UP: अनूठी विरासत में शामिल होंगे मेरठ के 7 वट वृक्ष, 1857 की क्रांति व अंग्रेजों के जुल्मों का साक्षी ये वृक्ष
अमर उजाला की खास रिपोर्ट : मेरठ के सात वट वृक्ष अनूठी विरासत में शामिल होंगे। बताया गया कि यह वृक्ष 1857 की क्रांति और अंग्रेजों के जुल्मों का साक्षी है।
विस्तार
महाभारतकाल से लेकर डेढ़ से दो सदी तक प्राचीन मेरठ के सात वट वृक्षों को अब देश की अनूठी विरासत में शामिल करने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश जैव विविधता बोर्ड ने इन वट वृक्षों को विरासत में शामिल करने के लिए शासन को सूची भेजी है। इनमें से पांच वट वृक्ष के नाम जा चुके हैं और दो अन्य को चिह्नित कर इनके नाम सूची में शामिल किए जाएंगे। ये प्राचीन वृक्ष ऐतिहासिक और पौराणिक काल के साथ ही गुलामी से आजाद हुए राष्ट्र की प्रगति के भी साक्षी हैं। बढ़ते प्रदूषण के बीच ये अब भी 24 घंटे मानव जीवन को ऑक्सीजन दे रहे हैं।
हस्तिनापुर पांडेश्वर महादेव मंदिर महाभारतकालीन इतिहास संजोए है। इस प्राचीन मंदिर में बरगद का पेड़ पांडवों की बाल क्रीड़ा का साक्षी है। वहीं, परीक्षितगढ़ के बढ़ला में भी 150 से 200 वर्ष पुराने वट वृक्ष हैं। इसी तरह गांधी बाग स्थित शिव मंदिर में ऐसा ही प्राचीन वट वृक्ष है। इसकी शाखाओं से पूरा मंदिर ढका हुआ है। यहां भ्रमण के लिए आने वाले लोग मंदिर के साथ वट वृक्ष की भी परिक्रमा करते हैं। गांधी बाग में ही टेराकोटा पार्क के पास भी एक विशाल वट वृक्ष है। यह वृक्ष 1857 की क्रांति और अंग्रेजों के जुल्मों का साक्षी है।
इसलिए खास हैं ये वट वृक्ष
- महाभारतकाल की घटनाओं के साक्षी
- स्वतंत्रतता संग्राम से विकसित होते राष्ट्र के गवाह
- धार्मिक अनुष्ठानों में भी इनका महत्व कम नहीं
- प्राचीन होने के बावजूद नए दौर में भी मानव जीवन के सहयोगी
- अब तक बेहतर संरक्षण न मिलने के बावजूद वजूद रहा कायम
यह भी पढ़ें: UP: 2000 के नोट पर आरबीआई का बड़ा फैसला, यहां पढ़ें पश्चिमी यूपी के लोगों की प्रतिक्रियाएं
वट वृक्ष तने की गोलाई सेमी
- हस्तिनापुर पांडेश्वर महादेव मंदिर - 680.0
- सरधना दौराला मार्ग - 695.0
- परीक्षितगढ़-ग्राम बढ़ला - 480
- परीक्षितगढ़-ग्राम बढ़ला - 380
- परीक्षितगढ़-ग्राम बढ़ला - 365
- कमिश्नरी कार्यालय के बाहर ---
- गांधी बाग शिव मंदिर स्थित वट वृक्ष ---
यह भी पढ़ें: ये कैसी मोहब्बत: विदेशी महिला ने 40 दिन में ही ठुकरा दिया प्यार, टूटा रिटायर्ड अफसर का सपना, दिलचस्प है किस्सा
विरासत सूची में फिलहाल पांच वट वृक्षों की सूची भेजी गई है। अब गांधी बाग और कमिश्नरी कार्यालय के बाहर स्थित वट वृक्षों को भी सूची में शामिल किया जा रहा है। - राजेश कुमार, डीएफओ