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मद्य निषेध दिवस: ये है आबकारी विभाग की सच्चाई, वार्षिक बजट से चौंक जाएंगे आप

Tue, 18 Dec 2018 05:01 PM IST
कपिल kapil जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Tue, 18 Dec 2018 05:01 PM IST
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Wine Prohibition Day, Excise Department in Muzaffarnagar did not work to make aware of society
मुजफ्फरनगर कलक्ट्रेट बनी पेंटिंग - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश सरकार का मद्य निषेध विभाग सिर्फ फाइलों में सिमट रहा है। वार्षिक बजट को सुनेंगे तो चौंक जाएंगे, क्योंकि शराब के दुष्प्रभाव से समाज को जागरूक करने के लिए महकमे के पास मात्र एक हजार रुपये का सालाना बजट है। ऐसा तब है, जब वर्ष 2018-19 में जिले में आबकारी राजस्व चार अरब सात करोड़ 27 लाख का लक्ष्य रखा गया है। बीते आठ माह में एक अरब 61 करोड़ 84 लाख रुपये की शराब की खपत हो चुकी है। 

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राष्ट्रीय मद्य निषेध दिवस रस्म अदायगी बन गया है। शराब की लत से जुड़ी हानियों को लेकर विभाग के पास कोई जन जागरूकता कार्यक्रम नहीं है। पूरे वर्ष में स्कूल, कॉलेजों में कोई स्लोगन, पोस्टर, भाषण प्रतियोगिता नहीं की गई। न ही पुलिस प्रशासन और परिवहन विभाग के स्तर पर कोई संकल्प रैली निकली। जिलेभर में मद्यपान को लेकर दुर्घटना और अन्य दुष्प्रभाव के हॉर्डिंग्स भी दिखाई नहीं देते। कलेक्ट्रेट में वॉल पेंटिंग भी धुंधली पड़ चुकी है। नो एल्कोहल, नो ड्राइव, जैसे संकेत भी सिर्फ राष्ट्रीय राजमार्गों पर दिखाई देते हैं। यह अलग बात है कि बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना भी एक मुख्य वजह है। मद्य निषेध अभियान को लेकर सरकार की कोई रुचि नहीं है। विभागीय कार्यप्रणाली से यह स्पष्ट हो रहा है। हैरत की बात है कि जिले में मद्य निषेध प्रचार-प्रसार कार्यक्रम का बजट मात्र 1000 रुपये रखा गया है। उसे भी आबकारी विभाग को ही खर्च करना है। वॉल पेंटिंग भी जिले भर में अबकी बार कहीं दिखाई नहीं दी। ऐसे हालात में कैसे समाज शराब रहित बन पाएगा? आंकड़े इस बात के गवाह है कि प्रति वर्ष आबकारी राजस्व का लक्ष्य बढ़ा दिया जाता है। वर्ष 2018-19 में जिले में गत वर्ष की अपेक्षा 35 प्रतिशत अधिक का राजस्व तय किया गया है।
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मद्य निषेध प्रचार-प्रसार के लिए विभाग के पास मात्र 1000 रुपये का बजट है। उसमें केवल वॉल पेंटिंग करा ली जाती है, ताकि शराब के दुष्प्रभाव के प्रति जागरूकता लाई जा सके। इस बजट का वहन भी जिला आबकारी विभाग के मद से ही होता है। - आलोक कुमार क्षेत्रीय मद्य निषेध अधिकारी

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वर्ष 2017-18 में जिले में 301.22 करोड़ आबकारी राजस्व का लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष 142.04 करोड़ रुपये की विभाग को प्राप्ति हुई। जिला आबकारी अधिकारी अखिलेश कुमार सिंह के मुताबिक मौजूदा वित्तीय वर्ष में मार्च 2019 तक 407.27 करोड़ रुपये का राजस्व टारगेट दिया गया है। बीते आठ माह में अभी तक 161.84 करोड़ का राजस्व विभाग प्राप्त कर चुका है।  

बीयर की 26.33 लाख बोतलें गटकी
अप्रैल से नवंबर तक जिले में देशी शराब 34 लाख 75 हजार, 170 लीटर बिक चुकी है, जबकि विदेशी मदिरा की बिक्री का आंकड़ा 11 लाख तीन हजार 68 बोतल का है। बीयर के शौकीनों की तादाद बढ़ रही है। जनपद में पिछले आठ महीने में बीयर की 26 लाख 33 हजार 525 बोतलें बिक चुकी है।

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