मिला वरदान: कालागढ़ में वन्यजीव बचाव, पुनर्वास व संरक्षण केंद्र बनकर तैयार, पीएम मोदी कर सकते हैं उद्घाटन
कालागढ़ में वन्यजीव बचाव, पुर्नवास व संरक्षण केंद्र बनकर तैयार हो गया है। केंद्र में दो बाघों, पांच गुलदारों का उपचार यहां किया जा रहा है। ऋषिकेश, रुद्रपुर से दो-दो व नैनीताल के चिड़ियाघर से एक गुलदार उपचार के लिए लाया गया था। आठ महीनों से यहां दो बाघों का भी उपचार किया जा रहा है।
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कार्बेट नेशनल पार्क के कालागढ़ उपखंड के ढेला में बने वन्यजीव बचाव, पुर्नवास व संरक्षण केंद्र बनकर तैयार हो गया है। केंद्र के उद्घाटन की तैयारियों में पार्क प्रशासन जुटा हुआ है।
14 फरवरी 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कालागढ़ आगमन पर कार्बेट नेशनल पार्क में वन्यजीवों के उपचार के लिए केंद्र बनाए जाने की घोषणा की गई थी। जिसके उपरांत वन विभाग ने कालागढ़ उपखंड की ढेला रेंज में इस केंद्र को बनाने की तैयारी शुरू की। वर्तमान में वन्यजीव बचाव, पुनर्वास एवं संरक्षण केंद्र बनकर तैयार हो चुका है।
केंद्र के बन जाने के बाद अब वन विभाग उसके उद्घाटन की तैयारी में जुट गया है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस केंद्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से कराया जाएगा। इस बारे में कार्बेट नेशनल पार्क के निदेशक राहुल ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उद्घाटन कराने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तराखंड राज्य के कुमायूं में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान यह उद्घाटन किया जा सकता है।
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दो बाघों व पांच गुलदारों का उपचार जारी
केंद्र में दो बाघों, पांच गुलदारों का उपचार यहां किया जा रहा है। ऋषिकेश, रुद्रपुर से दो-दो व नैनीताल के चिड़ियाघर से एक गुलदार उपचार के लिए लाया गया था। आठ महीनों से यहां दो बाघों का भी उपचार किया जा रहा है। कालागढ़ के उपखंड अधिकारी कुंदन सिंह खाती ने बताया कि समय-समय पर अधिकारी केंद्र का निरीक्षण कर जीवों के स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं। चिकित्सक जीवों का समय समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं।
राज्य के जीवों के लिए वरदान साबित हो रहा केंद्र
कार्बेट पार्क के निदेशक राहुल का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्बेट नेशनल पार्क के दौरे के दौरान इस केंद्र को बनाने की कवायद राज्य के वन्यजीवों के लिए वरदान साबित हो रही है। यहां खूंखार जीवों का उपचार किया जा रहा है। वर्तमान में दो ऐसे गुलदारों का उपचार किया जा रहा है। जिन्होंने ग्रामीणों पर हमले किए हैं। इन जीवों के सामान्य हो जाने पर इन्हें जंगल में छोड़ दिया जाएगा।