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Meerut Nikay Chunav: दिग्गजों को भी जनता ने नकारा, कई सूरमा धराशायी, शुरू से ही मुकाबले से बाहर रही कांग्रेस

Mon, 15 May 2023 10:26 AM IST
Dimple Sirohi संकल्प रघुवंशी, अमर उजाला, मेरठ
संकल्प रघुवंशी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 15 May 2023 10:26 AM IST
सार

मेरठ निकाय चुनाव के दौरान इस बार अलग ही रंग देखने को मिले। इस बार के निकाय चुनाव में राजनीति के कई धुरंधर लंबे सियासी अनुभव के बावजूद फेल हो गए। वहीं कांग्रेस की बात करें तो पार्टी प्रत्याशी चुनाव प्रचार तक करने नहीं उतरे और कांग्रेस शुरुआत से ही मुकाबले से बाहर हो गई।

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Up Nikay Chunav: Veterans were also rejected by the public, many defeated, Congress was out from the beginning
भाजपा, कांग्रेस और सपा के चुनाव चिन्ह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ निकाय चुनाव के नतीजों ने तमाम दिग्गजों के पैरों तले जमीन खिसका दी। निगम में मजबूत दखल रखने वाले और अपनी सियासी पहचान के बूते दखल रखने वाले कई दिग्गज धराशायी हो गए। इनमें न केवल भाजपा, बल्कि सपा के भी कई चेहरे शामिल हैं। वहीं कुछ दिग्गजों के अपने ही वार्ड से अन्य दलों के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।
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समाजवादी पार्टी की महिला सभा की जिलाध्यक्ष रहीं संगीता राहुल सिवालखास विधानसभा से दो बार चुनाव लड़ चुकी हैं। निगम की सियासत का उन्हें धुरंधर माना जाता है। उनके पति, वह खुद तथा उनकी बेटी आचल राहुल भी सभासद रह चुके हैं।
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निगम की राजनीति का लंबा अनुभव होने के बावजूद इस बार जनता ने उन्हें नकार दिया। यहां से भाजपा के अरुण ने जीत दर्ज की। छात्र राजनीति में खासा दखल रखने वाली मीनल गौतम भी जनता के बीच में खुद को साबित नहीं कर सकीं। उनके माता, पिता के साथ ही परिवार भी राजनीति में अच्छा दखल रखता है। वार्ड-58 कैलाशपुरी में निर्दलीय के तौर पर उतरे गगनदीप ने यहां से मजबूत जीत हासिल की।

युवा नेता के रूप में पहचान रखने वाले अंशुल गुप्ता को भी वार्ड-58 सूरजकुंड की जनता ने नकार दिया। निर्दलीय सुमित शर्मा ने भारी मत हासिल किए। दो बार पार्षद रह चुके ललित नागदेव इस बार अपने ही सिविल लाइंस वार्ड 32 से पत्नी मालविका नागदेव को चुनाव लड़वा रहे थे। 

उनका सियासी अनुभव भी इस बार काम नहीं आया और जनता ने निर्दलीय अनुराधा गुलाठी में विश्वास जताकर निगम के सदन में पहुंचाया। ऐसे ही भाजपा में मजबूत दखल रखने वाले और कई पदों पर काम कर चुके प्रमोद दीक्षित भी शताब्दीनगर वार्ड-31 में लोगों का विश्वास नहीं जीत सके। यहां सपा के कुलदीप ने जीत हासिल की। निकाय चुनाव में सोफीपुर और बाईपास की समस्याओं को मजबूती से उठाने वाले अजित सिंह भी कोई करामात नहीं दिखा सके। 

कई बार के सभासद अजित सिंह को बसपा के नरेश सैनी ने करारी शिकस्त दी। वहीं दूसरी ओर सपा से शहर विधायक रफीक अंसारी के वार्ड-80 से एआाईएमआईएम की महसर जीतीं। 
सपा विधायक अतुल प्रधान के वार्ड 26  से भाजपा प्रत्याशी डाॅ. सत्यपाल निर्दलीय जीते थे।

शुरू से ही मुकाबले से बाहर रही कांग्रेस, प्रचार तक करने नहीं उतरे प्रत्याशी 
कर्नाटक में जीत का जश्न मना रही कांग्रेस निकाय चुनाव में शुरू से ही सीन से बाहर रही। पार्टी प्रत्याशी के नाम की घोषणा के साथ ही गुटबाजी हावी हो गई थी। सुरेंद्र सैनी तो बगावत कर निर्दलीय ही चुनाव मैदान में कूद पड़े। वहीं पार्टी पदाधिकारियों ने नसीम कुरैशी के निष्क्रिय रहने, चुनाव प्रचार न करने और बस्ता तक न लगने के लिए जिम्मेदार ठहराया। सुरेंद्र सैनी को पार्टी ने अब निष्कासित कर दिया है।

निकाय चुनाव में भाजपा जहां बागी प्रत्याशियों के साथ 47 पार्षदों का दावा कर रही है तो वहीं सपा अपने गठबंधन के तहत 18 पार्षद अपने बता रही है। इसके अलावा एआईएमआईएम के 11, बसपा के 6, रालोद के दो व इंडियन मुस्लिम लीग का भी एक प्रत्याशी पार्षद बना है। इसके अलावा कुछ निर्दलीय अपने बूते भी निगम के सदन में पहुंचे हैं।

कांग्रेस के लिए वोट का सूखा बना हुआ है। कांग्रेस प्रत्याशी नसीम कुरैशी को 15473 मत मिले और वह पांचवें नंबर पर रहे, जबकि उनसे नीचे आम आदमी पार्टी की ऋचा सिंह ही रहीं, जिन्हें 6256 मत मिले। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि नसीम ने चुनाव प्रचार तक में दिलचस्पी नहीं ली।

नसीम कुरैशी का कहना है कि चुनाव से दो दिन पहले तक मुस्लिम वोटर उनके साथ था। कर्नाटक के एग्जिट पोल के बाद भाजपा ने ध्रुवीकरण की राजनीति की और एआईएमआईएम की ओर मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण करा दिया। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत करते हुए लोगों के बीच जाकर जुड़ेंगे। महानगर अध्यक्ष जाहिद अंसारी ने बताया कि पिछली बार दो पार्षद चुनाव जीते थे, जबकि इस बार तीन पहुंचे हैं। संगठन को मजबूत कर बेहतरी से काम किया जाएगा।

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