World No Tobacco Day: धूम्रपान पर शिकंजे की कवायद हो रही ‘धुआं’, एक कश भी खतरनाक...तीन सेकंड में लग जाती है लत
मेरठ के पीएल शर्मा जिला अस्पताल में धुम्रपान पर शिकंजा कसने के लिए अलग से ओपीडी चालू नहीं हो सकी। जिले में पांच लाख लोग तंबाकू-धूम्रपान का सेवन करते हैं।
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पीएल शर्मा जिला अस्पताल में धूम्रपान पर शिकंजे की कवायद ‘धुआं’ हो रही है। दरअसल, पांच साल से न तो चिकित्सक मिले हैं और न ही स्टाफ। इस कारण अलग से ओपीडी चालू नहीं हो सकी है। इसकी भरपाई करने के लिए मन कक्ष में धूम्रपान व तंबाकू सेवन करने वालों की काउंसलिंग कराई जा रही है। लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग की योजना के तहत जिला अस्पताल में धूम्रपान-तंबाकू सेवन करने वालों की साल 2018 में ओपीडी शुरू की जानी थी। इसके लिए पुरुष सर्जिकल वार्ड में ओपीडी के लिए भी क्लीनिक तैयार कराया गया था। यहां दो चिकित्सक, दो मनोचिकित्सक, छह स्टाफ नर्स और चार वार्ड ब्वॉय की तैनाती होनी थी, लेकिन न डॉक्टर आए और न ही स्टाफ।
लिहाज ओपीडी में रूम को पहले बंद रखा गया और अब उसे ड्रेसिंग रूम (मरहम पट्टी कक्ष) बना दिया गया है। अब जो मरीज धूम्रपान या तंबाकू से संबंधित आते हैं उन्हें भी मानसिक रोग विभाग से संबंधित मन कक्ष में काउंसलिंग के लिए भेज दिया जाता है। यह हालत तब हैं जबकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब पांच लाख लोग धूम्रपान-तंबाकू का सेवन करते हैं। सीएमओ डॉ अखिलेश मोहन का कहना है कि स्टाफ के लिए शासन से मांग की जा रही है। जो मरीज आते हैं मन कक्ष में उनकी काउंसलिंग कर निकोटिन की च्विंगम दी जाती है।
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एक कश भी खतरनाक...तीन सेकंड में लग जाती है लत
वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. उमंग मित्तल ने बताया कि मेरठ में हर महीने करीब 80 से 100 नए कैंसर के मरीज आते हैं। इनमें 40 से 50 तंबाकू उत्पाद के कारण कैंसर से पीड़ित होते हैं। 75 प्रतिशत लोगों को 14 से 15 साल की उम्र यह लत लग जाती है। महज तीन सेकंड में इसकी लत लग सकती है, लिहाजा एक कश भी खतरनाक है।
तंबाकू से निजात पाना नामुमकिन नहीं
जिला अस्पताल में तंबाकू सेवन करने वालों की काउंसलिंग करने वाले चिकित्सक डॉ कमलेंद्र किशोर का कहना है कि तंबाकू की लत से निजात पाना मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं। सिर्फ 15 दिन मेहनत करके इस आदत को छोड़ सकते हैं। जरूरत है पक्के इरादे की।
सबसे खतरनाक तंबाकू का रूप है धूम्रपान
छाती-सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. दीक्षा त्यागी ने बताया कि सबसे खतरनाक तंबाकू का धूम्रपान के रूप में प्रयोग है। रोजाना एक सिगरेट धूम्रपान करने वालों में उम्र भर में कैंसर का खतरा करीब 17 प्रतिशत तक होता है जबकि धूम्रपान न करने वालों में यह खतरा मात्र एक प्रतिशत होता है।