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नगर निगम मेरठ : पुनरीक्षित बजट बोर्ड बैठक में पार्षदों ने किया हंगामा, धक्कामुक्की
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हंगामे की भेंट चढ़ी पुनरीक्षित बजट बोर्ड बैठक, धक्कामुक्की
मेरठ। नगर निगम की पुनरीक्षित बजट बोर्ड बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। पार्षदों का हंगामा किसी अधिकारी या योजना के खिलाफ नहीं बल्कि एक अन्य पार्षद के खिलाफ रहा। हंगामे के चलते न तो शहर के विकास पर चर्चा हो पाई और न ही विकास के लिए बजट पर। बैठक के दौरान भाजपा पार्षदों और अन्य पार्षदों में जमकर धक्कामुक्की हुई। इस दौरान मारपीट तक की नौबत आई। भाजपा पार्षदों का गुट जहां वंदे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाते हुए पार्षद गफ्फार अहमद को सदन से बाहर करने या फिर माफी मंगवाने की मांग पर अड़ा रहा। वहीं अन्य गुट के पार्षद पुनरीक्षित बजट पास-पास का शोर मचाते रहे। अंतत: 40 मिनट में बैठक शुरू होकर स्थगित हो गई। अगली बैठक कब होगी अभी इसकी तिथि तय नहीं हुई है।
शनिवार को नगर निगम के 654 करोड़ के पुनरीक्षित बजट 2019-20 की बोर्ड बैठक टाउन हॉल के तिलक भवन में महापौर सुनीता वर्मा की अध्यक्षता और नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया के संचालन में सुबह 11.30 बजे शुरू हुई। बैठक में पुनरीक्षित बजट पर चर्चा होती इससे पहले ही पार्षद राजेश रोहेला ने पार्षद गफ्फार का सदन में बैठने का विरोध कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्षद ने अपनी जैकेट पर जो स्लोगन लिखा था, उससे 20 दिसंबर को शहर में उपद्रव हुआ। ऐसे पार्षद को सदन में बैठने का कोई अधिकार नहीं है। भाजपा पार्षदों ने कहा कि जब तक गफ्फार को सदन से बाहर नहीं भेजा जाएगा सदन की कार्यवाही शुरू नहीं होगी। भाजपा पार्षदों विपिन जिंदल, पंकज गोयल, विक्रांत ढाका, अंशुल गुप्ता, संदीप रेवड़ी, संजय सैनी, संदीप रेवड़ी, ललित नागदेव, नीरज सिंह, महेन्द्र भारती, विजय सोनकर ने पार्षद गफ्फार के खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। उधर पार्षद मोबीन खान, कासिम, शहजाद, हाजी सईद अंसारी,अकरम, अहसान अंसारी, आसिफ, दिलशाद, कयूम अंसारी, आस मोहम्मद, इकरामुद्दीन, जुबेर अहमद और बसपा पार्षद दल नेता धर्मवीर, सविता गुर्जर ने भी नारेबाजी करते हुए गफ्फार का समर्थन कर दिया। देखते ही देखते हंगामा खड़ा हो गया।
महापौर बजट पर चर्चा करने की करती रहीं अपील
हंगामे के बीच महापौर सुनीता वर्मा पार्षदों से शांति बनाए रखने और पुनरीक्षित बजट पर चर्चा करने की अपील करती रहीं, लेकिन पार्षदों ने एक नहीं सुनी। जहां भाजपा पार्षद पार्षद गफ्फार अहमद को सदन से बाहर करने या फिर माफी मंगवाने की मांग कर रहे थे, वहीं गफ्फार के समर्थन में खड़े हुए पार्षद माफी न मांगने देने की जिद पर अड़े रहे। इस बीच नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया हंगामा शांत करने के लिए पार्षदोें के बीच पहुंचे, लेकिन माहौल और गरमा गया। दोनों पक्ष धक्कामुक्की पर उतर आए। मारपीट तक की नौबत आ गई। अंतत: महापौर ने 15 मिनट के लिए बैठक को स्थगित कर दिया। हंगामे की सूचना पर सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला और सिटी मजिस्ट्रेट संजय पांडेय पुलिस बल लेकर सदन में पहुंच गए। और पार्षदों को समझाने का प्रयास किया।
