विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: खुदकुशी किसी परेशानी का हल नहीं, फिर भी आए विचार तो करें ये काम
मेरठ जिले में इस साल पिछले 8 माह में 243 लोगों ने आत्महत्या की है। ये मामले लगातार सामने आते हैं। खुदकुशी या आत्महत्या की क्या वजह हैं। क्या इसके कोई लक्षण सामने आते हैं या ऐसा विचार आए तो उससे कैसे निकलें। पढ़ें इस पर प्रकाश डालती एक रिपोर्ट
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खुदकुशी या आत्महत्या...लोग इस पर बात करने से हिचकते हैं। जो लोग खुदकुशी करने के विचारों से जूझ रहे होते हैं, वो खुद को अकेला महसूस करते हुए खुदकुशी को आखिरी विकल्प चुन लेते हैं। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में हर माह करीब 100 लोग ऐेसे आते हैं जिनके मन में आत्महत्या का विचार आया या उन्होंने खुदकुशी की कोशिश की है।
मेरठ जिले में इस साल पिछले 8 माह में 243 लोगों ने आत्महत्या की है। लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग जिंदगी की अहमियत समझें और जिंदादिली से जिएं।
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मरना नहीं, कष्टों से छुटकारा पाना चाहते हैं
जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर बताते हैं कि जो लोग खुदकुशी की कोशिश करने के बाद बच जाते हैं, उनमें से कई ने परामर्श के दौरान इस बात को माना कि वे वाकई मरना नहीं चाहते थे, बल्कि अपने कष्टों से छुटकारा चाहते थे। वो एक ऐसी खास परिस्थिति से जूझे थे, जहां जीने और मरने में उन्हें अंतर नहीं समझ आता था।
मिलते हैं संकेत, समझना जरूरी
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा का कहना है कि खुदकुशी करने वाले ज्यादातर लोगों की बातों या व्यवहार में कुछ हफ्तों पहले से कुछ संकेत साफ दिखते हैं। कुछ मामले तुरंत आवेग के भी होते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में खुदकुशी से पहले एक खास किस्म की चिंता, तनाव, हताशा या इस तरह का कोई और लक्षण जरूर दिखता है। ऐसे संकेतों को समय रहते समझा जाए और उनका निदान किया जाए।
अच्छा और बुरा, दोनों जिंदगी के पहलू
मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल का कहना है कि अगर किसी को खुदकुशी के विचार आ रहे हैं तो किसी करीबी से बात साझा करनी चाहिए। ऐसा करने से आत्महत्या को रोका जा सकता है। अच्छा और बुरा दोनों ही जिंदगी के पहलू हैं। नकारात्मक सोच न रखें।
खुद को ऐसे समझाएं
क्लिनिकल साइक्लोजिस्ट डॉ. विभा नागर का कहना है कि इस तरह का विचार आता है तो मदद मांगने में संकोच न करें। हिम्मत करें और अपनी तकलीफ साझा करें। सही दिनचर्या अपनाएं। हंसे-मुस्कुराएं और अपनी बातों को शेयर करें। अपनी क्षमता के हिसाब से करियर और रिश्तों का चुनाव करें।
आत्महत्या के हालिया मामले
5 सितंबर : टीपीनगर में महिला ने ट्रेन से कटकर जान दी।
4 सितंबर : रेलवे रोड पर महिला ने खुदकुशी की।
4 सितंबर : ब्रह्मपुरी क्षेत्र में पति से झगड़कर महिला ने फंदा लगाया।
शादी टूटी, आत्महत्या का प्रयास किया, अब कंपनी मैनेजर
शास्त्रीनगर के युवक का तीन साल पहले प्रेम विवाह नहीं हो पाया तो उसने फंदा लगाकर जान देने का प्रयास किया, मगर परिजनों ने बचा लिया। उसकी काउंसिलिंग हुई तो वह ठीक हुआ। अब निजी कंपनी में मैनेजर है और शानदार जिंदगी जी रहा है।
बची तो, पता चली जिंदगी की अहमियत
कोतवाली क्षेत्र की युवती ने चार साल पहले माता-पिता के झगड़े से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खा लिया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे बचा लिया। इसके बाद युवती ने खुद को संभाला और अब दिल्ली में जॉब कर बेहतर जीवन जी रही है।