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Meerut News: अस्पताल में नवजात की मौत पर हंगामा
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डॉक्टरों पर मृत बच्चे का ऑपरेशन करने और सच्चाई छिपाने का गंभीर आरोप
- पुलिस जांच में जुटी, बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
जानी खुर्द। थाना जानी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक प्राइवेट अस्पताल में एक नवजात बच्चे की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद पीड़ित परिवार ने डॉक्टरों पर लापरवाही, संवेदनहीनता और धोखाधड़ी के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पिता का आरोप है कि डॉक्टरों ने बच्चे की मौत हो जाने के बाद भी उसे जीवित बताकर उसका ऑपरेशन किया और व्हाट्सएप चैट के जरिए आपस में ही मौत का समय तय कर लिया। पीड़ित ने इस घटना की थाना जानी में नामजद डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए बुधवार को तहरीर दी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
बागपत जनपद के थाना रमाला अंतर्गत ग्राम इब्राहिमपुर माजरा निवासी विनीत कुमार तोमर पुत्र धनवीर सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी पत्नी अंशु ने 21 जून को बड़ौत के एक निजी हॉस्पिटल में बेटे को जन्म दिया था। जन्म के समय बच्चे की तबीयत खराब होने के कारण उसे वहां एनआईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया। जांच के बाद डॉक्टर ने बताया कि बच्चा सीडीएच बीमारी से ग्रसित है, जिसके लिए चाइल्ड सर्जरी स्पेशलिस्ट की आवश्यकता होगी। डॉक्टर की सलाह पर 22 जून की शाम को बच्चे को मेरठ बाइपास स्थित एक प्राइवेट अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में भर्ती कराया गया, जहां से उसे एनआईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया।
पीड़ित पिता का आरोप है कि 23 जून की सुबह करीब 9 बजे जब बच्चे को ऑपरेशन थिएटर ले जाया जा रहा था, तब उसकी त्वचा का रंग पूरी तरह नीला पड़ चुका था। विनीत ने मौके पर मौजूद डॉक्टर से आशंका जताई कि बच्चे की मृत्यु हो चुकी है। आरोप है कि डॉक्टरों ने इस बात को नकार दिया और बच्चे को जीवित बताते हुए सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक उसका ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद बच्चे को फिर से वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया और परिजनों को बताया गया कि ऑपरेशन सफल रहा है।
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तहरीर के अनुसार, दोपहर दो बजे के करीब जब पिता को बच्चे से मिलाया गया, तो वेंटिलेटर पर लगा मॉनिटर बंद था। शक होने पर जब उन्होंने डॉक्टर से बात की, तो डॉक्टर ने अपने फोन पर एक अन्य डाक्टर से हुई व्हाट्सएप रिपोर्टिंग चैट दिखाई। पीड़ित का दावा है कि जब उन्होंने चैट को ऊपर स्क्रॉल करके देखा, तो उसमें सुबह 11 बजे ही बच्चे की मृत्यु हो जाने की बात लिखी हुई थी।
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इस बारे में पूछा, तो डॉक्टर ने कहा कि सीनियर डॉक्टरों ने यह जानकारी परिजनों को देने से मना किया था और हिदायत दी थी कि यह बात किसी अन्य डॉक्टर को न बताएं।
बच्चे की मौत की भनक लगते ही पीड़ित पिता ने पुलिस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर मामले की शिकायत की। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। आरोप है कि पुलिस के आने के काफी देर बाद डॉक्टरों ने विनीत कुमार से हस्ताक्षर कराते हुए बताया कि बच्चे की मौत दोपहर तीन बजकर दस मिनट बजे हुई है और अभिलेखों में भी यही समय दर्ज किया गया, जबकि व्हाट्सएप चैट के अनुसार मौत सुबह ही हो चुकी थी।
सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने बताया कि पीड़ित की तरफ से तहरीर मिली है। शव का आज पोस्टमार्टम कराया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है। जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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- पुलिस जांच में जुटी, बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया
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संवाद न्यूज एजेंसी
जानी खुर्द। थाना जानी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक प्राइवेट अस्पताल में एक नवजात बच्चे की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद पीड़ित परिवार ने डॉक्टरों पर लापरवाही, संवेदनहीनता और धोखाधड़ी के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पिता का आरोप है कि डॉक्टरों ने बच्चे की मौत हो जाने के बाद भी उसे जीवित बताकर उसका ऑपरेशन किया और व्हाट्सएप चैट के जरिए आपस में ही मौत का समय तय कर लिया। पीड़ित ने इस घटना की थाना जानी में नामजद डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए बुधवार को तहरीर दी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
बागपत जनपद के थाना रमाला अंतर्गत ग्राम इब्राहिमपुर माजरा निवासी विनीत कुमार तोमर पुत्र धनवीर सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी पत्नी अंशु ने 21 जून को बड़ौत के एक निजी हॉस्पिटल में बेटे को जन्म दिया था। जन्म के समय बच्चे की तबीयत खराब होने के कारण उसे वहां एनआईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया। जांच के बाद डॉक्टर ने बताया कि बच्चा सीडीएच बीमारी से ग्रसित है, जिसके लिए चाइल्ड सर्जरी स्पेशलिस्ट की आवश्यकता होगी। डॉक्टर की सलाह पर 22 जून की शाम को बच्चे को मेरठ बाइपास स्थित एक प्राइवेट अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में भर्ती कराया गया, जहां से उसे एनआईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया।
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पीड़ित पिता का आरोप है कि 23 जून की सुबह करीब 9 बजे जब बच्चे को ऑपरेशन थिएटर ले जाया जा रहा था, तब उसकी त्वचा का रंग पूरी तरह नीला पड़ चुका था। विनीत ने मौके पर मौजूद डॉक्टर से आशंका जताई कि बच्चे की मृत्यु हो चुकी है। आरोप है कि डॉक्टरों ने इस बात को नकार दिया और बच्चे को जीवित बताते हुए सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक उसका ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद बच्चे को फिर से वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया और परिजनों को बताया गया कि ऑपरेशन सफल रहा है।
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तहरीर के अनुसार, दोपहर दो बजे के करीब जब पिता को बच्चे से मिलाया गया, तो वेंटिलेटर पर लगा मॉनिटर बंद था। शक होने पर जब उन्होंने डॉक्टर से बात की, तो डॉक्टर ने अपने फोन पर एक अन्य डाक्टर से हुई व्हाट्सएप रिपोर्टिंग चैट दिखाई। पीड़ित का दावा है कि जब उन्होंने चैट को ऊपर स्क्रॉल करके देखा, तो उसमें सुबह 11 बजे ही बच्चे की मृत्यु हो जाने की बात लिखी हुई थी।
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इस बारे में पूछा, तो डॉक्टर ने कहा कि सीनियर डॉक्टरों ने यह जानकारी परिजनों को देने से मना किया था और हिदायत दी थी कि यह बात किसी अन्य डॉक्टर को न बताएं।
बच्चे की मौत की भनक लगते ही पीड़ित पिता ने पुलिस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर मामले की शिकायत की। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। आरोप है कि पुलिस के आने के काफी देर बाद डॉक्टरों ने विनीत कुमार से हस्ताक्षर कराते हुए बताया कि बच्चे की मौत दोपहर तीन बजकर दस मिनट बजे हुई है और अभिलेखों में भी यही समय दर्ज किया गया, जबकि व्हाट्सएप चैट के अनुसार मौत सुबह ही हो चुकी थी।
सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने बताया कि पीड़ित की तरफ से तहरीर मिली है। शव का आज पोस्टमार्टम कराया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है। जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।