{"_id":"5ebdab008ebc3e90ad29063a","slug":"words-isolation-and-quariante-are-not-new-for-india-city-news-mrt481818413","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत के लिए नए नहीं आइसोलेशन और क्वारंटीन सरीखे शब्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत के लिए नए नहीं आइसोलेशन और क्वारंटीन सरीखे शब्द
विज्ञापन
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस का हिंदी विभाग बृहस्पतिवार को 18 साल का हो गया। इस मौके पर हिंदी विभाग की तरफ से आयोजित वेब संगोष्ठी में सौ से ज्यादा पुरातन छात्रों ने भाग लिया।
संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि हिंदी विभाग प्रशंसा का पात्र है कि विषम परिस्थितियों में वेब संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। हिंदी हमारी संस्कृति, स्वाधीनता, अर्थ और समाज की भाषा है। प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला ने कहा कि प्रो. लोहनी के निर्देशन में हिंदी विभाग तकनीकी रूप से बहुत आगे है। हिंदी की विभागीय पत्रिका मंथन भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण सोपान है। डॉ. राकेश बी दुबे ने कहा कि हिंदी विभाग टेक्नोलॉजी विकास से कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। आइसोलेशन और क्वारंटीन शब्द हमारे लिए नए नहीं हैं। भारत से गिरमिटिया मजदूर जब विदेश जाते थे तो उन्हें 15 दिन आइसोलेशन एवं क्वारंटीन किया जाता था। हमारा कर्तव्य है कि हम आज के दिन हिंदी सेवियों को याद करें क्योंकि हिंदी में इनका कार्य महत्वपूर्ण है। हिंदी विभाग को विश्वविद्यालय स्तर पर प्रवासी साहित्य को पठन पाठन में शामिल किया। भारतीय भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास के लिए उनके अनुवाद का कार्य होना चाहिए। विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए हमारी तैयारी क्या है, इस पर भी विमर्श होना चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रवींद्र राणा ने कहा कि हमारे सांस्कृतिक सरोकारों की भाषा हिंदी का विकास विश्व में तेजी से हो रहा है। 150 से भी अधिक देशों में हिंदी बोली और समझी जाती है।
विज्ञापन
विभागाध्यक्ष प्रो नवीन लोहनी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि विभाग विद्यार्थियों के जीवन को नए आयाम देने में सहायक हो सके। डॉ. अमरनाथ अमर जैसे यहां के पुरातन छात्र नाम रोशन कर रहे हैं। डॉ. विपिन शर्मा, डॉ. मीनू शर्मा, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. नरेंद्र मिश्र ने भी विचार रखे। हिंदी विभाग में रचनात्मक लेखन और मीडिया लेखन का सामंजस्य बेहतरीन है। साथ ही विभागीय कार्यों में पारदर्शिता भी प्रशंसनीय है। इस मौके पर काव्य गोष्ठी का भी आयोजन हुआ।
ये रहे शामिल
डॉ. अमित भारतीय, फिरोज खान, डॉ. ममता अधाना, डॉ. मोनू सिंह, डॉ. रमेश गौतम, डॉ. आरती राणा, डॉ. प्रतिभा चौहान, कुलदीप शर्मा, राजेश चौहान, डॉ. मिंतू वर्मा, वृंदा शर्मा, जगदीप कुमार, डॉ. सुमित नागर, अमित भारतीय, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. राजेश ढांढा, डॉ. यास्मीन मूमल, डॉ अंजू समेत सौ से ज्यादा पुरातन छात्रों ने भाग लिया।
पुरातन छात्र परिषद का हुआ गठन
