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ऑडियो वायरल: आत्महत्या से पहले दरोगा कुलदीप ने सिसक-सिसक कर कहा कुछ ऐसा कि सिहर जाएगा मन

Tue, 05 Feb 2019 02:51 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 05 Feb 2019 02:51 PM IST
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up police Daroga kuldeep reacorded a audio Before suicidal Audio Viral in meerut
पत्नी और बच्चे के साथ कुलदीप सिंह और साइड में साथियों के साथ सेल्फी लेते कुलदीप - फोटो : अमर उजाला

कवि का दिल, बदन पर वर्दी और सिस्टम की बदहाली से घुटती जिंदगी। मरने से पहले 8ः06 सेकेंड का ऑडियो रिकॉर्डिंग बयान,जिसमें कुलदीप ने बयां किया अपना दर्द। वो रो-रोकर सिस्टम की खामियों पर चोट करता है। कविता के जरिये, रिकॉर्डिंग में जो कुछ भी कहा, उसे सुनकर सिहरन पैदा हो जाती है। 

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मामला श्रद्धापुरी कंकरखेड़ा निवासी देवबंद कोतवाली के दरोगा कुलदीप सिंह द्वारा आत्महत्या करने का है। 31 जनवरी की सुबह दरोगा कुलदीप सिंह ने दो ऑडियो सीओ देवबंद और अपने परिजनों को भेजे थे। उनमें एक बयान हिंदी में तो दूसरा अंग्रेजी में। हिंदी में रिकॉर्डिंग बयान की शुरुआत कुलदीप ने परिवार को संबोधित करते हुए की। मेरे बच्चों ये कायरता का निर्णय है, मुझे कायर कह लियो या कुछ भी कह लियो, मगर मैंने बहुत मेहनत की है इस नौकरी को पाने में। पर अब मैं टूट गया हूं। 

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फिर कुलदीप कविता बोलता है... ‘आस लगाई जिनसे हमने, उन्हीं ने रुसवा किया, प्यार के नाम पर महफिल में रुसवा किया, चांद सितारों की ख्वाहिश थी नसीब में कांटे ही थे, मेहनतकश बहुत थे यारों पर जिंदगी में फांके ही थे, गम के आंसू पी गया, मैं जीतकर भी हारा और सारा जहां जीत गया’... ‘सुर्खियां बटोरती मेरी बर्बादी, छिन गई जाने क्यों मेरी आजादी, तरकश के तीर बुझ गए, संय्या में मेरी कुंज गए, हौसले दरख्तों से झांकते गए, धूल जिंदगी की फांकते गए, झांक गए हम दीवारों से, हार गए सिपहसालारों से’। ‘शब्दकोश का अंत यहीं है, रात में तारे नहीं हैं, बुझा-बुझा सा जीवन है, बर्बादी की झांकी अब तो यौवन है, अरे रुठे हुओं को कैसे मनाऊं, बहुत है उनकी आबादी, सुर्खियां बटोरती मेरी बर्बादी’।  

बयान के अनुसार, इस तरह से मेरी लिखी हुई किताबें हैं, रजिस्टर में से निकाल लियो, लाल और पीले रंग का रजिस्टर है। जीने की उम्मीद खत्म हो गई है। लोग कहेंगे क्यों मर रहा, दूसरी नौकरी कर लेता, यूं नौकरी मुद्दतों में मिली, बड़ी मुश्किल से मैं चला रहा था। पहले नेमपाल सर थे, दो बात सिखाते थे। अब तो कुछ नहीं रहा, जूनियर भी ऐसा बर्ताव करता है, जैसे हम उसके नौकर हैं। सीओ साहब और अंकुर अग्रवाल साहब देवता आदमी हैं। मगर मैं जीवन में गिले शिकवे नहीं करता, मैं घुट घुटकर मरने में विश्वास रखता हूं। चुगली नहीं करता। 

...आखिरी दिन है मेरा
कुलदीप के बयान के अनुसार, अब ये दिन है 31 जनवरी, आखिरी दिन है मेरा। मैं नहीं चाहता किसी का नाम लेकर या कोतवाल का नाम लेकर कहूं, एसएचओ सिखा रहे थे, मगर कमेंट बाजी से मैं बहुत परेशान हो गया। सिखाने के एवज में मानसिक उत्पीड़न जानबूझकर करते थे, अंडर ट्रेनी होने के बावजूद चौकी इंचार्ज बना दिया।

पुराने विवेचकों की 50 चीजें इकट्ठा करके दे दी, जिनका मेरे से कोई अर्थ नहीं था, काम छूट जाए, चार बात सुनने को मिले, जवाब तलब हो, मैं ना कर पाऊं तो मेरे सम्मान को ठेस पहुंचेगी, लिखा जाएगा कामचोर है। फिर बोला, मेरी डायरी चौकी पर रखी है, मनोज तोमर दीवानजी को बता दिया है, डायरी के आखिरी पन्ने पर मैंने लिखा मेरा सुसाइड नोट है। 

एसएसपी साहब! मेरे बच्चे परेशान न हों
सम्मान मैंने सबका किया। जहां सम्मान का टकराव हुआ तो नौकरी छोड़ दी, अब फिर नौकरी छोड़ने की नौबत आ रही थी। लेकिन नौकरी छोड़कर भगोड़ा नहीं कहलाना चाहता, चाहे मेरी जान चली जाए। अपने भाइयों के लिए शहीद हो रहा हूं। जिन्होंने पहले ऐसा कदम उठाया या उठाने की सोच रहे हैं।

मेरी आत्मा को शांति मिल जाए, मेरे 
बच्चों मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं, मैं कई महीने से घुट घुटकर मरा, बच्चों के लिए जी रहा था, आज मेरा सम्मान, मेरे बच्चों के मोह पर भारी पड़ रहा है। 

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मोह पर भारी सम्मान
कुलदीप ने कहा कि एसएसपी साहब शत-शत नमन, आप मेरे देवता हैं भगवान हैं। साहब मेरे बच्चों का कुछ ऐसा कर दियो, वह परेशान ना रहें।  नया नियम हो, नए नियम से कर दिया, मैं अंडर ट्रेनिंग हूं। ऐसा न हो कि मुझे कचरे में ही जला दिया जाए, मरने से पहले सम्मान नहीं मिला, मरने के बाद तो सम्मान दे देना। पुलिस व्यवस्था में सुधार आ जाए, 1861 का पुलिस एक्ट है, इसकी वजह से दम घुट घुटकर लोग मर रहे हैं। मैं उन्हीं के नाम पर शहीद होना चाह रहा हूं, ताकि आगे कोई ऐसा कदम ना उठाए। उनके परिवार के लोगों के लिए भी कुछ किया जाए। आरएल थी मेरी दो दिन की, कोतवाल साहब को मेसेज किया था, उन्होंने पढ़ भी लिया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं की। 

दूसरी रिकॉर्डिंग
दूसरा रिकार्डिंग अंग्रेजी वाला बयान है, उसमें भी दरोगा कुलदीप सिंह ने सिस्टम की खामियों पर चोट की। उसमें बोला कि ‘आई हैव नो वे आउट, आई हैव टू क्विट, टुडे आईएम टोटली डिप्रेश, माई हार्ट इज बीटिंग बट माई सोल इज अवे, माई फादर, माई मदर, आई एम टोटली ब्रोकन नाऊ, इट्स माई लास्ट स्टेटमेंट, ओके जय हिंद सर’।

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