फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   UP News: two thousand crore industries related to publishing have been shut down due to Corona in Meerut

कोरोना की मार: प्रकाशन से जुड़े दो हजार करोड़ के उद्योग पर लटका ताला, 1400 कर्मचारी हुए बेरोजगार

Thu, 27 May 2021 04:05 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आशुतोष भारद्वाज, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आशुतोष भारद्वाज, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 27 May 2021 04:05 PM IST
सार

मेरठ में प्रकाशन से जुड़े उद्योग पर कोरोना का बड़ा असर पड़ा है। करीब दो हजार करोड़ के उद्योग पर ताला लटक गया है। वहीं एक महीने में 1400 कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। पढ़िए अमर उजाला की खास रिपोर्ट।

विज्ञापन
UP News: two thousand crore industries related to publishing have been shut down due to Corona in Meerut
कोरोना का असर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कोरोना महामारी के बीच प्रकाशन से जुड़े मेरठ शहर के दो हजार करोड़ रुपये के उद्योग पर ताला लगा हुआ है। प्रकाशन संस्थानों को 2020 से अब तक बंदी के हालात से गुजरना पड़ रहा है। पब्लिशर्स के लिए काम करने वाले प्रिंटर्स का दो साल का 300 करोड़ से अधिक का भुगतान रुका हुआ है। शहर में पूरा चैनल प्रिंटर, पब्लिकेशन, डिस्ट्रीब्यूटर से रिटेलर तक प्रभावित हैं। 

विज्ञापन


ऑनलाइन पढ़ाई के चलते किताबों की बिक्री कम हुई है। दो वर्ष से भुगतान न होने और कोविड की पाबंदियों के कारण पब्लिशर्स, प्रिंटर्स और बाइंडर्स के प्रतिष्ठानों पर ताले लटके हैं। कई प्रिंटर्स और बाइंडर्स ने किराए की दुकानें ही खाली नहीं कीं, बैंक का कर्ज चुकाने के लिए मशीनें भी बेच दी है।
विज्ञापन


शहर में लगभग 70 प्रिंटर्स, 80 चिल्डर्न बुक पब्लिशर्स और 22 हायर एजूकेशन बुक पब्लिशर्स हैं। एक पब्लिशर का कई सौ करोड़ का सालाना निवेश होता है, जिसका रिटर्न उसे अगले वर्ष प्राप्त होता है। 2019 में व्यापार पूर्व की भांति चला, लेकिन 2020 में भुगतान के समय पाबंदियां लागू हो गईं। इस साल तो हालात और भी चिंताजनक हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बिजली बिलों का भुगतान अटका
ऑफसेट प्रिंटिंग मशीन लगाने वालों का औसत बिजली बिल 54 हजार रुपये है। मशीनें बंद होने से कई कारोबारी बिल नहीं जमा कर पाए और कनेक्शन कट गए। ज्यादातर व्यापारी बैंक से सीसी लिमिट पर काम करते हैं। करोड़ों रुपये बाजार में फंसने से बैंक का ब्याज भी बढ़ रहा है।

एक माह में 1400 कर्मचारी बेरोजगार
बड़े प्रकाशन संस्थानों ने दो साल से हो रहे घाटे के कारण कर्मचारियों को निकाल दिया है। इस साल अप्रैल में 1400 से अधिक कर्मचारियों को निकाला गया है। इस बीच कुछ प्रिंटर्स ने स्वयं को दिवालिया घोषित करते हुए दुकानों और मशीनों को बेच दिया है।

सरकार को 240 करोड़ राजस्व का घाटा
प्रिंटिंग में सर्वाधिक कागज का इस्तेमाल होता है। कॉपी किताबों पर जीएसटी नहीं हैं, लेकिन कागज पर टैक्स लगता है। ऐसे में मेरठ की पब्लिशिंग इंडस्ट्री सीधे-सीधे प्रतिवर्ष 240 करोड़ का जीएसटी सरकार को देती है। इस वर्ष कारोबार बंद होने के कारण टैक्स नहीं दिया गया है।

एसोसिएशन पदाधिकारी बोले- बैंकों का ब्याज माफ करे सरकार
प्रदेश सरकार को सर्वाधिक टैक्स देने वाली पब्लिशिंग इंडस्ट्री को राहत देने के लिए सरकार को बैंक ब्याज माफ करना चाहिए। आगे भी उद्योग चलाने के लिए धनराशि की जरूरत पड़ेगी। - पंकज कुमार जैन, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ चिल्डर्न बुक पब्लिशर्स

बिजली बिल ने बिगाड़ी व्यवस्था
औद्योगिक इकाइयों में मशीनें बंद हैं। इसके बाद भी बेसिक विद्युत बिल 50 हजार रुपये से अधिक है। 250 से अधिक उद्यमियों पर लाखों रुपये का विद्युत बिल बकाया चल रहा है। - आशु रस्तौगी, अध्यक्ष, प्रिंटर्स एसोसिएशन

प्रकाशन उद्योग की बड़ी क्षति
1.5 लाख से अधिक व्यापारी और कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। मांग न होने के कारण कारोबार बंद हैं। उद्यमियों के पास विकल्प नहीं हैं। सरकार को उद्योग को राहत के उपाय करने होंगे। - अजय रस्तोगी, एमडी, चित्रा प्रकाशन

मजबूरी में काम ही बदल लिया
एक-दो मशीन पर काम करने वाले उद्यमियों के पास विकल्प नहीं बचा है। शहर में पांच उद्यमियों ने ट्रेड ही बदल लिया है। मशीनें बेच दी हैं। कुछ ने खुद को दिवालिया तक घोषित कर दिया है। - तुषार अरोड़ा, एमडी, न्यू किंग ऑफसेट प्रिंट

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed