विश्व पशु दिवस आज: गोसंरक्षण के दावे हवाई, बेसहारा गोवंश सड़कों पर, गोशालाओं में भी नहीं भरपेट चारा
मेरठ में प्रशासन का दावा है कि जिले की गोशालाओं में 7539 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि सच्चाई यह है कि गोशालाओं में न न तो हरे चारे का इंतजाम है और न उचित व्यवस्था का। साथ ही तकरीबन चार हजारसे ज्यादा गोवंश सड़कों पर विचरण कर रहे हैं, वहीं किसान लगातार फसलों के नुकसान की शिकायते कर रहे हैं।
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आज विश्व पशु दिवस है। जिम्मेदार विभाग बेसहारा गोवंश को संरक्षित करना भूल गए हैं। सड़क और खेतों में बेसहारा गोवंश घूम रहे हैं। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। गोशालाओं में भी गोवंश को भरपेट चारा उपलब्ध नहीं है। वहीं प्रशासन का दावा है कि जिले की गोशालाओं में 7539 गोवंश संरक्षित हैं। सड़क और खेतों में 400-500 गोवंश ही घूम रहे हैं, वे भी पशुपालकों द्वारा छोड़े गए हैं।
जिले में नगर निगम समेत सभी नगर पालिका, नगर पंचायत और ब्लॉक स्तर पर 26 गोशालाएं संचालित हैं। छह गोशालाओं पर काम चल रहा है। पशुपालन विभाग के मुताबिक जिले में बेसहारा घूमने वाले 7019 गोवंश को संरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था।
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प्रशासन ने 7539 बेसहारा गोवंश को गोशालाओं में संरक्षित करने का दावा किया है। हालांकि शहर और देहात में अब भी दो हजार से भी अधिक बेसहारा गोवंश विचरते हुए बताए जा रहे हैं। प्रत्येक किसान दिवस में किसान अधिकारियों के सामने बेसहारा गोवंश के माध्यम से फसलों को हो रहे नुकसान की बात बताते हैं।
बेसहारा गोवंश की चपेट में आने से कई लोग घायल हो चुके हैं। एक युवक की तो जान तक चली गई। सरकारी गोशालाओं में बेसहारा गोवंश के उपचार और चारे आदि की व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अखिलेश गर्ग का कहना है कि 2024 तक कोई बेसहारा गोवंश सड़क व खेतों में नहीं दिखाई देगा क्योंकि देशी गायों को बछिया ही पैदा करने की तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
गोवंश के लिए गोशालाओं का विस्तार और नई गोशालाएं बनाई जा रही हैं। काफी पशुपालक ऐसे हैं जो दूध देना बंद करने पर गोवंश को बेसहारा छोड़ रहे हैं। ऐसे लोगों को भी गोवंश की उपयोगिता समझनी चाहिए।