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वाहन रोके तो धरने पर बैठ गए ट्रांसपोर्टर 

Tue, 02 Jan 2018 11:23 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 02 Jan 2018 11:23 AM IST
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vaahan rok dharne par baithe transporter
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

शहर में भारी वाहन रोकने के विरोध में सोमवार को ट्रांसपोर्टरों की बैठक हुई। जिसके बाद ट्रांसपोर्टरों ने दोपहर तक धरना दिया। इस दौरान ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल की भी चेतावनी दी। ट्रांसपोर्टरों ने एसपी ट्रैफिक और एसएसपी से फोन पर बात की। इसके बाद धरना खत्म कर दिया। मंगलवार दोपहर 12 बजे ट्रांसपोर्टर एसएसपी से मिलेंगे।

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ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, शहर में भारी वाहन मौत बनकर दौड़कर दौड़ते रहे हैं। कमिश्नरी आवास चौराहा, विवि रोड, मेडिकल कॉलेज गेट, तेजगढ़ी, पीवीएस रोड शास्त्रीनगर, एल ब्लॉक तिराहा, हापुड़ रोड के अलावा लालकुर्ती में मुख्य मार्ग और जीरो माइल पर भारी वाहनों से हादसे होते रहे हैं। शहर में सुबह सात बजे से रात दस बजे तक भारी वाहनों की नो एंट्री रहती है। नो एंट्री के समय भारी वाहन प्रतिबंधित हैं। एसपी ट्रैफिक ने 25 दिसंबर की सुबह से शहर में नो एंट्री लागू कराते भारी वाहनों को रोक दिया। पुलिस ने ट्रांसपोर्टरों के लिए शहर के शहर का रूट दे दिया। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन मेरठ के अध्यक्ष गौरव शर्मा के नेतृत्व में ट्रांसपोर्टरों ने एसएसपी से शिकायत की, जिसके बाद पुलिस अफसरों ने ट्रांसपोर्टरों के लिए टीपीनगर गेट तक छूट दे दी। लेकिन छूट के बाद टीपीनगर तक दोपहर एक से तीन बजे और शाम पांच से आठ बजे तक भारी वाहन प्रतिबंधित कर दिए।
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सोमवार सुबह ट्रांसपोर्टरों ने अपने ट्रक टीपीनगर में खड़े कर दिए। चाबी भी एकत्र कर लीं और कहा कि हम हड़ताल पर हैं। दिल्ली रोड पर बैनर लगाकर नारेबाजी कर धरने पर बैठ गए। गौरव शर्मा ने कहा कि उनकी मांग है कि शहर में दिन में भारी वाहनों को न रोका जाए। नो एंट्री को हटाया जाए। ट्रांसपोर्टर का उत्पीड़न हो रहा है। प्रवीन चिन्योटी, रमेश क पूर, दलबीर सिंह, कोहली, रंजन शर्मा, गगन शर्मा, प्रेम प्रकाश रावड़ा,अजयपाल सिंह, हरपाल शर्मा, सागर, पम्मी मौजूद रहे।
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ट्रांसपोर्टर यातायात व्यवस्था चौपट करना चाहते हैं
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई का कहना है कि नो एंट्री का मतलब ही दिन में भारी वाहनों का प्रतिबंध। वेस्ट यूपी के किसी भी जिले में दिन में भारी वाहन बीच शहर से नहीं निकलते। भारी वाहनों से जाम लगता है, एक साल में ट्रक 40 से ज्यादा लोगों की जान ले चुके हैं। ऐसे तो पूरे शहर की यातायात व्यवस्था चौपट हो जाएगी। ट्रांसपोर्टरों की मांग गलत है। ट्रांसपोर्टरों को ट्रैफिक पुलिस का सहयोग करना चाहिए। शहर के बाहर से दस किमी की दूरी बढ़ी है, लेकिन यातायात व्यवस्था भी सुधर गई। पूरा मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। जब से दिन में भारी वाहन रोके गये हैं एक दिन भी शहर में जाम नहीं लगा। यातायात व्यवस्था में सुधार होने से दो लाख लोगों से अधिक को राहत मिली है। ट्रांसपोर्टरों के लिए टीपीनगर तक छूट दी गई है। यातायात व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

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