विश्व हीमोफीलिया दिवस 2019: बच्चों को विरासत में मिलती है ये बीमारी, जानें- कैसे करें बचाव
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हीमोफीलिया बच्चों को माता-पिता से विरासत में मिलने वाली बीमारी है। इसमें अगर शरीर से खून बहने लगता है तो फिर रुकता नहीं है। इस कारण चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा साबित होती है। निजी अस्पतालों या डॉक्टरों के यहां इसका इलाज काफी महंगा है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में यह निशुल्क है। अगर किसी को यह बीमारी है तो वह मेडिकल की इमरजेंसी में जाकर अपना पंजीकरण करा सकता है। इस बीमारी के मरीज को इंजेक्शन, दवा के अलावा खून भी निशुल्क मिलता है।
लोगों में हीमोफीलिया (पैतृक रक्तस्राव) के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। जब दोषपूर्ण जीन, बच्चों के अंदर आता है तो बच्चा, इस बीमारी का शिकार हो जाता है। यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है। थ्राम्बोप्लास्टिक में खून को शीघ्र थक्का कर देने की क्षमता होती है। खून में इसके न होने से खून का बहना बंद नहीं होता है। इसके इलाज के लिए पहले विदेश से आने वाले इंजेक्शन की डोज बाजार में आठ से दस हजार की मिलती थी। निशुल्क लगवाने के लिए दिल्ली जाना पड़ता था। हीमोफीलिया बीमारी में फैक्टर 8 और 9 की डोज दी जाती है। मेडिकल में अधिकांश फैक्टर 8 के मरीज हैं। यह डोज मरीज को कभी-कभी महीनों तक नहीं देनी पड़ती, लेकिन कभी-कभी हर सप्ताह देनी पड़ती है।
यह है हीमोफीलिया
यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जो आमतौर पर पुरुषों में होती है और महिलाओं द्वारा फैलती है। इसे पैतृक रक्तस्राव भी कहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग का कारण एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है, जिसे क्लॉटिंग फैक्टर कहा जाता है। इस फैक्टर की विशेषता यह है कि यह बहते हुए रक्त के थक्के जमाकर उसका बहना रोकता है। यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है।
लक्षण
- शरीर में नीले-नीले निशानों का बनना
- नाक से खून का बहना
- आंख के अंदर खून का निकलना
बचाव
- उचित चिकित्सक से सलाह और दवाइयां लें
- मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए व्यायाम करें
- ऐसे बच्चों को खेलते समय हेलमेट, एल्बो और जूते पहनाकर रखें
गंभीर चोट लगने पर ही जाता है ध्यान
इस बीमारी पर तब तक लोगों का ध्यान नहीं जाता जब तक कि उन्हें किसी कारण से गंभीर चोट न लगे। ए के मरीज 10 हजार में से एक होते हैं, जबकि बी का मरीज 40 हजार में एक होता है। - डॉ. विजय जायसवाल, मेडिकल कॉलेज
900 वायल होते हैं हर माह खर्च
मेडिकल कॉलेज में इस समय करीब 137 मरीज पंजीकृत हैं। हर माह करीब 900 वायल खर्च होते हैं। काफी लोग ऐसे हैं, जिन्हें जानकारी नहीं है कि मेडिकल में हीमोफीलिया का उपचार होता है। - डॉ. योगिता सिंह, प्रभारी, मेडिकल हीमोफीलिया विभाग
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