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छह माह में शुरू हो जाएगा रैपिड ट्रेन पर काम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jun 2017 03:01 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रैपिड ट्रेन का काम लगभग छह माह में शुरू हो जाएगा। सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक दो चरणों में कार्य किया जाएगा। इसकी कुल दूरी 92 किमी होगी। 62 मिनट का सफर होगा, जिसमें कुल 17 स्टेशन होंगे तथा एवरेज स्पीड मेट्रो से तिगुनी 90 किमी प्रति घंटा होगी। कार्य के प्रारम्भ होने की तिथि से 04 से 05 वर्ष का समय कार्य पूर्ण होने में लगेगा।
बुधवार को आयुक्त कार्यालय में एनसीआरटीसी अधिकारियों, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) की समीक्षा बैठक में आयुक्त डा. प्रभात कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा मई 2017 में डीपीआर को अनुमति दे दी गयी है। जनवरी 2018 से कार्य प्रारंभ किया जाएगा। प्रथम फेस साहिबाबाद से दुहाई (डाबर चौक) तक दो पैकेज में शुरू होगा, जिसकी कुल लम्बाई 17.5 किमी है।
32 हजार करोड़ के पार जाएगी लागत
आयुक्त ने उपस्थित अधिकारियों से कार्य की समय सीमा देने के लिये कहा। उन्होंने बताया कि योजना की कुल लागत 26 हजार करोड़ रुपये है, जोकि कार्य पूरा होने तक 32 हजार करोड़ तक हो सकती हैं। जिलाधिकारी समीर वर्मा ने बताया कि आरआरटीएस में कम भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी तथा इससे पूरे क्षेत्र में अर्थिक गतिविधियां बढे़ंगी। एनसीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनय कुमार सिंह ने बताया कि आरआरटीएस द्वारा दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक दो चरणों में कार्य किया जाएगा। मेरठ में परतापुर से मोदीपुरम 15 किमी की दूरी मेरठ मेट्रो के समानांतर होगी। प्रथम चरण में सराय काले खां से आनन्द विहार दिल्ली से परतापुर मेरठ तक कार्य होगा तथा द्वितीय चरण में परतापुर से मोदीपुरम तक कार्य होगा।
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अब यमुना केनीचे से गुजरेगी
एनसीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के एटीपी तथा इस प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी विवेक भास्कर ने बताया कि पहले यमुना नदी के नीचे जाने का मार्ग बनाया जा रहा था, जिसको अब नदी के ऊपर से किये जाने पर कार्य किया जा रहा है। इस कारण पूर्व में चिन्हित 62 किमी एलीवेटिड मार्ग की लंबाई बढ सकती है। हालांकि इससे तीन हजार रुपये कम खर्च होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि योजना में करीब 30 किमी का मार्ग अंडरग्राउड रहेगा। उन्होंने बताया कि योजना के लिये केन्द्र सरकार उत्तर प्रदेश सरकार, दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित होगी तथा एशियन डेवलेमेंट बैक सें भी लोन लिया जाएगा तथा कार्यदायी संस्था एनसीआरटीसी होगी। दिल्ली मेट्रो को कन्सलटेंट नियुक्त किया गया हैं। इस अवसर पर एनसीआरटीसी के मुख्य परियोजना प्रबंधक राकेश कुमार हुस्तु, जीएम प्लानिग सुधीर कुमार शर्मा, राजीव दत्त आदि मौजूद रहे।
मेरठ दिल्ली मार्ग को करना होगा चौड़ा
रैपिड ट्रेन पर काम शुरू होने से पहले ही मेरठ -दिल्ली रोड को चौड़ा करना होगा। इस रोड पर ऊपर ट्रेन आएगी। चूंकि काम शुरू होने पर इस रोड के सेंटर में पिलर लगाने काम शुरू हो जाएगा और लगभग नौ मीटर रोड पर ब्लॉक लगाकर दोनों तरफ से बंद कर दिया जाएगा। ऐसे में इस पर यातायात सुगम करने के लिए इस पर अतिरिक्त लेन बनानी होंगी।
अन्य सड़कें भी करनी होंगी डेवलप