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...और फिर अनिश्चितकाल के लिए बैठक हुई स्थगित
15 मिनट बाद जैसे ही महापौर व नगर आयुक्त ने दोबारा बैठक शुरू करने का ऐलान किया पार्षदों ने फिर से उसी मांग को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। इस दौरान महापौर ने एक बार फिर पुनरीक्षित बजट पर चर्चा करने की अपील की तो गफ्फार पक्ष के पार्षदों ने पुनरीक्षित बजट पास-पास बोलना शुरू कर दिया। हालांकि भाजपा पार्षद विपिन जिंदल ने कहा कि सदन में बिना चर्चा किए 654 करोड़ का प्रस्ताव पास नहीं किया जा सकता। जब काफी समझाने पर भी पार्षद शांत नहीं हुए तो महापौर ने बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का ऐलान कर दिया।
गो बैक सीएए लिखी टोपी पहनकर सदन में पहुंचे गफ्फार
पार्षद गफ्फार अहमद ने जहां 20 दिसंबर को ‘मैं आतंकवादी नहीं हूं’ लिखी जैकेट पहनी थी, वहीं शनिवा को आयोजित बैठक में भी वे गो बैक सीएए लिखी टोपी पहनकर सदन में पहुंच गए। हालांकि पार्षदों के विरोध के चलते उन्होंने अपनी टोपी को उल्टा पहन लिया। बैठक से बाहर आते ही उन्होंने टोपी को सीधा कर सीएए का विरोध किया।
मोबाइल की रोशनी में चली बैठक
बैठक के दौरान टाउन हॉल की लाइट चली गई थी। जेनरेटर चलने में दो से तीन मिनट का समय लग गया। तब तक पार्षदों ने अपने मोबाइलों की टार्च जलाकर सदन में रोशनी की।
नारेबाजी पर नाराज हुए अधिकारी
- नगर निगम की बोर्ड बैठक स्थगित होने के बाद पार्षद गफ्फार के समर्थकों ने तिलक भवन के बाहर आकर नारेबाजी शुरू की। जिसपर सीओ और सिटी मजिस्ट्रेट नाराज हो गए। दोनों अधिकारियों ने उनसे नारेबाजी न करने और शांति से साथ घर लौटने की नसीहत दी।
यह बैठक का मुद्दा नहीं था
पार्षद गफ्फार पर कुछ पार्षदों ने 20 दिसंबर को अपनी पीठ पर मैं आतंकवादी नहीं हूं, लिखकर घूमने के आरोप लगाए। इस विवाद का निगम की बोर्ड बैठक से कोई मतलब नहीं है। न ही यह मामला सदन में उठना चाहिए था। सदन में शहर के विकास को लेकर प्रस्तावों पर चर्चा होनी चाहिए। शहर की बेहतरी के लिए पार्षदों को पुनरीक्षित बजट पास करना चाहिए था। स्थगित बैठक दोबारा बुलाने के लिए अभी तिथि निर्धारित नहीं की है। - सुनीता वर्मा, महापौर।
शहर के विकास पर गंभीर हों पार्षद
अगली पुनरीक्षित बजट बोर्ड बैठक के लिए महापौर तिथि निर्धारित करेंगी। पार्षदों को कम से कम बजट पर तो गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह शहर के विकास का मामला है। - डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, नगरायुक्त।
मैंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया
संविधान में देश के प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने का अधिकार है। मैंने भी वही किया है। कुछ लोग इसको राजनीतिक रंग दे रहे हैं। सभी को शहर की शांति और देश की तरक्की के लिए काम करना चाहिए। - गफ्फार अहमद, पार्षद।
माफी मांगे पार्षद गफ्फार
देश के खिलाफ कोई भी प्रतिक्रिया बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पार्षद गफ्फार को माफी मांगनी चाहिए। अगर जनप्रतिनिधि ऐसी हरकत करते हैं तो देश का माहौल खराब होता है। गफ्फार अहमद ने ऐसा करके भीड़ को भड़काने का काम किया है। - विपिन जिंदल, दल नेता भाजपा।