इस मौके पर हिंदी हैं हम पुरातन छात्र सीसीएसयू परिषद मेरठ नाम से पुरातन छात्र परिषद का विधिवत गठन हुआ। भविष्य में विभाग से जुड़े सभी आयोजन इस फेसबुक पेज पर मिलेंगे।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग की स्थापना मई 2002 में हुई थी। इससे पूर्व हिंदी का कोर्स पत्राचार पाठ्यक्रम के रूप में था। हिंदी विभाग की स्थापना के बाद यहां एमए हिंदी, एमए व्यावसायिक हिंदी पत्रकारिता जनसंचार, एमफिल, पीएचडी आदि कोर्स शुरू हुए। अब यहां बीए ऑनर्स हिंदी भी संचालित है।
विज्ञापन
संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि हिंदी विभाग प्रशंसा का पात्र है कि विषम परिस्थितियों में वेब संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। हिंदी हमारी संस्कृति, स्वाधीनता, अर्थ और समाज की भाषा है। प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला ने कहा कि प्रो. लोहनी के निर्देशन में हिंदी विभाग तकनीकी रूप से बहुत आगे है। हिंदी की विभागीय पत्रिका मंथन भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण सोपान है। डॉ. राकेश बी दुबे ने कहा कि हिंदी विभाग टेक्नोलॉजी विकास से कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। आइसोलेशन और क्वारंटीन शब्द हमारे लिए नए नहीं हैं। भारत से गिरमिटिया मजदूर जब विदेश जाते थे तो उन्हें 15 दिन आइसोलेशन एवं क्वारंटीन किया जाता था। हमारा कर्तव्य है कि हम आज के दिन हिंदी सेवियों को याद करें क्योंकि हिंदी में इनका कार्य महत्वपूर्ण है। हिंदी विभाग को विश्वविद्यालय स्तर पर प्रवासी साहित्य को पठन पाठन में शामिल किया। भारतीय भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास के लिए उनके अनुवाद का कार्य होना चाहिए। विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए हमारी तैयारी क्या है, इस पर भी विमर्श होना चाहिए।
विज्ञापन
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रवींद्र राणा ने कहा कि हमारे सांस्कृतिक सरोकारों की भाषा हिंदी का विकास विश्व में तेजी से हो रहा है। 150 से भी अधिक देशों में हिंदी बोली और समझी जाती है।
विज्ञापन
विभागाध्यक्ष प्रो नवीन लोहनी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि विभाग विद्यार्थियों के जीवन को नए आयाम देने में सहायक हो सके। डॉ. अमरनाथ अमर जैसे यहां के पुरातन छात्र नाम रोशन कर रहे हैं। डॉ. विपिन शर्मा, डॉ. मीनू शर्मा, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. नरेंद्र मिश्र ने भी विचार रखे। हिंदी विभाग में रचनात्मक लेखन और मीडिया लेखन का सामंजस्य बेहतरीन है। साथ ही विभागीय कार्यों में पारदर्शिता भी प्रशंसनीय है। इस मौके पर काव्य गोष्ठी का भी आयोजन हुआ।
ये रहे शामिल
डॉ. अमित भारतीय, फिरोज खान, डॉ. ममता अधाना, डॉ. मोनू सिंह, डॉ. रमेश गौतम, डॉ. आरती राणा, डॉ. प्रतिभा चौहान, कुलदीप शर्मा, राजेश चौहान, डॉ. मिंतू वर्मा, वृंदा शर्मा, जगदीप कुमार, डॉ. सुमित नागर, अमित भारतीय, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. राजेश ढांढा, डॉ. यास्मीन मूमल, डॉ अंजू समेत सौ से ज्यादा पुरातन छात्रों ने भाग लिया।
पुरातन छात्र परिषद का हुआ गठन
इस मौके पर हिंदी हैं हम पुरातन छात्र सीसीएसयू परिषद मेरठ नाम से पुरातन छात्र परिषद का विधिवत गठन हुआ। भविष्य में विभाग से जुड़े सभी आयोजन इस फेसबुक पेज पर मिलेंगे।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग की स्थापना मई 2002 में हुई थी। इससे पूर्व हिंदी का कोर्स पत्राचार पाठ्यक्रम के रूप में था। हिंदी विभाग की स्थापना के बाद यहां एमए हिंदी, एमए व्यावसायिक हिंदी पत्रकारिता जनसंचार, एमफिल, पीएचडी आदि कोर्स शुरू हुए। अब यहां बीए ऑनर्स हिंदी भी संचालित है।