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बिजनौर: बकाया गन्ना भुगतान मामले में वेव ग्रुप के चेयरमैन, एमडी के नाम भी विवेचना में शामिल

Thu, 17 Jan 2019 01:08 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 17 Jan 2019 01:08 PM IST
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Wave Group Chairman and MD names in the case of outstanding payment of sugarcane in Bijnor
चीनी मिल - फोटो : अमर उजाला
पिछले साल का गन्ना बकाया भुगतान न करने के मामले में दर्ज रिपोर्ट में पुलिस ने वेव ग्रुप के चेयरमैन राजेंद्र सिंह चड्ढा और एमडी मनप्रीत सिंह चड्ढा का नाम भी विवेचना में शामिल कर लिया है। पुलिस इस मामले में पहले ही ग्रुप के डायरेक्टर और अध्यासी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर चुकी है। 
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वेव ग्रुप की बिजनौर चीनी मिल पर पिछले साल का 26.50 करोड़ और चांदपुर चीनी मिल का 35.63 करोड़ रुपया बकाया है। प्रशासन और किसानों द्वारा दबाव बनाने के बाद भी चीनी मिलों ने भुगतान नहीं किया है।
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चीनी मिलों का सोफ्ट लोन बैंक द्वारा स्वीकृत कर लिया गया है, लेकिन शासन ने इस फाइल पर रोक लगा दी है। भुगतान न करने पर साल की शुरूआत में ग्रुप के अध्याशी डीएस बिंद्रा, अध्यासी अशोक कुमार तिवारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया।
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कलक्ट्रेट में मंगलवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के धरना प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने भुगतान के लिए और सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने वेव ग्रुप के चेयरमैन राजेंद्र सिंह चड्ढा और एमडी मनप्रीत सिंह चड्ढा उर्फ मोंटी चड्ढा के खिलाफ भी भुगतान न करने पर थाने में तहरीर दी है। पुलिस ने एक ही मामला देखते हुए दोनों के नाम पुरानी रिपोर्ट की विवेचना में शामिल कर लिए हैं। एक ही मामले में अब चारों के खिलाफ विवेचना की जाएगी। कार्यवाहक शहर कोतवाल नरेंद्र गौड़ ने इसकी पुष्टि की है।
 
मिल बंद करना चाहते थे कर्मचारी 
मंगलवार को जीएम इसरार अहमद और तेजवीर सिंह ढाका के साथ किसानों ने अभद्रता की थी, इससे मिल कर्मचारियों में भी रोष फैल गया। मिल कर्मचारियों ने मिल बंद करने की बात कही, लेकिन किसी तरह उन्हें बाकी अधिकारियों ने मनाया और मिल को बंद होने नहीं दिया।

मिल में जीएम के इस्तीफा देने से बाकी कर्मचारियों पर भी इसका असर पड़ा है। मिल के प्रबंधन की जिम्मेदारी जीएम पर ही होती है। अगर जीएम न हो तो कर्मचारियों को दिशा निर्देश नहीं मिल पाते हैं। फिलहाल मिल के किसी अधिकारी को ही जीएम का अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने की बात कही जा रही है।

तो हो सकती है विस्फोटक स्थिति 
मंगलवार को हुए हंगामे के बाद ग्रुप डायरेक्टर डीएस बिंद्रा की ओर से गन्ना आयुक्त को पत्र लिखा गया है। पत्र में बताया गया है कि जिले की स्योहारा चीनी मिल को 98.55 करोड़, धामपुर को 65.35 करोड़, बुंदकी को 48.28 करोड़, बहादरपुर को 39.66 करोड़ का सोफ्ट लोन दिया गया है। लेकिन ग्रुप की बिजनौर, चांदपुर चीनी मिल को सोफ्ट लोन स्वीकृत होने के बाद भी नहीं दिया जा रहा है।

कहा कि मंगलवार के हंगामे के कारण सीजीएम इसरार अहमद ने इस्तीफा दिया है। वे एक कर्मठ अधिकारी हैं। पत्र में लिखा गया है कि गन्ना भुगतान के लिए अगर जल्दी ही सोफ्ट लोन स्वीकृत नहीं किया गया तो कभी भी कोई विस्फोटक स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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