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पीवीवीएनएल के कारनामे: एमडी के पास पहुंच रहे भ्रष्टाचार के मामले, कर्मचारी रुपये लेकर करा देते हैं कनेक्शन के लिए आवेदन

Fri, 20 Aug 2021 01:27 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 20 Aug 2021 01:27 PM IST
सार

श्रीकांत ने बताया कि टीजी-टू ने कनेक्शन कराने के लिए 20 हजार रुपये लिए और अगले दिन बिना मीटर के ही केबल खींच कर बिजली चालू कर दी।

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UP News: There have been many corruption cases in PVVNL in Meerut and MD Arvind Mallappa Bangari has ordered an inquiry
मीटर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

झटपट बिजली कनेक्शन योजना से न तो भ्रष्टाचार रुक पा रहा है और न ही उपभोक्ताओं का उत्पीड़न। बिजली कर्मचारी खुद ही पैसा लेकर योजना को पलीता लगा रहे हैं। कहीं स्थायी कनेक्शन की बजाय अस्थायी कनेक्शन दिया जा रहा है तो कहीं बिना कनेक्शन के ही बिल भेजा जा रहा है। ऐसे तमाम मामले कंपनी एमडी तक पहुंच रहे हैं। बढ़ती शिकायतों के चलते एमडी ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगते हुए जांच कराने के आदेश दिए हैं।

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केस नंबर एक 
मवाना रोड स्थित अमन विहार कॉलोनी निवासी श्रीकांत ने कनेक्शन के लिए गंगानगर स्थित उपखंड कार्यालय में संपर्क किया था। श्रीकांत ने बताया कि वहां मौजूद टीजी-टू ने कनेक्शन कराने के लिए 20 हजार रुपये लिए और अगले दिन बिना मीटर के ही केबल खींच कर बिजली चालू कर दी। तीन दिन बाद मीटर लगाने वाली टीम पहुंची तो मीटर सीलिंग पर अस्थायी कनेक्शन लिखा देख उसके होश उड़ गए। उसने संबंधित टीजी-टू से बात की तो बताया कि अभी अस्थायी कनेक्शन किया है तीन महीने बाद इसे स्थायी करा दिया जाएगा। श्रीकांत तीन महीने बाद कार्यालय गया तो उसे कनेक्शन का 70 हजार रुपये का एस्टीमेट जमा करने को कहा गया। मामले में एमडी ने जांच के आदेश दिए हैं।
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केस नंबर दो  
कंकरखेड़ा निवासी एक महिला ने अपनी दुकान के लिए कामर्शियल कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। तीन महीने बाद कनेक्शन तो नहीं हुआ, लेकिन कनेक्शन पर बकाया बिल होने की बात कहते हुए बिजली टीम कनेक्शन काटने पहुंच गई। महिला ने दिखाया कि उनकी दुकान पर तो कनेक्शन है ही नहीं तो फिर बकाया बिल कैसा। ये देख टीम वहां से खिसक गई। ऐसे अनेक मामले हैं जो परेशान उपभोक्ता अधिकारियों के पास लेकर जा रहे हैं।

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भ्रष्टाचार रोकने के लिए शुरू की गई है झटपट कनेक्शन योजना 
कनेक्शन के लिए चक्कर कटाने, उपभोक्ताओं से सुविधा शुल्क मांगे जाने आदि की शिकायतों को देखते हुए यूपीपीसीएल ने ऑनलाइन झटपट कनेक्शन योजना चला रखी है। योजना के अंतर्गत 100 रुपये का भुगतान करके एक किलोवाट से 49 किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए आवेदन किया जा सकता है। योजना 10 दिन के अंदर बिजली कनेक्शन की गारंटी देती है। विभाग का दावा है ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था से उपभोक्ताओं का शोषण रुकेगा और कार्यालयों के चक्कर काटने में खर्च होने वाला धन व समय भी बचेगा। 

कार्यालय में बैठे ही निरस्त कर देते हैं आवेदन 
आवेदन के बाद जेई को साइट देखकर पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट भरनी होती है। यह कार्य सात दिन के अंदर करना होता है। लेकिन सुविधा शुल्क नहीं मिलने पर तमाम कमियां गिनाकर या पता गलत होने, उपभोक्ता के नहीं मिलने आदि की रिपोर्ट लगाकर आवेदन निरस्त कर दिया जाता है। ऐसी शिकायतों को रोकने के लिए ऊर्जा मंत्री भी सख्त निर्देश दे चुके हैं और पोर्टल की लगातार निगरानी कराई जा रही है। इसके बावजूद इस तरह के केस रोज अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं। 

क्या बोले अधिकारी 
उपभोक्ता के बिना मांगे अस्थायी कनेक्शन देने और पैसा लेने का मामला गंभीर है। झटपट कनेक्शन योजना में गड़बड़ी करने वालों की जांच के आदेश दिए गए हैं। उपभोक्ताओं का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। झटपट कनेक्शन योजना उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने के लिए ही शुरू की गई है। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल

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