विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: भूत-प्रेत या टोटका नहीं, यह मन का रोग है, दिमाग को ऐसे रखें दुरुस्त
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मानसिक रोग दैवीय प्रकोप, भूत-प्रेत, जादू-टोना या टोटका से नहीं होता, यह अन्य रोगों की तरह ही एक रोग है और साध्य है। इसके इलाज के लिए झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़े, विशेषज्ञ चिकित्सक की राय लें। मानसिक रोग के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ही जिला अस्पताल में भी हाल ही में मन कक्ष की शुरुआत की गई है। लोगों को समझाया जाता है कि उन्हें मन की बीमारी है, न कि उन पर जादू-टोना किया गया है। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर बताते हैं कि मन कक्ष में सप्ताह में 100 से ज्यादा लोगों की काउंसलिंग हो रही है। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है। इनमें 20 से 30 प्रतिशत लोग मन की बीमारी को जादू-टोना या दैवीय प्रकोप समझते हैं।
केस -1
मान रहे थे ऊपरी असर, निकला स्किजोफ्रेनिया
जिला अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञों के पास आए एक मरीज की बीमारी को उसके परिजन ऊपरी असर मान रहे थे। परिजनों ने बताया कि वह खुद से बात करता है और कानों में आने वाली आवाजों को सच मानकर उनका जवाब देता है। पड़ोसी की सलाह पर परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल आए और मानसिक रोग विशेषज्ञों को दिखाया। उसकी काउंसलिंग की गई तो पता चला कि उसे स्किजोफ्रेनिया (मनोविदलता) की बीमारी है। इस बीमारी में व्यक्ति को भ्रम होने लगता है और उसे जो दिखाई नहीं देता, उसे भी वह सच मानने लगता है। फिलहाल उसकी काउंसलिंग चल रही है, अब वह पहले से काफी बेहतर है।
केस -2
मान रहे थे जादू-टोना, निकला हिस्टीरिया
जिला अस्पताल में इलाज कराने आईं एक युवती को के हाथ-पैर ऐंठ जाते थे और वह बार-बार बेहोश हो जाता थी। जीभ एेंठ जाती थी। परिजन समझ रहे थे उसे जादू-टोना हो गया है, लेकिन उसकी काउंसलिंग और पड़ताल की गई तो पता चला कि उसे हिस्टीरिया नामक मानसिक बीमारी है। मानसिक तनाव के कारण यह स्थिति पैदा होती है। युवती की तबियत अब ठीक है।
तनाव किसी समस्या का हल नहीं, बल्कि खुद समस्या है। यह आपका स्वभाव चिड़चिड़ा कर खुशी और मुस्कान चुरा लेता है। इससे बचने के लिए तनाव पैदा करने वाले अनावश्यक कारणों को जिंदगी से दूर करना जरूरी है। दुनिया में सबसे अधिक हार्ट अटैक का मुख्य कारण मानसिक तनाव होता है। न्यूरोलोजिस्ट डॉ. भूपेंद्र चौधरी बताते हैं कि बदलता लाइफ स्टाइल, अपेक्षाओं का बोझ मानसिक रोगों का कारण है। तनाव से सिरदर्द, माइग्रेन, उच्च या निम्न रक्तचाप और हृदय से जुड़ी समस्याओं से ग्रस्त करता है। मानसिक अवसाद को लेकर समाज में जागरूकता की जरूरत है।
खानपान से दिमाग को रखें दुरुस्त
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राना का कहना है कि मानसिक बीमारी में दिमाग को एक्टिव रखने केलिए बादाम आदि ड्राइफ्रूट्स समेत एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर भोजन का सेवन करना चाहिए। इसमें स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और ब्रोकली, हरी पत्तीदार सब्जियां खानी चाहिए और फास्ट फूड से दूर रहना चाहिए। इस बीमारी में परिवार को मरीज को भावनात्मक सहयोग देना चाहिए। ऐसी स्थिति में मरीज के प्रति परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
मानसिक रोग के लक्षण
- उदासी, भ्रमित सोच, एकाग्रता में कमी
- अत्यधिक डर या चिंता
- अत्यधिक अपराधबोध की भावना
- वास्तविकता से दूर होना, शक करना
- आत्महत्या की भावना, याददाश्त में कमी
मानसिक रोग के कारण
- अकेलापन, दबाव, आत्मसम्मान में कमी
- परिवार में मृत्यु, तलाक
- दुर्घटना, मस्तिष्क की चोट, हिंसा
- एल्कोहल या ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन
- संक्रमण के कारण मस्तिष्क की क्षति
मानसिक रोगी को सहारा है जरूरी
- मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को समझें, उससे संवाद करें
- उसे भावनात्मक और सामाजिक सहयोग दें
- पढ़ने, खेलने, घूमने, योग, ध्यान के लिए प्रोत्साहित करें
- नया सीखने और नई रूचियां विकसित करने केलिए प्रेरित करें
- सकारात्मक सोच और रवैया पैदा करें
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