पूर्व विधायक योगेश वर्मा अब करेंगे साईकिल की सवारी, हस्तिनापुर समेत पंचायत चुनाव की राजनीति पर पड़ेगा बड़ा असर
बसपा पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने अपनी पत्नी सुनीता वर्मा के साथ शनिवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी ज्वॉइन कर ली। मेरठ के आधा दर्जन पार्षदों ने योगेश वर्मा के साथ समाजवादी पार्टी ज्वॉइन की है। करीब 400 समर्थकों के साथ योगेश वर्मा ने सपा ज्वॉइन की है। इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा बड़ी संख्या में लोग लगातार समाजवादी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने आज की जॉइनिंग ऐतिहासिक बताई है।
पूर्व विधायक योगेश वर्मा मेरठ की दलित राजनीती में अपनी बेेहतर पकड़ बना चुके हैं। वह एक तरह से निर्दलीय होते हुए भी बसपा को हस्तिनापुर में तगड़ा झटका दे चुके हैं। यही नहीं दो अप्रैल 2018 के आंदोलन में भी उनका दलितों के बीच प्रभाव साफ नजर आया। मेरठ नगर निगम में भी अपनी पत्नी को महापौर निर्वाचित कराकर वह भाजपा को भी तगड़ा झटका दे चुके हैं। ऐसे में उनके सपा में आने से तमाम समीकरण अब बदलते नजर आ रहे हैं।
योगेश वर्मा हस्तिनापुर से 2007 में विधायक रह चुके हैं। जब 2012 में चुनाव हुआ तो वह बसपा से निष्कासित होकर पीस पार्टी से चुनाव लड़ें लेकिन दूसरे नबंर पर रहे और फिर से बसपा में वापसी करते हुए 2017 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे। ऐसे में साफ है कि योगेश वर्मा ने कहीं न कहीं अनुसूचित जाति के वोट बैंक में अपनी अलग से पैठ बनाई हुई है।
लोकसभा चुनाव मे उन्हें बुलंदशहर से चुनाव लड़ाया गया, लेकिन मोदी लहर में हार गये। लेकिन इस बीच ही नगर निगम की सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित होने पर वह अपनी पत्नी सुनीता वर्मा को बसपा के टिकट पर महापौर निर्वाचित कराने में कामयाब हुए।
महानगर की राजनीति में यह उनका पहला कदम था, लेकिन भाजपा के तमाम धुरंधरों और मजबूत टीम और माकूल माहौल के बीच महापौर पद पर कब्जा उनकी राजनीतिक काबिलीयत को प्रदर्शित कर गया।
बसपा की अंदरूनी राजनीति में फिर मिला झटका
योगेश वर्मा को लोकसभा चुनाव के कुछ दिन बाद ही अक्तूबर 2019 में बसपा की अंदरुनी राजनीति के चलते पार्टी से पत्नी सहित निष्कासित कर दिया गया। यहीं से पूरा रानजीतिक माहौल बदल गया। तभी से चर्चा थी कि इस बार योगेश वर्मा बसपा नहीं बल्कि दूसरी पार्टी में जाएंगे।
सपा और भाजपा में जाने की लगातार चर्चा होती रही। लेकिन योगेश वर्मा के साथ बड़ी संख्या में मुिस्लिम समर्थकों के जुड़े होने के कारण भाजपा की अटकलें खारिज भी होती रही। आखिर में वही हुआ, जिसको लेकर कयास लगाए जा रहे थे। अब 16 जनवरी को हाथी से पैदल हुए योगेश वर्मा साईकिल कीसवारी करते नजर आएंगे।
स्थानीय राजनीति में होगी उथल पुथल
योगेश वर्मा दलितों के बीच तो अपनी पैठ बना ही चुके हैं। लेकिन अगर हस्तिनापुर की बात करें तो उनका असर गुर्जर, और मुस्लिम वर्ग में भी है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के लिए बड़ी चुनौती पेश करेंगे, यह तय हो चुका है। यही नहीं सपा ने भी आने वाले दिनों को देखते हुए अगला गेम खेल दिया है।
हस्तिनापुर से विपिन मनोठिया टिकट की दावेदारी कर रहे थे। अब उन्हें जिला पंचायत की राजनीति में ले जाने की चर्चा है। क्योंकि शासन स्तर पर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने की चर्चा है।