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यूपी-यूके न्यूरोकॉल का आगाज
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मेरठ। शोध हमारी बहुत बड़ी कमजोरी है। शायद यही वजह है कि आज भी पूर्णत्या पाश्चात्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह चिकित्सका क्षेत्र के लिए अच्छा नहीं है। वर्तमान में भोगोलिक स्थिति बदली है। इसलिए शोध पर तेजी से काम होना चाहिए। यह बात एनएसआई (न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष डॉ. लोकेंद्र सिंह ने कही। वह यहां मेरठ न्यूरो क्लब के बैनर तले 21 फरवरी से 23 फरवरी तक चलने वाले यूपी-यूके न्यूरोकॉन के 26वें सेमिनार में बोल रहे थे। आयोजन मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में हुआ। उन्होंने कहा कि भले ही सुपर स्पेशियलिटी की बात की जाए, लेकिन हकीकत यह भी है कि आज भी सीखने की बहुत जरूरत है।
आयोजन सचिव डॉ. संजय शर्मा ने देश के अलग-अलग स्थानों से आए प्रख्यात चिकित्सकों का स्वागत किया। मेरठ न्यूरो क्लब के अध्यक्ष डॉ. अखिल प्रकाश ने संस्था के इतिहास पर प्रकाश डाला। एलएलआरएम कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने कहा कि एक समय था जब सुपर स्पेशियलिटी का कॉन्सेप्ट बेहद कठिन था, लेकिन इस पर काम किया गया। वर्तमान में सुपर स्पेशलिटी के बिना टिके रहना संभव नहीं। अगर कोई जनरल मेडिसिन व सर्जन लेकर घूमेगा तो वह घूमता रहेगा। यहां हर चिकित्सक को अपनी एक अलग पहचान बनानी होगी। विशिष्ठ अतिथि रहे डॉ.आरसी मिश्रा ने कहा कि वह भी समय था, जब न्यूरोसाइंस के नाम पर केवल लखनऊ चर्चित था। एसजीपीजीआई भी बाद में एक्टिव हुआ। न्यूरोसाइंस को लखनऊ से बाहर लाना बेहद बड़ी जिम्मेदारी थी। तब संघर्ष शुरू हुआ जो आज तक जारी है। डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने कहा कि जब इस इमारत की नींव रखी गई थी तो यही कहा गया था कि अगर कोई बड़े आयोजन का खर्च वहन करने में असमर्थ हो तो वह न करे। भले ही एक छोटे इंस्टीट्यूट में कार्यक्रम किया जाए, लेकिन यह होना चाहिए। इस अवसर पर अतिथियों को शॉल ओढ़ा व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार, डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. विनोद अरोड़ा, डॉ. भूपेंद्र चौधरी, डॉ. गिरीश त्यागी, डॉ. आलोक गुप्ता, डॉ. अरुण शर्मा, डॉ. रोहित काम्बोज, डॉ. संदीप सहगल, डॉ. एलएल वाजपेयी, डॉ. संजय बिहारी, डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव, डॉ. एके सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भावना तोमर ने किया।
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आयोजन सचिव डॉ. संजय शर्मा ने देश के अलग-अलग स्थानों से आए प्रख्यात चिकित्सकों का स्वागत किया। मेरठ न्यूरो क्लब के अध्यक्ष डॉ. अखिल प्रकाश ने संस्था के इतिहास पर प्रकाश डाला। एलएलआरएम कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने कहा कि एक समय था जब सुपर स्पेशियलिटी का कॉन्सेप्ट बेहद कठिन था, लेकिन इस पर काम किया गया। वर्तमान में सुपर स्पेशलिटी के बिना टिके रहना संभव नहीं। अगर कोई जनरल मेडिसिन व सर्जन लेकर घूमेगा तो वह घूमता रहेगा। यहां हर चिकित्सक को अपनी एक अलग पहचान बनानी होगी। विशिष्ठ अतिथि रहे डॉ.आरसी मिश्रा ने कहा कि वह भी समय था, जब न्यूरोसाइंस के नाम पर केवल लखनऊ चर्चित था। एसजीपीजीआई भी बाद में एक्टिव हुआ। न्यूरोसाइंस को लखनऊ से बाहर लाना बेहद बड़ी जिम्मेदारी थी। तब संघर्ष शुरू हुआ जो आज तक जारी है। डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने कहा कि जब इस इमारत की नींव रखी गई थी तो यही कहा गया था कि अगर कोई बड़े आयोजन का खर्च वहन करने में असमर्थ हो तो वह न करे। भले ही एक छोटे इंस्टीट्यूट में कार्यक्रम किया जाए, लेकिन यह होना चाहिए। इस अवसर पर अतिथियों को शॉल ओढ़ा व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार, डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. विनोद अरोड़ा, डॉ. भूपेंद्र चौधरी, डॉ. गिरीश त्यागी, डॉ. आलोक गुप्ता, डॉ. अरुण शर्मा, डॉ. रोहित काम्बोज, डॉ. संदीप सहगल, डॉ. एलएल वाजपेयी, डॉ. संजय बिहारी, डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव, डॉ. एके सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भावना तोमर ने किया।
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