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बचाएं गौरेया: ऊंची इमारतों और वाहनों के बढ़ते शोर से संकट में चिरैया, करें सरंक्षण, आंगन में डालें दाना

Wed, 20 Mar 2024 03:16 PM IST
Dimple Sirohi नीरज वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
नीरज वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 20 Mar 2024 03:16 PM IST
सार

गौरैया को बचाने के लिए वन विभाग के गौरेया संरक्षण और गिनती के लिए अभियान में आप भी शामिल हो सकते हैं। घर के आंगन में चहकती ये नन्हीं चिड़िया हमेशा के लिए कहीं खो न जाए इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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World Sparrow Day: Sparrows in danger due to increasing noise of tall buildings and vehicles
गौरेया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऊंची-ऊंची इमारतें, वाहनों का बढ़ता शोर गौरैया के लिए संकट खड़ा कर रहा है। एक समय हमारे घर-आंगन में चहचहाने वाली ये चिड़िया अब हमसे दूर होती जा रही है। इतना ही नहीं लोग इसे बचाने के लिए अपने घरों में काठ का घोसला लटका रहे हैं। यह घोसला गौरैया को रास नहीं आता। वह तो खुद के बनाए घोसले में रहना पसंद करती है। यह विचार सीसीएसयू के अटल सभागार में आयोजित इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन एवियन एंड्रोक्रोनियोलॉजी में शिरकत करने लखनऊ विवि से आईं सीनियर प्रोफेसर संगीता रानी ने रखे। 

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पक्षियों पर कई शोध कर चुकीं प्रो. संगीता रानी ने बताया तेजी से हो रहे शहरीकरण की वजह से कच्चे मकान धराशायी हो रहे हैं। बन रहीं ऊंची इमारतों में झरोखे नहीं हैं। पेड़-पौधे काटे जा रहे हैं। खेती का दायरा सिमट रहा है। खेती में रासायनिक उर्वरक का प्रयोग बढ़ रहा है। ऐसे में गौरैया को एक तरफ घोसले बनाने के लिए जगह नहीं मिल रही, वहीं दूसरी तरफ रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से पैदा दाना चुगने से गौरैया का जीवन संकट में पड़ गया है। 
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इसका नतीजा है करीब 70 फीसदी गौरैया खत्म हो चुकी हैं। इसके अलावा लोगों द्वारा घरों पर लगाए काठ के घोसलों में 99 फीसदी तक चिड़ियां घुसती तक नहीं। गौरैया घोसला ठंडी जगह पर बनाती है।
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कीट नियंत्रक व पराग फैलाती है गौरैया 
बीज, अनाज, लार्वा आदि खाकर गौरैया प्रभावी कीट नियंत्रक का काम करती है। परागण वाले पौधों के लिए महत्वपूर्ण काम करती है। यह दाने की तलाश में पौधों के फूलों पर भी जाती हैं। इससे परागकणों को स्थानांतरित करने में भी मदद करती है।

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गौरेया।

छत पर रखें पानी से भरा सकोरा, आंगन में डालें दाना
गौरैया को बचाने के लिए वन विभाग ने उसके संरक्षण और गिनती के लिए अभियान चलाया है। विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों को माध्यम से लोगों को चिड़ियों के लिए घर में पानी रखने को कहा है। 

गौरैया घोसले के लिए बबूल, कनेर, नींबू, अमरूद, अनार, मेहंदी, बांस, चांदनी आदि पेड़ों को पसंद करती हैं। गौरैया के संरक्षण के लिए इन पेड़ों को लगाना चाहिए। वन विभाग की ओर से अपील की गई है कि गर्मी के दिनों में अपने घर की छत पर बर्तन में पानी भरकर रखें। 

गणना का अभियान : गौरैया दिखे तो खीचें फोटो, वन विभाग को भेजें 
बालकनी, छत और पार्कों में गौरैया के खाने के लिए कुछ अनाज रखें। प्रजनन के समय उनके अंडों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा वन विभाग ने गौरैया की गणना के लिए विशेष अभियान चलाया है।

डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि अगर आपके आसपास भी कहीं कोई चिडि़या आपको दिखती है तो आप 20 मार्च तक विभाग की ई मेल forestmeerut@gmail.com या मोबाल नम्बर  9410861386 पर गौरैया की फोटी खींचकर व्हाट्सअप के माध्यम से भेज सकते हैं। 

सामाजिक संस्थाएं भी कर रहीं पहल
शहर की सामाजिक संस्थाएं भी गौरैया को बचने के लिए पहल कर रही हैं। लोगों को घर-घर जाकर बताया जा रहा है कि अपनी छत पर पानी आैर अनाज जरूर रखें। हो सके तो एक घोंसला भी गौरैया के लिए रखें। 

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