गंगनहर पटरी को डेवलप किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होते ही यातायात व्यव्यस्था दुरूस्त करना चुनौती होगा। इसके लिए मोदीनगर से पिलखुवा, मोदीनगर से निवाडी, बागपत रोड आदि की तरफ मार्ग विकसित करने होंगे। इस बाबत पीडब्लूडी को अलर्ट किया गया है। साथ ही कहा है कि सभी विभाग तैयार रहें।
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बुधवार को आयुक्त कार्यालय में एनसीआरटीसी अधिकारियों, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) की समीक्षा बैठक में आयुक्त डा. प्रभात कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा मई 2017 में डीपीआर को अनुमति दे दी गयी है। जनवरी 2018 से कार्य प्रारंभ किया जाएगा। प्रथम फेस साहिबाबाद से दुहाई (डाबर चौक) तक दो पैकेज में शुरू होगा, जिसकी कुल लम्बाई 17.5 किमी है।
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32 हजार करोड़ के पार जाएगी लागत
आयुक्त ने उपस्थित अधिकारियों से कार्य की समय सीमा देने के लिये कहा। उन्होंने बताया कि योजना की कुल लागत 26 हजार करोड़ रुपये है, जोकि कार्य पूरा होने तक 32 हजार करोड़ तक हो सकती हैं। जिलाधिकारी समीर वर्मा ने बताया कि आरआरटीएस में कम भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी तथा इससे पूरे क्षेत्र में अर्थिक गतिविधियां बढे़ंगी। एनसीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनय कुमार सिंह ने बताया कि आरआरटीएस द्वारा दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक दो चरणों में कार्य किया जाएगा। मेरठ में परतापुर से मोदीपुरम 15 किमी की दूरी मेरठ मेट्रो के समानांतर होगी। प्रथम चरण में सराय काले खां से आनन्द विहार दिल्ली से परतापुर मेरठ तक कार्य होगा तथा द्वितीय चरण में परतापुर से मोदीपुरम तक कार्य होगा।
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अब यमुना केनीचे से गुजरेगी
एनसीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के एटीपी तथा इस प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी विवेक भास्कर ने बताया कि पहले यमुना नदी के नीचे जाने का मार्ग बनाया जा रहा था, जिसको अब नदी के ऊपर से किये जाने पर कार्य किया जा रहा है। इस कारण पूर्व में चिन्हित 62 किमी एलीवेटिड मार्ग की लंबाई बढ सकती है। हालांकि इससे तीन हजार रुपये कम खर्च होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि योजना में करीब 30 किमी का मार्ग अंडरग्राउड रहेगा। उन्होंने बताया कि योजना के लिये केन्द्र सरकार उत्तर प्रदेश सरकार, दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित होगी तथा एशियन डेवलेमेंट बैक सें भी लोन लिया जाएगा तथा कार्यदायी संस्था एनसीआरटीसी होगी। दिल्ली मेट्रो को कन्सलटेंट नियुक्त किया गया हैं। इस अवसर पर एनसीआरटीसी के मुख्य परियोजना प्रबंधक राकेश कुमार हुस्तु, जीएम प्लानिग सुधीर कुमार शर्मा, राजीव दत्त आदि मौजूद रहे।
मेरठ दिल्ली मार्ग को करना होगा चौड़ा
रैपिड ट्रेन पर काम शुरू होने से पहले ही मेरठ -दिल्ली रोड को चौड़ा करना होगा। इस रोड पर ऊपर ट्रेन आएगी। चूंकि काम शुरू होने पर इस रोड के सेंटर में पिलर लगाने काम शुरू हो जाएगा और लगभग नौ मीटर रोड पर ब्लॉक लगाकर दोनों तरफ से बंद कर दिया जाएगा। ऐसे में इस पर यातायात सुगम करने के लिए इस पर अतिरिक्त लेन बनानी होंगी।
अन्य सड़कें भी करनी होंगी डेवलप
गंगनहर पटरी को डेवलप किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होते ही यातायात व्यव्यस्था दुरूस्त करना चुनौती होगा। इसके लिए मोदीनगर से पिलखुवा, मोदीनगर से निवाडी, बागपत रोड आदि की तरफ मार्ग विकसित करने होंगे। इस बाबत पीडब्लूडी को अलर्ट किया गया है। साथ ही कहा है कि सभी विभाग तैयार रहें।