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धर्म के साथ किया कर्म ही फलदायी
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भक्तामर विधान में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
- फोटो : MAWANA
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मवाना। ऐतिहासिक नगरी स्थित कैलाश पर्वत पर विश्व की सुख, शांति, समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ चल रहा है। शनिवार को दूसरे दिन विधानाचार्य सुदीप शास्त्री जी ने मांगलिक मंत्रों से शुभारंभ कराया।
परम पूज्य भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि अक्सर धर्म-कर्म व रहन-सहन का प्रयोग आपके द्वारा किया जाता है। जिसका तात्पर्य है कि धर्म के साथ किया कर्म ही फलदायी है। वहीं पापों के क्षय में सहायक है। धर्म से हटकर किए गए कर्म पीड़ादायी हैं। दुख आएगा तो उसे भोगना ही पड़ेगा। आज के विधान का विसर्जन ललिता जैन, राजीव जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन प्रीती जैन, पंकज जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती अर्चना शाहू, आशीष शाहू ने की। चौबीसों भगवान की आरती रमेश चंद जैन ने की।
आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य रविंद्र जैन को प्राप्त हुआ। स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य राहुल जैन, रविंद्र जैन, अक्षत जैन, शांतिधारा करने का सौभाग्य रमेश चंद जैन, पंकज जैन देवांशु, येशु जैन को मिला। प्रज्ज्वलन प्रीती जैन, ललिता जैन, मधु जैन ने किया। आशीष शास्त्री, विवेक शास्त्री ने संसार के सभी जीवों के सुखी रहने के लिए शांतिधारा का उच्चारण किया। इसके बाद देव-शास्त्र-गुरु की पूजा, आदिनाथ भगवान के पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। इसमें विधान कराने वाले सभी धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए। आज 101 परिवारों की तरफ से विधान का आयोजन कराया गया। जिसमें उमेश जैन, ममता जैन, गंधर्व जैन, पुष्पा देवी जैन, अनिल जैन, मनीषा जैन, नीलेश जैन, अरुणकांत, संगीतकांत, नूपुर, सर्वेशकांत जैन को शामिल होने को सौभाग्य प्राप्त हुआ। भक्तामर पाठ का शुभारंभ प्रीती ने संस्कृत भाषा में किया। आज विधान के मध्य विनोद एंड म्यूजिक पार्टी की मधुर लहरी पर सुदीप जैन शास्त्री हस्तिनापुर ने भजन प्रस्तुत किया। समस्त स्थानीय जैन समाज, बड़ा मंदिर व गुरुकुल समस्त स्टाफ एवं बच्चे शामिल रहे।
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क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, सतेंद्र कुमार एडवोकेट मेरठ, जीवेंद्र जैन, अजीत प्रसाद जैन का विशेष सहयोग रहा।
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परम पूज्य भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि अक्सर धर्म-कर्म व रहन-सहन का प्रयोग आपके द्वारा किया जाता है। जिसका तात्पर्य है कि धर्म के साथ किया कर्म ही फलदायी है। वहीं पापों के क्षय में सहायक है। धर्म से हटकर किए गए कर्म पीड़ादायी हैं। दुख आएगा तो उसे भोगना ही पड़ेगा। आज के विधान का विसर्जन ललिता जैन, राजीव जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन प्रीती जैन, पंकज जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती अर्चना शाहू, आशीष शाहू ने की। चौबीसों भगवान की आरती रमेश चंद जैन ने की।
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आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य रविंद्र जैन को प्राप्त हुआ। स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य राहुल जैन, रविंद्र जैन, अक्षत जैन, शांतिधारा करने का सौभाग्य रमेश चंद जैन, पंकज जैन देवांशु, येशु जैन को मिला। प्रज्ज्वलन प्रीती जैन, ललिता जैन, मधु जैन ने किया। आशीष शास्त्री, विवेक शास्त्री ने संसार के सभी जीवों के सुखी रहने के लिए शांतिधारा का उच्चारण किया। इसके बाद देव-शास्त्र-गुरु की पूजा, आदिनाथ भगवान के पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। इसमें विधान कराने वाले सभी धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए। आज 101 परिवारों की तरफ से विधान का आयोजन कराया गया। जिसमें उमेश जैन, ममता जैन, गंधर्व जैन, पुष्पा देवी जैन, अनिल जैन, मनीषा जैन, नीलेश जैन, अरुणकांत, संगीतकांत, नूपुर, सर्वेशकांत जैन को शामिल होने को सौभाग्य प्राप्त हुआ। भक्तामर पाठ का शुभारंभ प्रीती ने संस्कृत भाषा में किया। आज विधान के मध्य विनोद एंड म्यूजिक पार्टी की मधुर लहरी पर सुदीप जैन शास्त्री हस्तिनापुर ने भजन प्रस्तुत किया। समस्त स्थानीय जैन समाज, बड़ा मंदिर व गुरुकुल समस्त स्टाफ एवं बच्चे शामिल रहे।
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क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, सतेंद्र कुमार एडवोकेट मेरठ, जीवेंद्र जैन, अजीत प्रसाद जैन का विशेष सहयोग रहा।