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मां महागौरी की पूजा-अर्चना कर कन्याओं को भोजन कराया
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ग्राम हसनपुर कलां में माता कालका देवी मंदिर पर आयोजित दो दिवसीय मेले मे भक्तिमय रागिनीयो का उदघा?
- फोटो : KITHOR
माछरा/मुंडाली। नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा-अर्चना की गई। उपवास करने वाले श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर कन्याओं को भोजन कराया गया और प्रसाद ग्रहण कर उपवास खोला।
श्रद्धालुओं ने महागौरी शक्ति की पूजा-अर्चना विधि-विधान से की। पंडित आनंद शर्मा स्वामीपुरा माछरा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महागौरी की उपासना से ही मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। उपवास रखने वाले ज्यादातर लोग अष्टमी पर कन्याओं को और गायों को भोजन कराते हैं। वहीं, प्रसाद ग्रहण कर उपवास खोलते हैं। जिससे उन्हें माता दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त अष्टमी में उपवास खोलकर रामनवमी को उपवास खोलते हैं तथा कन्या पूजन करते हैं। बताया कि मां महागौरी के रूप का वर्णन पूर्णत: गौर वर्ण से है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से की गई है। इनके सभी वस्त्र श्वेत हैं। इसलिए इन्हें श्वेताम्बरा भी कहा गया है। इनकी चार भुजाएं हैं तथा वाहन वृषभ है। इन्हें वृषारूढ़ा नाम से भी इन्हें जाना जाता है।
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मां सिद्धिदात्री की पूजा :- पंडित आनंद शर्मा स्वामीपुरा माछरा ने बताया कि नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। देवी सिद्धिदात्री की उपासना से अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्या और वशित्व, ईशित्व आदि सभी आठों प्रकार की सिद्धियां साधक को प्राप्त होती हैं। इनका वाहन सिंह है और यह कमल पुष्प पर भी विराजमान हैं। इनकी कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ और भगवान शिव अर्द्घनारीश्वर कहलाए।
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श्रद्धालुओं ने महागौरी शक्ति की पूजा-अर्चना विधि-विधान से की। पंडित आनंद शर्मा स्वामीपुरा माछरा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महागौरी की उपासना से ही मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। उपवास रखने वाले ज्यादातर लोग अष्टमी पर कन्याओं को और गायों को भोजन कराते हैं। वहीं, प्रसाद ग्रहण कर उपवास खोलते हैं। जिससे उन्हें माता दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त अष्टमी में उपवास खोलकर रामनवमी को उपवास खोलते हैं तथा कन्या पूजन करते हैं। बताया कि मां महागौरी के रूप का वर्णन पूर्णत: गौर वर्ण से है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से की गई है। इनके सभी वस्त्र श्वेत हैं। इसलिए इन्हें श्वेताम्बरा भी कहा गया है। इनकी चार भुजाएं हैं तथा वाहन वृषभ है। इन्हें वृषारूढ़ा नाम से भी इन्हें जाना जाता है।
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मां सिद्धिदात्री की पूजा :- पंडित आनंद शर्मा स्वामीपुरा माछरा ने बताया कि नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। देवी सिद्धिदात्री की उपासना से अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्या और वशित्व, ईशित्व आदि सभी आठों प्रकार की सिद्धियां साधक को प्राप्त होती हैं। इनका वाहन सिंह है और यह कमल पुष्प पर भी विराजमान हैं। इनकी कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ और भगवान शिव अर्द्घनारीश्वर कहलाए।