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Meerut News: पुत्र की रक्षा के लिए महिलाओं ने रखा अहोई का व्रत
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अहोई माता की कथा सुनती महिलाएं। (मवाना)
मवाना। अहोई अष्टमी का त्योहार सोमवार को मनाया गया। महिलाओं ने व्रत रखा। मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के बाद संतान के दीर्घायु व स्वस्थ रहने की कामना की।
इससे पहले पार्कों और घरों में सामूहिक रूप से कथा का आयोजन किया गया। कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को अहोई पर्व मनाया जाता है। उत्तर व मध्य भारत में इस त्योहार का खूब प्रचलन है। पुत्रवती महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है। माताएं अहोई अष्टमी के व्रत में दिनभर उपवास रखती हैं। सायंकाल तारे दिखाई देने के समय अहोई का पूजन किया जाता है। तारों को करवे से अर्घ्य दिया जाता है।
अहोई अष्टमी के दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है। महिलाएं व्रत रख कर अपनी संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। नगर की अलग-अलग कॉलोनियों में महिला सदस्यों ने अहोई अष्टमी का व्रत रख कर पार्क में पूजन किया। पंडित मोहन जोशी ने बताया कि संतान के लिए व्रत रखना न केवल माता को अच्छा लगता है बल्कि उनकी दीर्घायु की भावना भी इससे जुड़ी है।
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इससे पहले पार्कों और घरों में सामूहिक रूप से कथा का आयोजन किया गया। कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को अहोई पर्व मनाया जाता है। उत्तर व मध्य भारत में इस त्योहार का खूब प्रचलन है। पुत्रवती महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है। माताएं अहोई अष्टमी के व्रत में दिनभर उपवास रखती हैं। सायंकाल तारे दिखाई देने के समय अहोई का पूजन किया जाता है। तारों को करवे से अर्घ्य दिया जाता है।
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अहोई अष्टमी के दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है। महिलाएं व्रत रख कर अपनी संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। नगर की अलग-अलग कॉलोनियों में महिला सदस्यों ने अहोई अष्टमी का व्रत रख कर पार्क में पूजन किया। पंडित मोहन जोशी ने बताया कि संतान के लिए व्रत रखना न केवल माता को अच्छा लगता है बल्कि उनकी दीर्घायु की भावना भी इससे जुड़ी है।
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