों में भवन से पानी टपकता रहता है। अन्य कमरों में दरवाजा, खिड़की व छत में जगह-जगह दरार पड़ गईं हैं। आवासों में बिजली, पानी आदि की सुविधाएं भी नदारद हैं। बताया जाता है कि वर्ष 1972 में अधिकारियों व कर्मचारियों को रात में रुकने के लिए एक बीडीओ, दो सहायक विकास अधिकारी, तीन लिपिक व दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए आवास बनाए गए थे। वर्ष 1985 में चार सामुदायिक केंद्र का निर्माण कराया गया। पर इसकी भी स्थिति खराब है। वर्तमान समय में ब्लॉक में बीडीओ तीन एडीओ सहित 11 कर्मचारी तैनात हैं। कई जगह रिक्त भी हैं। प्रधान लिपिक ने बताया कि वर्ष 2017 में जर्जर भवनों के बारे में उच्चाधिकारियों से मरम्मत कराने की मांग की गई थी पर इस संदर्भ मेें कोई कार्य नहीं कराया गया।
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आवासों के मरम्मत व रंगाई-पोताई आदि कराने की योजना बनाई जा रही है। जल्द ही इनका कायाकल्प कर दिया जाएगा। अजितेंद्र नारायण मिश्र, प्रभारी जिला विकास अधिकारी
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वर्षा के दिनों में भवन से पानी टपकता रहता है। अन्य कमरों में दरवाजा, खिड़की व छत में जगह-जगह दरार पड़ गईं हैं। आवासों में बिजली, पानी आदि की सुविधाएं भी नदारद हैं। बताया जाता है कि वर्ष 1972 में अधिकारियों व कर्मचारियों को रात में रुकने के लिए एक बीडीओ, दो सहायक विकास अधिकारी, तीन लिपिक व दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए आवास बनाए गए थे। वर्ष 1985 में चार सामुदायिक केंद्र का निर्माण कराया गया। पर इसकी भी स्थिति खराब है। वर्तमान समय में ब्लॉक में बीडीओ तीन एडीओ सहित 11 कर्मचारी तैनात हैं। कई जगह रिक्त भी हैं। प्रधान लिपिक ने बताया कि वर्ष 2017 में जर्जर भवनों के बारे में उच्चाधिकारियों से मरम्मत कराने की मांग की गई थी पर इस संदर्भ मेें कोई कार्य नहीं कराया गया।
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आवासों के मरम्मत व रंगाई-पोताई आदि कराने की योजना बनाई जा रही है। जल्द ही इनका कायाकल्प कर दिया जाएगा। अजितेंद्र नारायण मिश्र, प्रभारी जिला विकास अधिकारी
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