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विश्व ब्रेल दिवस पर विशेष: अंधेरे को चीरकर ज्योति बनी ‘मशाल’, पाएगी 'लक्ष्मीबाई' पुरस्कार

Mon, 04 Jan 2021 03:22 PM IST
Dimple Sirohi सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 04 Jan 2021 03:22 PM IST
सार

मार्च महीने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे दृष्टिहीन ज्योति को सम्मानित
मेरठ के ब्रजमोहन स्कूल फॉर द ब्लाइंड की तीसरी बच्ची को मिलेगा ये पुरस्कार
 

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World Braille Day: Jyoti from  turning darkness into light, will get Laxmibai Award
ज्योति -बाएं व रितिका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आंखें खोली तो दुनिया बेरंग थी। हर तरफ अंधेरा था। भाई-बहन कपड़ों के रंग चुनते तो इनके चेेहरे पर यूं ही मुस्कुराहट तैर जाती। तितली का नाम सुनकर मन बस यही सोचता कि आखिसर कैसी होगी वह। पानी का रंग तो नहीं देखा, लेकिन छूकर मन में कुछ अहसास कर लेते।

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सहारे से चलते तो भी गिर जाते थे। मंजिल की एक राह मिली तो लड़खड़ाते कदमों ने अंधियारे रास्तों को साथी बना लिया। चीरकर अंधेरे को अब ये मशाल बन रहे हैं। इन्हें अब सहारों की जरूरत नहीं... ये अपनी कामयाबी के जरिए अपना हुनर दिखा रहे हैं। ये हैं हमारे मेरठ के अनमोल लुई ब्रेल।
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आज विश्व ब्रेल दिवस है। महान लुई ब्रेल का जन्मदिन। ये वही आविष्कार थे जिन्होंने दृष्टिहीन लोगों की अंधेरी जिंदगी को उजियारा बनाने का काम किया। मेरठ में भी ऐसे होनहार लगातार नाम कर रहे हैं, जिनके कदमों को अंधेरे का कठिन रास्ता भी रोक नहीं पाया।
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जागृति विहार के सेक्टर छह स्थित ब्रजमोहन स्कूल फॉर द ब्लाइंड की तीसरा बच्ची सातवीं कक्षा की ज्योति को अब अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। ज्योति को यह पुरस्कार संगीत और गायन के क्षेत्र में दिया जाएगा। इससे पहले स्कूल की दो बच्चियों रिदा जेहरा को संस्कृत में गीता के 10 अध्याय सुनाने पर 2016 में रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार मिल चुका है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपये की धनराशि और प्रशस्ति पत्र मिलता है।

2018 में यहीं की छात्रा रितिका को कथक में रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार मिला। ज्योति मुजफ्फरनगर के जनकपुरी की रहने वाली हैं। इस स्कूल में यहां पर तीन साल से 12 साल के दृष्टिहीन बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। वर्तमान में यहां 30 बच्चे पढ़ रहे हैं। ब्रजमोहन स्कूल फॉर द ब्लाइंड के प्रधानाचार्य प्रवीण शर्मा, पत्नी उपासना शर्मा और बेटा वैभव इस स्कूल में रहने वाले बच्चों की देखभाल करते हैं। कई और बच्चे भी विभिन्न क्षेत्रों में अपना भविष्य बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

चार मंजिला ब्लाइंड स्कूल भरेगा जिंदगी में उजियारा
मेरठ में प्रदेश का पहला चार मंजिला ब्रजमोहन स्कूल फॉर द ब्लाइंड बनकर तैयार हो गया है। इसी महीने स्कूल को संस्था को हैंडओवर कर दिया जाएगा। अब ये बच्चे बेहतर स्कूल में पढ़कर नाम रोशन करेंगे। स्वामी सत्यानंद ट्रस्ट फॉर हैंडीकैप्ड इंडिया के प्रयासों से लोहियानगर बुद्घा एनक्लेव के डी पॉकेट में ब्रजमोहन स्कूल फॉर द ब्लाइंड की पिछले साल नींव रखी गई थी।

पहली कक्षा से आठवीं तक के इस स्कूल की बिल्डिंग ग्रीन बिल्डिंग के मानक पर है। 14 क्लासरूम, लाइब्रेरी, एक्टिविटी रूम, हॉस्टल और मेस की सुविधा वाला यह स्कूल प्रदेश में दृष्टिहीन बच्चों के लिए पहला ऐसा अत्याधुनिक स्कूल है।

बच्चों को एक फ्लोर से दूसरे पर जाने के लिए सीढ़ियों के साथ ही लिफ्ट की सुविधा है। लिफ्ट में बटन हर फ्लोर की दीवारें, रेलिंग पर ब्रेल लिपि के जरिए बच्चों को यह पता चलेगा कि वह कहां पर है। पूरी बिल्डिंग में कहां पर कौन सी कक्षा और कहां पर मैस और टॉयलेट आदि हैं, ये सब ब्रेल लिपि मैप के जरिए पता लगेगा।

बिल्डिंग कमेटी के चेयरमैन सीए राजीव सिंघल बताते हैं कि स्कूल को यूपी बोर्ड से मान्यता मिल चुकी है। कोविड-19 की वजह से देरी हो रही है, नहीं तो अब तक इसे हैंडओवर कर दिया जाता। सीए राजीव सिंघल ट्रस्ट के बिल्डिंग कमेटी के चेयरमैन हैं। डॉ. आलोक अग्रवाल ट्रस्ट के सेक्रेट्री हैं।

World Braille Day: Jyoti from  turning darkness into light, will get Laxmibai Award
ब्रजमोहन स्कूल फॉर द ब्लाइंड - फोटो : अमर उजाला

चार जनवरी को मनाया जाता विश्व ब्रेल दिवस
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक विश्व भर में 39 मिलियन लोग देख नहीं सकते, जबकि 253 मिलियन लोगों में कोई न कोई दृष्टि विकार है। विश्व ब्रेल दिवस का उद्देश्य दृष्टि बाधित लोगों के अधिकार उन्हें प्रदान करना और ब्रेल लिपि को बढ़ावा देना है। विश्वभर में लुई ब्रेल के जन्मदिन के दिन 4 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय ब्रेल दिवस मनाया जाता है।

ये है ब्रेल लिपि
ब्रेल एक लेखन पद्धति है। यह नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए सृजित की गई थी। ब्रेल एक स्पर्शनीय लेखन प्रणाली है। इसे एक विशेष प्रकार के उभरे कागज पर लिखा जाता है, इसकी संरचना फ्रांसीसी नेत्रहीन शिक्षक और आविष्कारक लुइस ब्रेल ने की थी। ब्रेल में उभरे हुए बिंदु होते हैं। इन्हें सेल के नाम से जाना जाता है। कुछ बिंदुओं पर छोटे उभार होते हैं। ब्रेल की मैपिंग प्रत्येक भाषा में अलग हो सकती है। इस लिपि में स्कूली बच्चों के लिए पुस्तकों के अतिरिक्त रामायण, महाभारत जैसे ग्रंथ छपते हैं।

दृष्टिहीनों के मसीहा थे लुई ब्रेल
लुई ब्रेल का जन्म फ्रांस की राजधानी पेरिस से 40 किमी दूर कूपरे नामक गांव में 4 जनवरी 1809 में हुआ था। वे दृष्टिहीन थे। लुई ब्रेल ने दृष्टिहीन होने के बावजूद दृष्टिहीनों को पढ़ने-लिखने के योग्य बनाया। लुई ब्रेल ने एक अलग लिपि विकसित की और उसे ब्रेल लिपि नाम मिला।

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