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मेरठ। नगर निगम की पुनरीक्षित बजट बोर्ड बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। पार्षदों का हंगामा किसी अधिकारी या योजना के खिलाफ नहीं बल्कि एक अन्य पार्षद के खिलाफ रहा। हंगामे के चलते न तो शहर के विकास पर चर्चा हो पाई और न ही विकास के लिए बजट पर। बैठक के दौरान भाजपा पार्षदों और अन्य पार्षदों में जमकर धक्कामुक्की हुई। इस दौरान मारपीट तक की नौबत आई। भाजपा पार्षदों का गुट जहां वंदे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाते हुए पार्षद गफ्फार अहमद को सदन से बाहर करने या फिर माफी मंगवाने की मांग पर अड़ा रहा। वहीं अन्य गुट के पार्षद पुनरीक्षित बजट पास-पास का शोर मचाते रहे। अंतत: 40 मिनट में बैठक शुरू होकर स्थगित हो गई। अगली बैठक कब होगी अभी इसकी तिथि तय नहीं हुई है।
शनिवार को नगर निगम के 654 करोड़ के पुनरीक्षित बजट 2019-20 की बोर्ड बैठक टाउन हॉल के तिलक भवन में महापौर सुनीता वर्मा की अध्यक्षता और नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया के संचालन में सुबह 11.30 बजे शुरू हुई। बैठक में पुनरीक्षित बजट पर चर्चा होती इससे पहले ही पार्षद राजेश रोहेला ने पार्षद गफ्फार का सदन में बैठने का विरोध कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्षद ने अपनी जैकेट पर जो स्लोगन लिखा था, उससे 20 दिसंबर को शहर में उपद्रव हुआ। ऐसे पार्षद को सदन में बैठने का कोई अधिकार नहीं है। भाजपा पार्षदों ने कहा कि जब तक गफ्फार को सदन से बाहर नहीं भेजा जाएगा सदन की कार्यवाही शुरू नहीं होगी। भाजपा पार्षदों विपिन जिंदल, पंकज गोयल, विक्रांत ढाका, अंशुल गुप्ता, संदीप रेवड़ी, संजय सैनी, संदीप रेवड़ी, ललित नागदेव, नीरज सिंह, महेन्द्र भारती, विजय सोनकर ने पार्षद गफ्फार के खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। उधर पार्षद मोबीन खान, कासिम, शहजाद, हाजी सईद अंसारी,अकरम, अहसान अंसारी, आसिफ, दिलशाद, कयूम अंसारी, आस मोहम्मद, इकरामुद्दीन, जुबेर अहमद और बसपा पार्षद दल नेता धर्मवीर, सविता गुर्जर ने भी नारेबाजी करते हुए गफ्फार का समर्थन कर दिया। देखते ही देखते हंगामा खड़ा हो गया।
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महापौर बजट पर चर्चा करने की करती रहीं अपील
हंगामे के बीच महापौर सुनीता वर्मा पार्षदों से शांति बनाए रखने और पुनरीक्षित बजट पर चर्चा करने की अपील करती रहीं, लेकिन पार्षदों ने एक नहीं सुनी। जहां भाजपा पार्षद पार्षद गफ्फार अहमद को सदन से बाहर करने या फिर माफी मंगवाने की मांग कर रहे थे, वहीं गफ्फार के समर्थन में खड़े हुए पार्षद माफी न मांगने देने की जिद पर अड़े रहे। इस बीच नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया हंगामा शांत करने के लिए पार्षदोें के बीच पहुंचे, लेकिन माहौल और गरमा गया। दोनों पक्ष धक्कामुक्की पर उतर आए। मारपीट तक की नौबत आ गई। अंतत: महापौर ने 15 मिनट के लिए बैठक को स्थगित कर दिया। हंगामे की सूचना पर सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला और सिटी मजिस्ट्रेट संजय पांडेय पुलिस बल लेकर सदन में पहुंच गए। और पार्षदों को समझाने का प्रयास किया।
