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कोरोना के लक्षण खत्म हो गए, तब आई पॉजिटिव रिपोर्ट
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कोरोना के लक्षण खत्म हो गए, तब आई पॉजिटिव रिपोर्ट
मेरठ। कोरोना के लक्षण खत्म होने के बाद पॉजिटिव की रिपोर्ट आ रही है। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान वह अपने स्तर पर ही दवाइयों का सेवन कर रहे हैं। दवा तो दूर स्वास्थ्य विभाग उनका हाल तक नहीं पूछ रहा है।
बुखार, खांसी, जुकाम या सांस लेने में दिक्कत होने के कारण लोग कोरोना की जांच करा रहे हैं। घर पर ही दवाई खा रहे हैं। पूरी तरह से खुद को स्वस्थ महसूस करने लगे, लेकिन किसी की 6 दिन बाद तो किसी के सात दिन बाद रिपोर्ट आई कि वह कोरोना पॉजिटिव हैं। अब ऐसे में वे क्या करें। दूसरी तरफ कई जिलों में दूसरे जिले से आ रहे लोगों को अपनी कोरोना की रिपोर्ट दिखानी पड़ती है। 72 घंटे पहले की रिपोर्ट मांगते हैं। लेकिन समय से रिपोर्ट नहीं मिल पाती है। ऐसे में वह परेशान हैं।
इस संबंध में मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग का कहना है कि पिछले दिनों लैब पर भार काफी बढ़ गया था। उनके यहां मेरठ के अलावा बिजनौर, शामली और मुजफ्फरनगर जिलों के सैंपलों की भी जांच होती है। क्षमता 2950 सैंपल की है जबकि वह प्रतिदिन 6000 से ज्यादा सैंपल की जांच करते हैं। अब स्थिति बेहतर हुई है। उम्मीद है कि अब इस तरह की दिक्कत नहीं आएगी। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज को जल्द ही कुछ मशीनें मिलने वाली हैं, जिसके बाद प्रतिदिन 12 हजार सैंपलों की जांच की क्षमता हो जाएगी। इससे इस तरह की परेशानी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। मई के पहले सप्ताह तक यह व्यवस्था होने की उम्मीद है।
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केस-1
अनिल (44) ने 22 अप्रैल को जिला अस्पताल में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। तब उन्हें बुखार और खांसी जुकाम था। अब वह बिल्कुल स्वस्थ हैं। कोई लक्षण नहीं है। बुधवार को उनकी रिपोर्ट आई कि वह कोरोना पॉजिटिव हैं। अब समझ नहीं पा रहे हैं कि खुद को संक्रमित समझे या नेगेटिव।
केस-2
वैभव (24) को एक प्रतियोगी परीक्षा देने के लिए जाना था। इससे 72 घंटे पहले की कोरोना की रिपोर्ट मांगी गई थी। उसने 17 अप्रैल को जिला अस्पताल में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था, लेकिन 22 अप्रैल तक रिपोर्ट नहीं आई। वह परीक्षा में नहीं बैठ सका। 23 को रिपोर्ट नेगेटिव आई। नेगेटिव होने के बावजूद वह परीक्षा नहीं दे पाया।
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मेरठ। कोरोना के लक्षण खत्म होने के बाद पॉजिटिव की रिपोर्ट आ रही है। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान वह अपने स्तर पर ही दवाइयों का सेवन कर रहे हैं। दवा तो दूर स्वास्थ्य विभाग उनका हाल तक नहीं पूछ रहा है।
बुखार, खांसी, जुकाम या सांस लेने में दिक्कत होने के कारण लोग कोरोना की जांच करा रहे हैं। घर पर ही दवाई खा रहे हैं। पूरी तरह से खुद को स्वस्थ महसूस करने लगे, लेकिन किसी की 6 दिन बाद तो किसी के सात दिन बाद रिपोर्ट आई कि वह कोरोना पॉजिटिव हैं। अब ऐसे में वे क्या करें। दूसरी तरफ कई जिलों में दूसरे जिले से आ रहे लोगों को अपनी कोरोना की रिपोर्ट दिखानी पड़ती है। 72 घंटे पहले की रिपोर्ट मांगते हैं। लेकिन समय से रिपोर्ट नहीं मिल पाती है। ऐसे में वह परेशान हैं।
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इस संबंध में मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग का कहना है कि पिछले दिनों लैब पर भार काफी बढ़ गया था। उनके यहां मेरठ के अलावा बिजनौर, शामली और मुजफ्फरनगर जिलों के सैंपलों की भी जांच होती है। क्षमता 2950 सैंपल की है जबकि वह प्रतिदिन 6000 से ज्यादा सैंपल की जांच करते हैं। अब स्थिति बेहतर हुई है। उम्मीद है कि अब इस तरह की दिक्कत नहीं आएगी। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज को जल्द ही कुछ मशीनें मिलने वाली हैं, जिसके बाद प्रतिदिन 12 हजार सैंपलों की जांच की क्षमता हो जाएगी। इससे इस तरह की परेशानी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। मई के पहले सप्ताह तक यह व्यवस्था होने की उम्मीद है।
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केस-1
अनिल (44) ने 22 अप्रैल को जिला अस्पताल में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। तब उन्हें बुखार और खांसी जुकाम था। अब वह बिल्कुल स्वस्थ हैं। कोई लक्षण नहीं है। बुधवार को उनकी रिपोर्ट आई कि वह कोरोना पॉजिटिव हैं। अब समझ नहीं पा रहे हैं कि खुद को संक्रमित समझे या नेगेटिव।
केस-2
वैभव (24) को एक प्रतियोगी परीक्षा देने के लिए जाना था। इससे 72 घंटे पहले की कोरोना की रिपोर्ट मांगी गई थी। उसने 17 अप्रैल को जिला अस्पताल में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था, लेकिन 22 अप्रैल तक रिपोर्ट नहीं आई। वह परीक्षा में नहीं बैठ सका। 23 को रिपोर्ट नेगेटिव आई। नेगेटिव होने के बावजूद वह परीक्षा नहीं दे पाया।