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करोड़ों के गबन के आरोपी की जमानत अर्जी निरस्त
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मिर्जापुर। प्रभारी जनपद न्यायाधीश भगवती प्रसाद सक्सेना ने करोड़ों रुपये के चावल की धनराशि को गबन करने के आरोपी की जमानत अर्जी को बुधवार को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत का आधार पर्याप्त न पाते हुए जमानत अर्जी को खारिज कर दी।
अभियोजन के अनुसार, जिला प्रबंधक पीसीएफ हिरेंद्र यादव ने 14 मई 2018 को थाना अहरौरा, चुनार में तहरीर दी कि मिल मेसर्स केडीएस एंड कंपनी रानीपुर भुड़कुड़ा तहसील चुनार मिर्जापुर को धान की 31 हजार आठ सौ 67.80 कुंतल डिलेवरी की गई थी। नियमानुसार इस फर्म को 21 हजार 351.43 कुुंतल कस्टम चावल की डिलेवरी भारतीय खाद्य निगम को किया जाना था किंतु 18 हजार 111.43 कुंतल चावल की डिलवेरी बार बार निर्देश दिए जाने के बावजूद नहीं किया गया। इस घटना की जांच के लिए गठित कमेटी द्वारा मामले की जांच की गई तो 14 मई 2018 को पाया कि उक्त फर्म द्वारा शेष 18 हजार 111.43 कुंतल चावल का गबन कर लिया गया है। फर्म को भी डिफाल्टर घोषित कर दिया गया था। फर्म के प्रोपराइटर सर्वजीत सिंह द्वारा अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उक्त चावल को खुर्द बुर्द कर लिया गया। शासकीय धनराशि लगभग चार करोड़ 74 लाख की क्षति संस्था को पहुंचाई गई है। पुलिस ने तहरीर केे आधार पर 12 नामजद के साथ कुछ अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए विवेचना शुरू की। आरोपी सर्वजीत सिंह पुत्र तेजबली सिंह जिला जेल से अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत की अर्जी न्यायालय में दी थी। अभियोजन की तरफ से शासकीय अधिवक्ता फौजदारी आलोक कुमार राय ने जमानत का जबरदस्त विरोध करते हुए यह कहा कि आरोपी द्वारा बड़े पैमाने पर गबन किया गया है। मामले की विवेचना चल रही है। जमानत होने पर आरोपी विवेचना को प्रभावित कर सकता है। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए जमानत का आधार पर्याप्त न पाते हुए जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया।
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अभियोजन के अनुसार, जिला प्रबंधक पीसीएफ हिरेंद्र यादव ने 14 मई 2018 को थाना अहरौरा, चुनार में तहरीर दी कि मिल मेसर्स केडीएस एंड कंपनी रानीपुर भुड़कुड़ा तहसील चुनार मिर्जापुर को धान की 31 हजार आठ सौ 67.80 कुंतल डिलेवरी की गई थी। नियमानुसार इस फर्म को 21 हजार 351.43 कुुंतल कस्टम चावल की डिलेवरी भारतीय खाद्य निगम को किया जाना था किंतु 18 हजार 111.43 कुंतल चावल की डिलवेरी बार बार निर्देश दिए जाने के बावजूद नहीं किया गया। इस घटना की जांच के लिए गठित कमेटी द्वारा मामले की जांच की गई तो 14 मई 2018 को पाया कि उक्त फर्म द्वारा शेष 18 हजार 111.43 कुंतल चावल का गबन कर लिया गया है। फर्म को भी डिफाल्टर घोषित कर दिया गया था। फर्म के प्रोपराइटर सर्वजीत सिंह द्वारा अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उक्त चावल को खुर्द बुर्द कर लिया गया। शासकीय धनराशि लगभग चार करोड़ 74 लाख की क्षति संस्था को पहुंचाई गई है। पुलिस ने तहरीर केे आधार पर 12 नामजद के साथ कुछ अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए विवेचना शुरू की। आरोपी सर्वजीत सिंह पुत्र तेजबली सिंह जिला जेल से अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत की अर्जी न्यायालय में दी थी। अभियोजन की तरफ से शासकीय अधिवक्ता फौजदारी आलोक कुमार राय ने जमानत का जबरदस्त विरोध करते हुए यह कहा कि आरोपी द्वारा बड़े पैमाने पर गबन किया गया है। मामले की विवेचना चल रही है। जमानत होने पर आरोपी विवेचना को प्रभावित कर सकता है। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए जमानत का आधार पर्याप्त न पाते हुए जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया।
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