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मुर्दा मवेशी न उठाने पर ग्रामीणों ने किया हंगामा
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मुर्दा मवेशी न उठाने पर ग्रामीणों ने किया हंगामा
जानीखुर्द। सिवालखास में मरे पशुओं को उठाने का ठेका नहीं छूटने के कारण ग्रामीणों को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नगर पंचायत शिकायत के बावजूद ग्रामीणों की इस समस्या से अंजान बनी हुई। ग्रामीणों ने इसे लेकर बुधवार को कस्बा सिवालखास में हंगामा किया।
कस्बा सिवालखास में इस वर्ष मानक के अनुसार बोली न लगने के कारण मुर्दा मवेशी का ठेका नहीं छूट पाया है। ग्रामीणों के अनुसार, नगर पंचायत ने कस्बे में मरने वाले पशुओं को उठाने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया है। ग्रामीणों को अपने मरे मवेशियों का निस्तारण स्वयं करना पड़ रहा है। इसके चलते कई दिनों तक मृत पशु ग्रामीणों के घरों में पड़े रहते हैं।
मंगलवार को कस्बा निवासी नसरत चौधरी और उम्मेद की भैंस मर गई। ग्रामीणों ने नगर पंचायत अध्यक्ष फुरकाना और ईओ शैलेंद्र कुमार को सूचना दी। लेकिन बुधवार दोपहर तक कोई भी मृत भैंसों को उठाने नहीं आया। जिस पर ग्रामीणों ने मौके पर काफी देर तक हंगामा किया। इसके बाद दोनों मृत भैंसों को जेसीबी से गड्डा खुदवाकर गंगनहर किनारे जंगल में दबा दिया।
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यह नगर पंचायत का काम
पूर्व चेयरमैन यूनुस के अनुसार नगर पंचायत का काम है कि वह ग्रामीणों के मरे मवेशियों को निस्तारण करे। मृत पशुओं को उठाने का ठेका न होने से पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। वह इस संबंध में जिलाधिकारी से मिलेंगे।
नगर पंचायत का काम नहीं
सिवाल खास के ईओ शैलेंद्र कुमार का कहना है कि इस वर्ष मुर्दा मवेशी का ठेका नहीं छूटा है। नगर पंचायत का मुर्दा मवेशी उठाने का काम नहीं है। ग्रामीण स्वयं ही अपने मृत पशु का निस्तारण करें।
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जानीखुर्द। सिवालखास में मरे पशुओं को उठाने का ठेका नहीं छूटने के कारण ग्रामीणों को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नगर पंचायत शिकायत के बावजूद ग्रामीणों की इस समस्या से अंजान बनी हुई। ग्रामीणों ने इसे लेकर बुधवार को कस्बा सिवालखास में हंगामा किया।
कस्बा सिवालखास में इस वर्ष मानक के अनुसार बोली न लगने के कारण मुर्दा मवेशी का ठेका नहीं छूट पाया है। ग्रामीणों के अनुसार, नगर पंचायत ने कस्बे में मरने वाले पशुओं को उठाने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया है। ग्रामीणों को अपने मरे मवेशियों का निस्तारण स्वयं करना पड़ रहा है। इसके चलते कई दिनों तक मृत पशु ग्रामीणों के घरों में पड़े रहते हैं।
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मंगलवार को कस्बा निवासी नसरत चौधरी और उम्मेद की भैंस मर गई। ग्रामीणों ने नगर पंचायत अध्यक्ष फुरकाना और ईओ शैलेंद्र कुमार को सूचना दी। लेकिन बुधवार दोपहर तक कोई भी मृत भैंसों को उठाने नहीं आया। जिस पर ग्रामीणों ने मौके पर काफी देर तक हंगामा किया। इसके बाद दोनों मृत भैंसों को जेसीबी से गड्डा खुदवाकर गंगनहर किनारे जंगल में दबा दिया।
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यह नगर पंचायत का काम
पूर्व चेयरमैन यूनुस के अनुसार नगर पंचायत का काम है कि वह ग्रामीणों के मरे मवेशियों को निस्तारण करे। मृत पशुओं को उठाने का ठेका न होने से पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। वह इस संबंध में जिलाधिकारी से मिलेंगे।
नगर पंचायत का काम नहीं
सिवाल खास के ईओ शैलेंद्र कुमार का कहना है कि इस वर्ष मुर्दा मवेशी का ठेका नहीं छूटा है। नगर पंचायत का मुर्दा मवेशी उठाने का काम नहीं है। ग्रामीण स्वयं ही अपने मृत पशु का निस्तारण करें।