महिला ग्राम प्रधान की गोलियां बरसा कर हत्या, गांव में सनसनी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार सवार पांच बदमाशों ने शुक्रवार की सुबह फिल्मी स्टाइल में ताबड़तोड़ गोलियां बरसा कर महिला प्रधान को मौत के घाट उतार दिया। भाभी को बचाने आए देवर पर भी बदमाशों ने फायर झोंक दी जिसमें वह लहूलुहान हो गया। हालांकि दूसरा फायर मिस होने से उसकी जान बच गई। इसके बाद बदमाश हथियार लहराते हुए फरार हो गए। सूचना के बाद भी हत्यारों को पकड़ने के लिए गंभीर प्रयास न किए जाने से खफा ग्रामीण शव को सीएचसी से पीएम पर ले जाने के बजाए गांव ले आए। इससे पुलिस में हड़कंप मच गया। एसएसपी ने गांव में पहुंच कर ग्रामीणों को समझाया जिसके बाद शव को पीएम पर भेज जा सका। देवर की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।
शुक्रवार को गंगोह कोतवाली के गांव मानपुर थली में सुबह करीब सात बजे पांच बदमाश महिला प्रधान राकेश बाला के आवास पर पहुंचे। उन्होंने अपनी सफेद रंग की कार आई-20 बैक करके गेट पर लगा दी। एक नकाबपोश बदमाश गाड़ी में ही बैठा रहा। जबकि दूसरा गेट पर खड़ा हो गया और तीन बदमाशों ने अंदर बैठक में पहुंच कर ग्राम प्रधान से मिलने की इच्छा जताई। ग्राम प्रधान के भतीजे सोनू ने उन्हें बताया कि वह पूजा कर रही हैं। इसके बाद सोनू ने ही बदमाशों को बैठक में बैठाया और पानी के बाद चाय पिलाई। जैसे ही ग्राम प्रधान 50 वर्षीय राकेश बाला पूजा के बाद बैठक में पहुंची तो एक बदमाश ने स्वयं को त्यागी बताते हुए अपनी रिश्तेदारी पास के गांव गांधीनगर में बताते हुए बाइक लुटने की बात कही। ग्राम प्रधान ने गांधीनगर में त्यागी होने पर सवाल करते हुए कहा इस गांव में तो त्यागी रहते ही नहीं। इस पर बदमाशों ने मोबाइल निकालने के बहाने तमंचे निकाल कर प्रधान पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। पास में बैठे देवर सेवाराम उन्हें बचाने के लिए आगे आया तो उस पर भी फायर झोंक दिया। इसमें वह जख्मी हो गया। दूसरे बदमाश ने भी सेवाराम पर फायर करना चाह तो वह मिस हो गया।
इसके बाद बदमाश तमंचे लहराते हुए फरार हो गए। गोलियों की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीण ग्राम प्रधान और उसके देवर को लेकर सीएचसी पहुंचे। जहां प्रधान को चिकित्सकों ने मृतक घोषित कर दिया। जबकि देवर को सीएचसी में उपचार दिया गया। प्रधान की हत्या की खबर पर सीएचसी पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। जहां से भीड़ प्रधान के शव को पीएम पर ले जाने के बजाए वापिस गांव ले आई। इस पर पुलिस के हाथ पांव फूल गए। ग्रामीणों का आरोप था कि सूचना के बाद भी पुलिस ने बदमाशों की पकड़ के लिए कोई प्रयास नहीं किया। आनन फानन में वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक लव कुमार, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक रफीक अहमद, क्षेत्राधिकारी सुरेन्द्र कुमार दास, कोतवाली प्रभारी योगेश शर्मा समेत सर्किल के थानों की पुलिस और पीएसी घटना स्थल पर पहुंची। पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज ग्रामीणों को कप्तान ने समझा बुझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। तब जाकर पुलिस ने राहत की सांस ली। ग्राम प्रधान राकेश बाला के देवर सेवाराम ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। एसपी देहात रफीक अहमद ने बताया कि हत्यारे किसी गैंग के बदमाश हैं। माना जा रहा है कि किसी मामले की पैरवी करने को लेकर प्रधान की हत्या की गई है। जांच की जा रही है। जल्द ही हत्यारे जेल में होंगे।
पांच साल बाद फिर दहला गांव
जमीन को लेकर पांच साल पूर्व गांव में खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें चार लोगों की हत्या कर दी गई थी। इससे पूरा गांव दहल उठा था। गांव में करीब पांच वर्ष पूर्व गांव में चार हत्या हुई थी। इससे पूरा गांव में तनाव के साथ दहल उठा था। शुक्रवार को एक बार फिर से ऐसा ही नजारा देखने को मिला। गांव में फिर से लोगों की याद ताजा हो गई। इससे गांव में गम का माहौल होने के साथ ही तनाव भी है। इसके चलते गांव में पुलिस तैनात कर दी गई।
बदमाशों ने ग्राम प्रधान राकेश बाला की हत्या से पूर्व गांव की रेकी की थी। उन्होंने ग्राम प्रधान के पुत्र नीरज के बारे में भी पूछा था। हत्या की सूचना बाद के पुलिस के देर से पहुंचने ग्रामीणों में भारी रोष दिखाई दिया। ग्रामीणों का कहना कि यदि पुलिस सही समय पर पहुंचती तो बदमाश पकड़ में आ जाते। ग्रामीणों को कहना था कि ग्राम प्रधान की हत्या के बाद सूचना दी गई, लेकिन पुलिस काफी देर से पहुंची। आसपास की चौकियों को अलर्ट नहीं किया गया। यदि पुलिस समय पर कार्रवाई जाती तो बदमाश पकड़े जा सकते थे।
खादर आयरन लेडी थी राकेश बाला
राकेश बाला एक संघर्षशील महिला थी। इसलिए वह पिछले दो योजनाओं से लगातार ग्राम प्रधान थी। अपने तेज तर्रार स्वभाव के कारण गरीब की मदद करने से पीछे नहीं हटती थी। इसलिए उसे खादर क्षेत्र की आयरन लेडी कहा जाता था और अधिकारियों मे भी उसका अच्छा खासा प्रभाव था। उसने एक बार ग्राम पंचायत का चुनाव हारने के बाद भी हार नहीं मानी और दूसरी बार भी ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा और चुनाव जीत गई। जब से वह लगातार गांव की दूसरी बार प्रधान चुनी गई। गरीबों की मदद करना उसके स्वभाव में था। उसकी अधिकारियों पर पकड़ थी। इसलिए खादर क्षेत्र के लोग उसे आयरन लेडी कहते थे। उनके परिवार में दो पुत्र है जिनकी शादी हो चुकी है।