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World Milk Day: पशुपालन से किसान जोड़ रहे हाथ, मेरठ में 12 लाख से घटकर 9.35 लाख लीटर रह गया दूध उत्पादन

Sat, 26 Nov 2022 11:11 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 26 Nov 2022 11:11 AM IST
सार

एनजीटी के विभिन्न कानून, सरकार की नीति और दूध का उचित दाम नहीं मिलने के कारण किसान पशुपालन से दूर हो रहे हैं।

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World Milk Day:Farmers moving away from animal husbandry due to inflamation, milk production decreased
milk remedies - फोटो : iStock

विस्तार

महंगाई की मार पशुपालन पर भी पड़ रही है, जिसके चलते दूध उत्पादन 25 फीसदी तक घट गया है। पिछले दो साल में जिले का प्रतिदिन दूध उत्पादन 12 लाख से घटकर नौ लाख 35 हजार लीटर रह गया है। अन्य प्रदेशों के मुकाबले प्रति पशु दुग्ध उत्पादन में भी 20 प्रतिशत तक की कमी आई है। 

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एनजीटी के विभिन्न कानून, सरकार की नीति और दूध का उचित दाम नहीं मिलने के कारण किसान पशुपालन से दूर हो रहे हैं। चारा, दाना, दवा और मजदूरी पर खर्च बीते पांच साल में दोगुना हो गया है। पशु बाजार ध्वस्त होता जा रहा है।भारती मिल्क स्पेस के संचालक और आदर्श पशुपालक सोसायटी के अध्यक्ष मनीष भारती ने बताया कि पहले डेयरी में 80 पशु थे, जो अब 60 रह गए हैं। 
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चार पशु ही रख सकते हैं 
आदर्श पशुपालक सोसायटी के अध्यक्ष मनीष भारती ने बताया कि सरकार फैमिली फार्म को  खत्म कर कॉरपोरेट फार्म को बढ़ावा दे रही है। एनजीटी के नियमानुसार कोई भी पशुपालक घर में चार से ज्यादा पशु नहीं रख सकता। अधिक पशु रखने हैं तो वह गांव से 500 मीटर दूरी पर बांधे जाएं। साथ ही किसान के यहां बॉयोगैस प्लांट भी लगा होना चाहिए। चार पशु से अधिक घर में होने पर विद्युत निगम उस घर को कॉमर्शियल कनेक्शन देता है।  
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चार गुना हुए चारे के दाम
पशु आहार 1400 रुपये प्रति 50 किलो से बढ़कर 2 हजार तक पहुंच गया है। ऐसे में दूध के दामों में लगातार वृद्धि हो रही है। हरे चारे के दाम भी बढ़ गए हैं। एक पशु को प्रतिदिन 30 किलो चारा, 5 किलो भूसे के साथ दवा, मिनरल और प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

-कामधेनु प्रोजक्ट से जुड़े किसान हुए डिफाल्टर : किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने 2012 में कामधेनु प्रोजेक्ट आरंभ किया। 90 फीसदी किसान डिफाल्टर हो गए।

शहर में दूध की खपत
-डेयरी एवं दुग्ध संघ 25 हजार लीटर
-अमूल की खपत 62 हजार लीटर
-पराग की खपत 35 हजार लीटर

कंपनियों के दूध के दाम (पैकिंग में)
-500 मिलीलीटर 32 से 35 रुपये  
-फुल क्रीम एक लीटर 63 से 65 रुपये 
-टोंड दूध 500 मिलीलीटर 27 से 30 रुपये 

मिलावट का खेल, दूध का हर तीसरा सैंपल फेल 
दूध में कैल्शियम और जरूरी विटामिन होते हैं, लेकिन जो दूध हम खरीद रहे हैं वह शुद्ध है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। दरअसल, जिले में दूध का हर तीसरा सैंपल फेल हो रहा है। यहां पिछले दो साल में दूध के 160 सैंपल लिए गए, जिनमें से 68 सैंपल फेल निकले। इन मामलों में 18 लाख 15 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है। हालांकि न तो किसी पर एफआईआर हुई है और न ही किसी को सजा। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 26 नवंबर को विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है। एफएसडीए अधिकारियों का कहना है कि गर्मी में दूध की आपूर्ति घट जाती है तो मांग पूरी करने के लिए दूध में मिलावट बढ़ जाती है। इस संबंध एफएसडीए के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिव कुमार का कहना है कि दूध के जो सैंपल फेल होते हैं, वह मामले एडीएम सिटी की कोर्ट में चलते हैं। समय-समय पर दूध के सैंपल लिए जाते हैं। आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी। 

लंपी बीमारी के कारण दो भैंसें मर गईं। दूध से ज्यादा कमाई नहीं होती। पशुपालन भी बंद कर दिया है। - पवन, किसान

कोविड से पहले घर में तीन भैंसें थीं। चारे और भूसे का भाव बढ़ रहा है। अब दो पशु बेच दिए हैं।  - कुलदीप, किसान जिटौली

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