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15 मिनट बाद जैसे ही महापौर व नगर आयुक्त ने दोबारा बैठक शुरू करने का ऐलान किया पार्षदों ने फिर से उसी मांग को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। इस दौरान महापौर ने एक बार फिर पुनरीक्षित बजट पर चर्चा करने की अपील की तो गफ्फार पक्ष के पार्षदों ने पुनरीक्षित बजट पास-पास बोलना शुरू कर दिया। हालांकि भाजपा पार्षद विपिन जिंदल ने कहा कि सदन में बिना चर्चा किए 654 करोड़ का प्रस्ताव पास नहीं किया जा सकता। जब काफी समझाने पर भी पार्षद शांत नहीं हुए तो महापौर ने बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का ऐलान कर दिया।
गो बैक सीएए लिखी टोपी पहनकर सदन में पहुंचे गफ्फार
पार्षद गफ्फार अहमद ने जहां 20 दिसंबर को ‘मैं आतंकवादी नहीं हूं’ लिखी जैकेट पहनी थी, वहीं शनिवा को आयोजित बैठक में भी वे गो बैक सीएए लिखी टोपी पहनकर सदन में पहुंच गए। हालांकि पार्षदों के विरोध के चलते उन्होंने अपनी टोपी को उल्टा पहन लिया। बैठक से बाहर आते ही उन्होंने टोपी को सीधा कर सीएए का विरोध किया।
मोबाइल की रोशनी में चली बैठक
बैठक के दौरान टाउन हॉल की लाइट चली गई थी। जेनरेटर चलने में दो से तीन मिनट का समय लग गया। तब तक पार्षदों ने अपने मोबाइलों की टार्च जलाकर सदन में रोशनी की।
नारेबाजी पर नाराज हुए अधिकारी
- नगर निगम की बोर्ड बैठक स्थगित होने के बाद पार्षद गफ्फार के समर्थकों ने तिलक भवन के बाहर आकर नारेबाजी शुरू की। जिसपर सीओ और सिटी मजिस्ट्रेट नाराज हो गए। दोनों अधिकारियों ने उनसे नारेबाजी न करने और शांति से साथ घर लौटने की नसीहत दी।
यह बैठक का मुद्दा नहीं था
पार्षद गफ्फार पर कुछ पार्षदों ने 20 दिसंबर को अपनी पीठ पर मैं आतंकवादी नहीं हूं, लिखकर घूमने के आरोप लगाए। इस विवाद का निगम की बोर्ड बैठक से कोई मतलब नहीं है। न ही यह मामला सदन में उठना चाहिए था। सदन में शहर के विकास को लेकर प्रस्तावों पर चर्चा होनी चाहिए। शहर की बेहतरी के लिए पार्षदों को पुनरीक्षित बजट पास करना चाहिए था। स्थगित बैठक दोबारा बुलाने के लिए अभी तिथि निर्धारित नहीं की है। - सुनीता वर्मा, महापौर।
शहर के विकास पर गंभीर हों पार्षद
अगली पुनरीक्षित बजट बोर्ड बैठक के लिए महापौर तिथि निर्धारित करेंगी। पार्षदों को कम से कम बजट पर तो गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह शहर के विकास का मामला है। - डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, नगरायुक्त।
मैंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया
संविधान में देश के प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने का अधिकार है। मैंने भी वही किया है। कुछ लोग इसको राजनीतिक रंग दे रहे हैं। सभी को शहर की शांति और देश की तरक्की के लिए काम करना चाहिए। - गफ्फार अहमद, पार्षद।
माफी मांगे पार्षद गफ्फार
देश के खिलाफ कोई भी प्रतिक्रिया बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पार्षद गफ्फार को माफी मांगनी चाहिए। अगर जनप्रतिनिधि ऐसी हरकत करते हैं तो देश का माहौल खराब होता है। गफ्फार अहमद ने ऐसा करके भीड़ को भड़काने का काम किया है। - विपिन जिंदल, दल नेता भाजपा।