{"_id":"68b5cf1e9349d81f6b0b6f79","slug":"various-aspects-of-mental-health-were-discussed-in-the-diet-experts-gave-tips-on-stress-management-mawana-news-c-40-1-smrt1041-109952-2025-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानसिक स्वास्थ्य के विविध आयामों पर डायट में हुआ मंथन, विशेषज्ञों ने दिए तनाव प्रबंधन के गुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानसिक स्वास्थ्य के विविध आयामों पर डायट में हुआ मंथन, विशेषज्ञों ने दिए तनाव प्रबंधन के गुर
विज्ञापन
डायट में आयोजित सेमिनार में प्रतिभाग करते प्रतिभागी। (स्त्रोत डायट) मवाना।
मवाना। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के सभागार में मानसिक स्वास्थ्य के विविध आयाम विषय पर सेमिनार का आयोजन हुआ। सेमिनार का उद्देश्य शिक्षकों, प्रशिक्षुओं और शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों के प्रति जागरूक करना और उनके समाधान के लिए प्रभावी रणनीतियों पर चर्चा करना था।
शुभारंभ मुख्य अतिथि मनोवैज्ञानिक एवं काउंसलर डाॅ. पूनम देवदत्त, डायट प्राचार्य मनोज कुमार आर्य, वरिष्ठ प्रवक्ता सलमान मैराज और अन्य सम्मानित वक्ताओं ने किया। प्राचार्य ने कहा कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण स्वस्थ मस्तिष्क से ही संभव है। आज के दौर में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. अंशु अग्रवाल ने खामोशी को तोड़ें, आत्महत्या के विचारों को समझें विषय पर मार्मिक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव, अकेलापन और निराशा जैसे लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. जितेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि शिक्षक बनने की प्रक्रिया में प्रशिक्षुओं को पाठ्यक्रम, शिक्षण अभ्यास और भविष्य की अनिश्चिंतताओं के कारण काफी तनाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आत्म-देखभाल, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. मोहिनी मित्तल ने प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रदर्शन की चिंता का मनोविज्ञान पर प्रकाश डाला। आईआईएमटी विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर नेहा राठी ने शिक्षक प्रशिक्षकों के लिए तनाव प्रबंधन विषय पर व्यावहारिक सत्र लिया। उन्होंने शिक्षकों को काम और निजी जीवन में संतुलन बनाने, अपनी हॉबी को समय देने और न कहना सीखने की कला पर जोर दिया।
विज्ञापन
शुभारंभ मुख्य अतिथि मनोवैज्ञानिक एवं काउंसलर डाॅ. पूनम देवदत्त, डायट प्राचार्य मनोज कुमार आर्य, वरिष्ठ प्रवक्ता सलमान मैराज और अन्य सम्मानित वक्ताओं ने किया। प्राचार्य ने कहा कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण स्वस्थ मस्तिष्क से ही संभव है। आज के दौर में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।
विज्ञापन
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. अंशु अग्रवाल ने खामोशी को तोड़ें, आत्महत्या के विचारों को समझें विषय पर मार्मिक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव, अकेलापन और निराशा जैसे लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. जितेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि शिक्षक बनने की प्रक्रिया में प्रशिक्षुओं को पाठ्यक्रम, शिक्षण अभ्यास और भविष्य की अनिश्चिंतताओं के कारण काफी तनाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आत्म-देखभाल, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. मोहिनी मित्तल ने प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रदर्शन की चिंता का मनोविज्ञान पर प्रकाश डाला। आईआईएमटी विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर नेहा राठी ने शिक्षक प्रशिक्षकों के लिए तनाव प्रबंधन विषय पर व्यावहारिक सत्र लिया। उन्होंने शिक्षकों को काम और निजी जीवन में संतुलन बनाने, अपनी हॉबी को समय देने और न कहना सीखने की कला पर जोर दिया।