भाजपा में नहीं थम रही गुटबाजी, लगातार इन वजहों से बढ़ रही मुश्किलें
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भाजपा में गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि गुटबाजी पर लगाम कसने के लिए संगठन में जिला और महानगर स्तर पर बड़े फेरबदल किये गये, लेकिन आपसी गुटबाजी के चलते अभी तक युवा और महिला मोर्चा के जिलाध्यक्ष घोषित नहीं हो पाए हैं। इतना ही नहीं नये जिलाध्यक्ष को लेकर भी गुटबाजी का एक मामला रविवार को सामने आया। जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
भाजपा में लोकसभा चुनाव 2014 के बाद से शुरू हुई गुटबाजी विधानसभा चुनाव 2017 के बाद जैसे चरम पर पहुंच गई। संगठन स्तर के साथ ही विधायकों में भी यह गुटबाजी चलती रही। इसका परिणाम रहा कि जो काम विपक्षियों को करना चाहिए था, वह खुद भाजपाई ही एक-दूसरे के खिलाफ करते नजर आये। इसी गुटबाजी के चलते नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष अश्वनी त्यागी की पहल पर बीते दिनों जिलाध्यक्ष पद पर पूर्व विधायक रविंद्र भड़ाना और महानगर अध्यक्ष पद पर मुकेश सिंघल को नियुक्त किया गया। इसके साथ ही कई मोर्चा और प्रकोष्ठ के अध्यक्ष, संयोजक व प्रभारी नियुक्त कर दिए गए। लेकिन देहात क्षेत्र के विधायकों और संगठन पदाधिकारियों की गुटबाजी में अभी तक युवा मोर्चा और महिला मोर्चा के जिलाध्यक्षों की घोषणा नहीं हो सकी है।
देहात क्षेत्र के चारों विधायक ठा. संगीत सोम, दिनेश खटीक, सत्यवीर त्यागी और जितेंद्र सतवाई के साथ ही देहात के एक हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर की आपस में बन नहीं रही है। सत्यवीर त्यागी जहां गुटबाजी से दूर अकेले ही अपने काम में लगे हैं, तो दिनेश खटीक, जितेंद्र सतवाई और डॉ. सोमेंद्र तोमर एक खेमे में हैं। जबकि संगीत सोम अलग खेमे में है। पूर्व जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा खेमा जिन्हें युवा और महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाना चाहता था, दूसरा गुट उसका विरोध कर रहा था।
जातिगत समीकरण में अटका मामला
इस समय क्षेत्रीय अध्यक्ष त्यागी और जिलाध्यक्ष गुर्जर हैं। युवा मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष गुर्जर हैं तो युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष पद पर गुर्जर या त्यागी बिरादरी से नियुक्त होना मुश्किल होगा। ऐसे में दूसरी बिरादरी के युवा को प्रतिनिधित्व दिए जाने पर मंथन चल रहा है, लेकिन इसमें भी गुटबाजी हावी चली है। वहीं महिला मोर्चा की क्षेत्रीय अध्यक्ष जाट हैं तो महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष पद पर किसी ऐसी बिरादरी की महिला को प्रतिनिधित्व दिये जाने की कवायद है, जिससे जातीय गणित को साधा जा सके। इसके चलते मामला फंसा हुआ है।
टिकट कटना भी एक वजह
रविवार को दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर ने नवनियुक्त महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल के लिए स्वागत समारोह आयोजित किया, लेकिन जिलाध्यक्ष रविंद्र भड़ाना को इसमें उपेक्षित कर दिया। बड़ी बात ये है कि दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में देहात का भी एक मंडल आता है। जबकि इससे चार दिन पूर्व कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने नवनियुक्त दोनों अध्यक्षों का स्वागत किया था। डॉ. सोमेंद्र तोमर द्वारा रविंद्र भड़ाना का स्वागत न करना पार्टी में चर्चा का विषय बना है। इसका कारण ये भी है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में रविंद्र भड़ाना और डॉ. सोमेंद्र तोमर दोनों ही दक्षिण से टिकट के दावेदार थे, लेकिन ऐन मौके पर टिकट भड़ाना को दिया गया। इस बार रविंद्र भड़ाना का टिकट काटकर डॉ. सोमेंद्र तोमर को दे दिया गया। ऐसे में दोनों के बीच तभी से छत्तीस का आंकड़ा चला आ रहा है।
सूची मुख्यालय भेजी जा चुकी है
कुछ जनपदों में युवा मोर्चा और महिला मोर्चा के अध्यक्षों की घोषणा नहीं हुई है। मेरठ में भी अभी अध्यक्षों की घोषणा रुकी हुई हैं, इनकी सूची प्रदेश मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। जल्द ही घोषणा हो सकती है। -रविंद्र भड़ाना, जिलाध्यक्ष भाजपा
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