यूपी : मेडिकल अस्पताल में दवाओं का स्टॉक खत्म, ये रही वजह
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मेरठ के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अधिकांश दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है। यहां करीब 536 तरह की दवाइयां रहती हैं। लेकिन अब महज 125 प्रकार की दवाइयां ही बची हैं। कारण, ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू होने से नई आपूर्ति नहीं हो रही है। नतीजतन, मरीज परेशान हो रहे हैं। कई बार मारपीट की भी नौबत आ चुकी है। शासन से मांग की गई है कि बिना ई-टेंडरिंग व्यवस्था के भी कुछ दवाइयां खरीदी जा सकें, ताकि इस संकट से निजात मिल सके।
अस्पताल की स्थिति
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना करीब तीन हजार मरीज आते हैं। रविवार और छुट्टियां आदि पड़ने के कारण साल में यह संख्या औसतन रोजाना 1800-1900 पहुंच जाती है और माह में 50-60 हजार से भी ज्यादा। यहां मेरठ जिले के अलावा आसपास के जिलों के भी मरीज आते हैं। पिछले साल मेडिकल कॉलेज में 6 लाख 87 हजार 561 मरीजों को बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में देखा गया। इस लिहाज से देखें तो यहां पिछले साल रोजाना करीब 1883 मरीज आए और हर माह 56 हजार 490 मरीज। 28832 रोगी भर्ती किए गए। इसके अलावा 17989 बड़े व छोटे ऑपरेशन किए गए।
दवाओं के हालात
दवाओं की किल्लत के कारण अब ये मरीज परेशान हैं। या तो उन्हें आधी अधूरी दवाइयां लेकर जाना पड़ रहा है, या फिर उन्हें बाहर से दवाइयां लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसके गर्ग ने बताया कि औषधियों का ई-टेंडर होने के बाद आपूर्ति होने में समय लगेगा। वर्तमान में कॉलेज स्तर पर दवाओं का स्टॉक समाप्त हो चुका है। लेकिन जल्द ही इस समस्या को सुलझा लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि औषधि मद में उपलब्ध कुल बजट के 20 प्रतिशत की धनराशि को ई-टेंडर की सीमा से अलग करते हुए पीजीआई लखनऊ की व्यवस्था के आधार पर औषधियों के क्रय किए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस पर मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है, ताकि मरीजों को समय से औषधि उपलब्ध कराने में परेशानी न हो।
बजट हुआ 15 करोड़
मेडिकल कॉलेज का बजट सरकार ने नौ करोड़ से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये कर दिया है। इसकी लंबे समय से मांग की जा रही थी। लेकिन दवाओं के लिए जेम पोर्टल, ई-टेंडरिंग की व्यवस्था होने से दवाइयां समय से उपलब्ध होने में दिक्कत हो रही है।
यूजर चार्ज की होगी एक खिड़की
मेडिकल कॉलेज में अब यूजर चार्ज की एक खिड़की होगी। अभी तक ब्लड बैंक, पर्चा काउंटर, एक्सरे आदि के लिए अलग-अलग जगह मरीजों को जाना पड़ता है और यूजर चार्ज देना पड़ता है। लेकिन मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए और यूजर चार्ज को लेकर लगने वाले आरोपों के मद्देनजर यह कदम उठाया जा रहा है। हालांकि दूसरी तरफ, मेडिकल के कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि इससे अव्यवस्था भी फैल सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में मरीज एक ही जगह आएंगे तो उन्हें संभावना मुश्किल हो सकता है। इस संबंध में प्राचार्य ने बताया कि एक सप्ताह में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। इसके लिए एक कार्यालय तैयार किया जा रहा है।
एक करोड़ का ऑर्डर भेजा
प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. एसके गर्ग ने बताया कि एक करोड़ रुपये की जेनेरिक दवाइयां मंगाने के लिए ऑर्डर भेज दिया गया है। ई-टेंडरिंग व्यवस्था भी की जा रही है। फरवरी माह के अंत तक दवाओं की समस्या को काफी हद तक सुलझा लिया जाएगा।
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