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हथियार तस्करों के आकाओं को पकड़ने में यूपी पुलिस नाकाम, यहां खूब बिक रहा 'मौत' का सामान

Thu, 11 Oct 2018 01:55 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 11 Oct 2018 01:55 PM IST
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UP police not arrested of Gangsters accused and selling of pistol in meerut
फाइल फोटो

हत्या, लूट, डकैती जैसे अपराध आखिर मेरठ में कैसे रुकें। जब अवैध हथियार खूब बिक रहे हैं। इस नेटवर्क को तोड़ने में पुलिस पूरी तरह से फेल नजर आ रही है। हथियारों की सप्लाई इतनी है कि छोटे-मोटे बदमाश भी जरा सी घटना होने पर पिस्टल, तमंचे से गोलियां बरसा रहे हैं। लेकिन पुलिस के हाथ हथियार तस्करों के उन आकाओं की गर्दन तक पहुंचने में छोटे पड़ गए हैं, जो मौत के सामान का सौदा कर रहे हैं। हथियारों की फैक्ट्री में खादी और खाकी दोनों पर सवाल उठते रहे हैं।

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सारा अपराध अवैध हथियार से 
हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी या फिर किसी भी आपराधिक वारदात को देखा जाए तो हर घटना में अवैध हथियार का ही इस्तेमाल हो रहा है। अवैध हथियार रखना मानो फैशन बन गया हो। लिसाड़ी गेट में बेखौफ बदमाश डकैती के बाद कैसे दिनदहाडे़ दुस्साहस दिखाते रहे, इसको सैकड़ों लोगों और पुलिस ने देखा। उनके पास अवैध हथियार ही थे। परतापुर के सोहरका में मां-बेटे की सरेआम गोलियां बरसाकर हत्या, खरखौदा में किसान दंपति की हत्या या कोई भी आपराधिक घटना देख लें। सब में अवैध हथियारों से ही खून बहाया गया।
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पुलिस को भनक नहीं लगी 
दिल्ली पुलिस लिसाड़ी गेट में छापा मारकर मुंगेर के तीन कारीगरों को पकड़कर ले गई। 84 पिस्टल व अधबने हथियार भारी मात्रा में बरामद कर लिए। कारीगरों ने बताया कि कई महीने से हथियार बनाकर सप्लाई कराए जा रहे थे। सवाल पुलिस की कार्यशैली पर है। आखिर पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। कितने हथियारों की खेप मेरठ से बनकर गई होगी, इसका अंदाजा शायद पुलिस को नहीं है। 
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कारीगर पकड़ते, सरगना नहीं 
मेरठ पुलिस ने सरधना, सरूरपुर, मवाना, किठौर, लिसाड़ीगेट, कोतवाली समेत कई जगह से तमंचे बनाने की फैक्ट्रियां पकड़ी हैं। अवैध हथियार और अधबने हथियारों की खेप पुलिस बरामद भी कर चुकी है। लेकिन पुलिस सिर्फ फैक्ट्री से कारीगरों को गिरफ्तार कर पाई। लेकिन एक भी सरगना मेरठ पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। सरगना फिर फैक्ट्री तैयार कराकर हथियार बनाने का धंधा चालू कर देता है।

फुरकान का बड़ा नेटवर्क
दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया कि मेरठ में फुरकान हथियारों का बड़ा सप्लायर हैं। यह कारीगरों को बुलाकर अवैध हथियार की खेप तैयार कराता है। किठौर के राधना गांव के पांच युवकों का नाम भी सामने आया है, जो हथियार सप्लाई कराते है। पुलिस सरगना तक नहीं पहुंची है।

गोलियां कहां से आ रहीं 
अवैध हथियारों में गोलियां कहां से आ रही हैं, यह सवाल बड़ा है। पुलिस की मानें तो गोलियां बनाने वाले गैंग अलग हैं। चर्चा है कि अवैध हथियारों में होने वाली अधिकांश गोलियां सरकारी या फिर लाइसेंस हथियारों को मिलने वाले गोली बेची जाती है। जिससे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। 

थानेदार नजर रखें
अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्रियां पकड़ी जा रही हैं। थानेदारों को निर्देश दिए हैं कि अपने अपने क्षेत्र में नजर रखें कि कहीं हथियार तो नहीं बन रहे। घटनाएं भी अवैध हथियारों से हो रही हैं। हस्तिनापुर में तमंचे की फैक्ट्री पकड़ी है। - अखिलेश कुमार, एसएसपी

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