{"_id":"6a4a1cfec8978bdbc90c3832","slug":"up-revenue-official-sentenced-to-six-years-for-10-000-bribe-had-manipulated-land-meant-for-compensation-2026-07-05","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: 10 हजार की रिश्वत के चक्कर में लेखपाल को छह साल की सजा, मुआवजे की जमीन के कागजों में किया था खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: 10 हजार की रिश्वत के चक्कर में लेखपाल को छह साल की सजा, मुआवजे की जमीन के कागजों में किया था खेल
Sun, 05 Jul 2026 02:29 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Mohd Mustakim
Updated Sun, 05 Jul 2026 02:29 PM IST
सार
Meerut News: सहारनपुर जिले के इखलाक ने लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संगठन पुलिस मेरठ में शिकायत दर्ज कराई थी। लेखपाल को रंगेहाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था।
विज्ञापन
judge court हथोड़ा
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ अजय कुमार प्रथम ने लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता को रिश्वत लेने के आरोप में दोषी ठहराया है। लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता को छह वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। वह सहारनपुर के शंकरपुरी का निवासी है।
विज्ञापन
यह मामला 5 अगस्त 2016 को शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता सहारनपुर के नकुड़ थाना क्षेत्र के गांव जगोता निवासी इखलाक ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन पुलिस मेरठ में शिकायत दर्ज कराई थी। इखलाक की जमीन राजमार्ग चौड़ीकरण के लिए अधिगृहीत की गई थी। लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता ने उसकी कम जमीन का मुआवजा दिलवाने की रिपोर्ट दी थी। इखलाक अपनी तीन बीघा कृषि भूमि का मुआवजा चाहता था। लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट लगाने के लिए दस हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की टीम ने उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकारी वकील ने इस मामले में आठ गवाह पेश किए। आरोपी के अधिवक्ता ने उसे झूठा फंसाने का दावा किया था। सरकारी वकील ने इस दावे का कड़ा विरोध किया। शनिवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लेखपाल को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
विवाहिता की हत्या में पति सहित पांच को आजीवन कारावास
सहारनपुर में विवाहिता की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक की अदालत ने पति सहित उसके परिवार के पांच लोगों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा एक आरोपी को दोष मुक्त किया है। अदालत ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
सहारनपुर में विवाहिता की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक की अदालत ने पति सहित उसके परिवार के पांच लोगों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा एक आरोपी को दोष मुक्त किया है। अदालत ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
सहारनपुर जिले के चकहरेटी गांव निवासी सुशील कुमार ने 23 मार्च 20218 को सरसावा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसकी बेटी सपना की शादी एक जुलाई 2009 को बीदपुर गांव निवासी प्रवीण कुमार के साथ हुई थी। प्रवीण ने 23 मार्च 2018 को उन्हें फोन पर सूचना दी कि सपना की तबीयत अचानक खराब हो गई है। उसे अस्पताल लेकर जा रहे हैं। सूचना के बाद वह भी परिजनों के साथ अस्पताल पहुंचे।
इसके बाद उन्हें जानकारी दी गई कि सपना की मौत हो गई है। वहीं, सपना की बेटी ने बताया कि मम्मी की मौत रस्सी पर लटकाने से हुई है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने पति प्रवीण, भाई गुलाब सिंह व उसकी पत्नी राकेश और चाचा चंद्रभान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में अन्य नाम भी सामने आए। तभी से मामला अदालत में विचाराधीन था।
सात वर्ष तीन माह में आया फैसला
विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक की अदालत में विचाराधीन रही। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि सपना की गला दबाकर हत्या की गई और बाद में उसके शव को चुन्नी व रस्सी के सहारे कमरे की कुंडी से लटकाकर आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया। अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद पति प्रवीण, उसके भाई गुलाब, भाभी राकेश के अलावा अजय और जितेंद्र को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने एक आरोपी चंद्रभान को दोष मुक्त किया है। अदालत ने सात वर्ष तीन माह में फैसला सुनाया है।
विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक की अदालत में विचाराधीन रही। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि सपना की गला दबाकर हत्या की गई और बाद में उसके शव को चुन्नी व रस्सी के सहारे कमरे की कुंडी से लटकाकर आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया। अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद पति प्रवीण, उसके भाई गुलाब, भाभी राकेश के अलावा अजय और जितेंद्र को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने एक आरोपी चंद्रभान को दोष मुक्त किया है। अदालत ने सात वर्ष तीन माह में फैसला सुनाया है।