फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   UP Baghpat Village Worships Ravana, Skips Effigy Burning on Dussehra

यूपी के इस गांव की रावण से है पहचान: दशहरे पर नहीं होता दहन; मां मनसा देवी मंदिर से भी जुड़ी है अनूठी मान्यता

Tue, 20 Oct 2026 02:59 PM IST
Sharukh Khan अवनीश देवपुत्र, अमर उजाला, बागपत
अवनीश देवपुत्र, अमर उजाला, बागपत Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 20 Oct 2026 02:59 PM IST
सार

यूपी के बागपत जिले के एक गांव की रावण से पहचान है। यहां दशहरे पर रावण का दहन नहीं होता। बड़ागांव में दशहरे पर लंकापति का पुतला नहीं जलता है। मां मनसा देवी मंदिर से भी अनूठी मान्यता जुड़ी है।

विज्ञापन
UP Baghpat Village Worships Ravana, Skips Effigy Burning on Dussehra
UP Baghpat Village - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देशभर में जहां दशहरे पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है, वहीं बागपत के बड़ागांव में परंपरा अलग है। यहां दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता, बल्कि ग्रामीण लंकापति रावण को पूजनीय मानते हैं। गांव की पहचान भी इसी मान्यता से जुड़ी है।
विज्ञापन


गांव का नाम रावण उर्फ बड़ागांव है। गांव में स्थित प्राचीन मां मनसा देवी मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां कई देशों से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। मंदिर पर कुछ समय पहले नेपाल के सांसद भी दर्शन करने पहुंचे थे।
विज्ञापन


बड़ागांव निवासी मास्टर देवेंद्र कुमार बताते हैं कि गांव में रावण का पुतला दहन नहीं करने की परंपरा उनके बुजुर्गों के समय से चली आ रही है। ग्रामीण रावण को पूजनीय मानते हैं। यही वजह है कि दशहरे पर देश के दूसरे हिस्सों की तरह यहां रावण दहन नहीं होता। गांव की यह परंपरा इसे अलग पहचान देती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

अब रावण कुंड बनाने की तैयारी
गांव की धार्मिक पहचान को और विस्तार देने के लिए अब रावण कुंड बनाने की योजना तैयार की जा रही है। एडवोकेट सुनील कुमार के मुताबिक, इसके लिए सरकार और मंदिर समिति के सदस्यों ने मिलकर योजना बनाई है। प्रस्तावित रावण कुंड के निर्माण से इस स्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
 

रावण और मां मनसा देवी से जुड़ी मान्यता
एडवोकेट सुनील कुमार के अनुसार, बुजुर्गों से चली आ रही मान्यता के मुताबिक, प्राचीन समय में रावण हिमालय से पूजा-अर्चना के बाद मां मनसा देवी की मूर्ति लेकर लौट रहे थे। रास्ते में लघुशंका के लिए रुकने पर उन्होंने मूर्ति कुछ समय के लिए एक व्यक्ति को सौंप दी। 

 

मान्यता है कि वह व्यक्ति मूर्ति का भार सहन नहीं कर सका और उसे वहीं रख दिया। इसके बाद मां मनसा देवी की मूर्ति उसी स्थान पर स्थापित हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, सेठ सलेकी चंद जैन ने सबसे पहले यहां मंदिर भवन का निर्माण कराया था। समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया।

 

सौ साल पुराने वट वृक्ष पर बांधते हैं कलावा
मां मनसा देवी मंदिर परिसर में करीब सौ साल पुराना वट वृक्ष भी है। श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कलावा बांधते हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष एडवोकेट नीरज त्यागी बताते हैं कि श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के चलते मंदिर की विशेष पहचान है। नवरात्र में यहां वर्ष में दो बार मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed