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Meerut News: सैनी गांव में प्रदूषण के खिलाफ एकजुट हुए ग्रामीण, एई को जमीन पर बैठाया
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सैनी गांव में फ्लाईओवर के नीचे बैठक करते आधा दर्ज गांवों के लोग, मौके पर पहुंची पुलिस को शिकायत
एनएच-34 स्थित सैनी गांव के फ्लाईओवर के नीचे सोमवार को प्रदूषण के खिलाफ छह गांवों के ग्रामीणों ने महापंचायत की। फैक्टरियों में ईंधन के रूप में जलाए जा रहे प्लास्टिक कचरे से आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रदूषण विभाग के एई योगेश मिश्रा को अपने साथ जमीन पर बैठा लिया और विभाग की कार्यप्रणाली पर जमकर सवाल दागे। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि दो जनवरी तक कचरे के ट्रकों और जहरीले धुएं पर रोक नहीं लगी तो बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मवाना रोड पर बहचौला से छोटा मवाना तक करीब 50 से अधिक फैक्टरियां संचालित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन फैक्टरिया में बाहर से मंगाया गया प्लास्टिक कचरा और आरडीएफ ईंधन के रूप में जलाया जा रहा है और इसमें प्रदूषण विभाग की भी मिलीभगत है। इसी के विरोध में सोमवार दोपहर आसपास के छह गांवों से करीब 100 से अधिक ग्रामीण सैनी गांव के फ्लाईओवर के नीचे इकट्ठा हुए। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एई योगेश मिश्रा भी पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें अपने साथ ही जमीन पर बैठा लिया। एडवोकेट दीपक चहल, मोहित मलिक और जगवीर सिंह ने कहा कि जहरीले धुएं से हवा और पानी दोनों प्रदूषित हो चुके हैं। फसलें राख से बरबाद हो रही हैं और क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन से नोकझोंक
बैठक के दौरान इंचौली थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार त्रिपाठी से ग्रामीणों की तीखी नोकझोंक हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाईवे पर खड़े फैक्टरियाें के बड़े कंटेनरों के कारण हादसे हो रहे हैं लेकिन पुलिस चालान नहीं करती। थाना प्रभारी ने कहा कि कार्रवाई की जा रही है और फैक्टरियाें को नोटिस भी दिए गए हैं। ग्रामीणों ने कोल्हूओं में जलाए जा रहे पॉलीथिन वेस्ट पर भी सवाल उठाए।
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2 जनवरी को निर्णायक बैठक
ग्रामीणों ने प्रदूषण विभाग को 2 जनवरी तक का समय दिया है। यदि प्लास्टिक कचरे के प्रयोग पर रोक नहीं लगी तो उसी दिन दोपहर में पंचायतघर में बैठक कर आगामी आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक के बाद ग्रामीणों ने नंगलाशेखू रोड स्थित पंचायत घर पर भी नारेबाजी की। बैठक में कपिल मालिक, अमित तेवतिया, ग्राम प्रधान प्रियंका रानी, मंजीत मलिक, रामगोपाल शर्मा, अनुज, आदेश राणा, सेंसरपाल, राजकुमार और जगजीत सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
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मवाना रोड पर बहचौला से छोटा मवाना तक करीब 50 से अधिक फैक्टरियां संचालित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन फैक्टरिया में बाहर से मंगाया गया प्लास्टिक कचरा और आरडीएफ ईंधन के रूप में जलाया जा रहा है और इसमें प्रदूषण विभाग की भी मिलीभगत है। इसी के विरोध में सोमवार दोपहर आसपास के छह गांवों से करीब 100 से अधिक ग्रामीण सैनी गांव के फ्लाईओवर के नीचे इकट्ठा हुए। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एई योगेश मिश्रा भी पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें अपने साथ ही जमीन पर बैठा लिया। एडवोकेट दीपक चहल, मोहित मलिक और जगवीर सिंह ने कहा कि जहरीले धुएं से हवा और पानी दोनों प्रदूषित हो चुके हैं। फसलें राख से बरबाद हो रही हैं और क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।
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पुलिस और प्रशासन से नोकझोंक
बैठक के दौरान इंचौली थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार त्रिपाठी से ग्रामीणों की तीखी नोकझोंक हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाईवे पर खड़े फैक्टरियाें के बड़े कंटेनरों के कारण हादसे हो रहे हैं लेकिन पुलिस चालान नहीं करती। थाना प्रभारी ने कहा कि कार्रवाई की जा रही है और फैक्टरियाें को नोटिस भी दिए गए हैं। ग्रामीणों ने कोल्हूओं में जलाए जा रहे पॉलीथिन वेस्ट पर भी सवाल उठाए।
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2 जनवरी को निर्णायक बैठक
ग्रामीणों ने प्रदूषण विभाग को 2 जनवरी तक का समय दिया है। यदि प्लास्टिक कचरे के प्रयोग पर रोक नहीं लगी तो उसी दिन दोपहर में पंचायतघर में बैठक कर आगामी आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक के बाद ग्रामीणों ने नंगलाशेखू रोड स्थित पंचायत घर पर भी नारेबाजी की। बैठक में कपिल मालिक, अमित तेवतिया, ग्राम प्रधान प्रियंका रानी, मंजीत मलिक, रामगोपाल शर्मा, अनुज, आदेश राणा, सेंसरपाल, राजकुमार और जगजीत सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।