बिजनौर: बकाया गन्ना भुगतान मामले में वेव ग्रुप के चेयरमैन, एमडी के नाम भी विवेचना में शामिल
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वेव ग्रुप की बिजनौर चीनी मिल पर पिछले साल का 26.50 करोड़ और चांदपुर चीनी मिल का 35.63 करोड़ रुपया बकाया है। प्रशासन और किसानों द्वारा दबाव बनाने के बाद भी चीनी मिलों ने भुगतान नहीं किया है।
चीनी मिलों का सोफ्ट लोन बैंक द्वारा स्वीकृत कर लिया गया है, लेकिन शासन ने इस फाइल पर रोक लगा दी है। भुगतान न करने पर साल की शुरूआत में ग्रुप के अध्याशी डीएस बिंद्रा, अध्यासी अशोक कुमार तिवारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया।
मिल बंद करना चाहते थे कर्मचारी
मंगलवार को जीएम इसरार अहमद और तेजवीर सिंह ढाका के साथ किसानों ने अभद्रता की थी, इससे मिल कर्मचारियों में भी रोष फैल गया। मिल कर्मचारियों ने मिल बंद करने की बात कही, लेकिन किसी तरह उन्हें बाकी अधिकारियों ने मनाया और मिल को बंद होने नहीं दिया।
मिल में जीएम के इस्तीफा देने से बाकी कर्मचारियों पर भी इसका असर पड़ा है। मिल के प्रबंधन की जिम्मेदारी जीएम पर ही होती है। अगर जीएम न हो तो कर्मचारियों को दिशा निर्देश नहीं मिल पाते हैं। फिलहाल मिल के किसी अधिकारी को ही जीएम का अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने की बात कही जा रही है।
तो हो सकती है विस्फोटक स्थिति
मंगलवार को हुए हंगामे के बाद ग्रुप डायरेक्टर डीएस बिंद्रा की ओर से गन्ना आयुक्त को पत्र लिखा गया है। पत्र में बताया गया है कि जिले की स्योहारा चीनी मिल को 98.55 करोड़, धामपुर को 65.35 करोड़, बुंदकी को 48.28 करोड़, बहादरपुर को 39.66 करोड़ का सोफ्ट लोन दिया गया है। लेकिन ग्रुप की बिजनौर, चांदपुर चीनी मिल को सोफ्ट लोन स्वीकृत होने के बाद भी नहीं दिया जा रहा है।
कहा कि मंगलवार के हंगामे के कारण सीजीएम इसरार अहमद ने इस्तीफा दिया है। वे एक कर्मठ अधिकारी हैं। पत्र में लिखा गया है कि गन्ना भुगतान के लिए अगर जल्दी ही सोफ्ट लोन स्वीकृत नहीं किया गया तो कभी भी कोई विस्फोटक स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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