योगी सरकार के दावे फेल, 35000 गन्ना किसानों को नहीं मिली फूटी कौड़ी
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सूबे की योगी सरकार भले ही किसानों को नियमित गन्ना भुगतान का दावा करे, लेकिन हकीकत इसके उलट है। करीब 35 हजार किसान ऐसे हैं, जिन्हें इस साल अब तक एक पाई का भुगतान भी चीनी मिलों ने नहीं किया है। भुगतान नहीं होने से किसानों पर चौतरफा मार पड़ रही है। उनके बच्चों के एडमिशन नहीं हो पा रहे हैं। जिनके बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उनकी फीस नहीं दे पा रहे हैं। किसान अपने बच्चों की शादियां नहीं कर पा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि भुगतान नहीं हो पाया तो बैंकों का कर्ज कैसे चुकाएं।
जिले में गन्ने का रकबा 71449 हेक्टेयर के करीब है। गन्ना उत्पादन करने वाले किसानों की संख्या करीब सवा लाख हैं। बागपत के किसान 317 तौल केंद्रों पर वेस्ट यूपी की 14 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। लेकिन गन्ने की बंपर पैदावार से किसानों के खिले चेहरे अब मुरझाने लगे हैं। वजह है चीनी मिलों पर गन्ने का भारी भरकम बकाया भुगतान। 16 अप्रैल तक गन्ना विभाग के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। मलकपुर चीनी मिल को 34255 किसान गन्ना सप्लाई करते हैं, लेकिन इनमें से 27728 किसानों को इस सत्र में एक रुपये भी का भुगतान नहीं हुआ। बागपत चीनी मिल क्षेत्र के 1232 और रमाला चीनी मिल क्षेत्र के 884 किसान भुगतान की राह देख रहे हैं। तीनों चीनी मिलों के 29844 किसानों को एक पाई का भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा अन्य जिलों की 11 चीनी मिलों ने भी जिले के करीब पांच हजार किसानों का एक भी रुपया भुगतान नहीं किया है।
आखिर क्यों नहीं हुआ भुगतान
किसानों को भुगतान नहीं होने की अलग-अलग वजह हैं। सबसे ज्यादा किसान मलकपुर चीनी मिल के हैं, जिसने मात्र 4.21 फीसदी भुगतान किया है। वर्तमान पेराई सत्र में भुगतान नहीं करने से इस मिल क्षेत्र के अधिक किसान परेशान हैं। इसके अलावा नए बांड वाले किसान, सामान्य प्रजाति के गन्ने की बुआई करने वाले किसान, रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना बोने वाले किसान और जिन किसानों ने सप्लाई देर से की हैं, वह भी किसान इनमें शामिल है।
अन्नदाता पर मुसीबत का पहाड़
भुगतान नहीं होने से किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगी है। सिलाना गांव के कुलबीर का कहना है कि बच्चों को नए स्कूल में भेजना शुरू किया है, लेकिन अभी तक एडमिशन फीस तक नहीं दी है। जौनमाना गांव के योगेंद्र सिंह का कहना है कि पुराने ट्रैक्टर बंद करा दिए हैं। नया ट्रैक्टर और गेहूं की थ्रेसिंग के लिए मशीन लेनी थी, लेकिन भुगतान नहीं हुआ तो दोनों ही कार्य लटक गए हैं। बावली गांव के धर्मेंद्र तोमर का कहना है कि बच्चा बीमार है। इलाज दिल्ली में होना है, लेकिन भुगतान नहीं होने से परेशान हैं। बावली के ही देवराज का कहना है कि घर में शादी होनी थी, लेकिन भुगतान नहीं तो इसे आगे खिसका दिया गया है। बीमारी और शादी के लिए कितने ही प्रार्थना पत्र डीसीओ कार्यालय में दिए गए हैं।
चीनी मिलों पर 426 करोड़ बकाया
चीनी मिल बकाया
मलकपुर 35771.68
रमाला 3301.15
बागपत 3534.06
नोट- बकाया 17 अप्रैल तक और लाख रुपये में
इन चीनी मिलों को देते हैं गन्ना
बागपत के किसान मलकपुर, बागपत, रमाला, किनौनी, भैसाना, ऊन, दौराला, सिंभावली, मोदीनगर, ब्रजनाथपुर, नंगलामल, खतौली, गांगनौली और तितावी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं।
इस साल चीनी परते में आया सुधार
चीनी मिल क्रमिक परता दैनिक
मलकपुर 9.81 10.70
रमाला 9.64 10.60
बागपत 9.84 10.50
औसत 9.76 10.60
जल्द कराएंगे भुगतान
डीसीओ सुशील कुमार का कहना है कि ऐसे किसान मलकपुर चीनी मिल क्षेत्र में सबसे ज्यादा हैं। मिल ने पिछले सत्र का संपूर्ण बकाया भुगतान कर दिया है, अब वर्तमान सत्र का भुगतान शुरू होगा, जिससे किसानों को राहत मिलेगी।
केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह का कहना है कि सरकार किसान हितैषी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष बकाया भुगतान का मामला रखा गया था, जल्द ही भुगतान कराने के लिए सख्ती की जाएगी। चीनी मिलों को प्रत्येक किसान का भुगतान करना होगा।
छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला का कहना है कि विधानसभा में समस्या उठाई गई थी। जल्द ही वह दोबारा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर गन्ना किसानों की समस्या रखेंगे और बकाया भुगतान दिलाएंगे। किसान को अगर भुगतान नहीं मिला तो उसकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होगी।
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